किताब विवाद में आठ अफसर सस्पेंड, आतंकी मकबूल भट को बताया था महान

Sandeep Kumar | Jul 05, 2026, 19:44 IST
आतंकी हाफिज को बताया था महान
जम्मू-कश्मीर के सरकारी स्कूलों के लिए दो किताबें खरीदी गई थीं। इनमें आतंकी हाफिज सईद और अलगाववादी मकबूल भट की तारीफ की गई थी। इस मामले में पुलिस ने UAPA के तहत FIR दर्ज कर ली।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • सरकारी स्कूलों के लिए दो किताबें खरीदी गईं।
  • किताबों में हाफिज सईद की कथित तारीफ मिली।
  • मकबूल भट को लेकर भी विवादित सामग्री थी।
  • पुलिस ने UAPA के तहत FIR दर्ज की।
  • शिक्षा विभाग ने 8 अफसर सस्पेंड किए।

किन किताबों पर हुआ विवाद

विवाद की जड़ में दो किताबें हैं। पहली किताब हिलाल अहमद और संतोष मीना ने लिखी है। इसका नाम है पर्सनैलिटीज एंड लीजेंड्स ऑफ जम्मू-कश्मीर। इसे जम्मू की ओबेरॉय बुक सर्विस ने छापा है।



दूसरी किताब सुशांत गिरी ने लिखी है। इसका नाम है ग्रेट पर्सनैलिटी ऑफ जम्मू-कश्मीर। इसे दिल्ली के अनुराग प्रकाशन ने प्रकाशित किया है। अधिकारियों के मुताबिक पहली किताब की 123 प्रतियां जम्मू, रामबन और उधमपुर भेजी गई थीं। दूसरी किताब की 128 प्रतियां जम्मू और बारामूला में बांटी गई थीं।



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किताब में क्या आपत्तिजनक लिखा था

किताब में जम्मू-कश्मीर को भारत अधिकृत कश्मीर बताया गया है। प्रतिबंधित संगठन जेकेएलएफ (JKLF – Jammu Kashmir Liberation Front) के संस्थापक मकबूल भट को शहीद लिखा गया है। इसके अलावा सैयद अली शाह गिलानी, शब्बीर शाह और मीरवाइज उमर फारूक जैसे अलगाववादी नेताओं को प्रभावशाली व्यक्तित्व बताया गया है। किताब में मीरवाइज उमर फारूक को कश्मीर की आखिरी उम्मीद तक कहा गया है। यही हिस्सा सबसे ज्यादा विवाद की वजह बना।



पूर्व डीजीपी ने जताई कड़ी आपत्ति

जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी एसपी वैद ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उनका कहना है कि मसरत आलम, गिलानी और शब्बीर शाह जैसे लोग पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI – Inter-Services Intelligence) का एजेंडा बढ़ाते रहे हैं।


वैद ने कहा कि इन्हें महान नेता बताने से नई पीढ़ी को गलत संदेश जाएगा। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सच में कश्मीर के लोग मीरवाइज को आखिरी उम्मीद मानते हैं। उनके मुताबिक ऐसी बातें सीधे पाकिस्तान के एजेंडे को मदद पहुंचाती हैं।



भाजपा ने बताया एकेडमिक जिहाद

भाजपा ने इस पूरे मामले को एकेडमिक जिहाद करार दिया है। पार्टी ने दोनों किताबों पर तुरंत बैन लगाने की मांग की है। साथ ही जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग भी उठाई है। भाजपा ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से सीधी अपील की है। पार्टी चाहती है कि शिक्षा मंत्री के खिलाफ भी कार्रवाई हो।



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स्कूल शिक्षा विभाग ने कैसे चुनी थीं किताबें

राज्य के 1832 सरकारी स्कूलों और 394 पीएम श्री (PM SHRI – PM Schools for Rising India) स्कूलों के लिए समग्र शिक्षा योजना के तहत किताबें खरीदी जानी थीं। इसके लिए जम्मू और कश्मीर संभाग की चार सब कमेटियां बनाई गई थीं।



इन कमेटियों ने 364 पब्लिशर्स में से कुल 463 किताबें चुनी थीं। विवाद के बाद विभाग ने खुद माना कि सब कमेटी और सुपरवाइजरी अधिकारियों ने गंभीर लापरवाही बरती। विभाग ने दोनों लेखकों और पब्लिशर्स को केंद्र शासित प्रदेश में ब्लैकलिस्ट कर दिया है।



आठ अधिकारी हुए सस्पेंड

जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने इस मामले में सख्त कार्रवाई की। उन्होंने स्कूल शिक्षा विभाग के आठ अधिकारियों को निलंबित कर दिया। एक संविदा कर्मचारी की सेवा भी समाप्त कर दी गई।



सस्पेंड होने वालों में लाइब्रेरी कोऑर्डिनेटर फजिल इमरान सिद्दीकी और असिस्टेंट कोऑर्डिनेटर गुरजीत सिंह शामिल हैं। इसके अलावा कठुआ, बडगाम, किश्तवाड़ और पुंछ के स्कूलों के प्रिंसिपल और लेक्चरर भी सस्पेंड सूची में हैं। मामले की जांच के लिए दो अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। उन्हें 30 दिन के भीतर रिपोर्ट सौंपनी होगी।



पब्लिशर के दफ्तर पर छापा

FIR दर्ज होने के बाद काउंटर इंटेलिजेंस टीम हरकत में आई। टीम ने जम्मू के बहु प्लाजा स्थित एक पब्लिशर के दफ्तर पर छापा मारा। जांच के दौरान पुलिस ने कई दस्तावेज और डिजिटल सबूत जब्त किए हैं।



पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS – Bharatiya Nyaya Sanhita) की कई धाराओं में केस दर्ज किया है। इनमें उकसावा, आपराधिक साजिश और देश की एकता को खतरे में डालने जैसे आरोप शामिल हैं। साथ ही गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम की धारा 13 भी लगाई गई है। फिलहाल इस मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।



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