जनगणना 2027: आज से जियो-मैपिंग से हर घर की होगी डिजिटल गिनती
News In Short
- भारत की 16वीं जनगणना का पहला चरण आज (01 अप्रैल) से शुरू हो रहा है।
- इस बार पहली बार पूरी जनगणना पूरी तरह डिजिटल होगी।
- मकानों की गिनती में जियो-रेफरेंसिंग यानी जियो-मैपिंग का उपयोग होगा।
- पहले चरण में हाउस लिस्टिंग होगी और 33 सवाल पूछे जाएंगे।
- जनगणना का डेटा पूरी तरह गोपनीय होगा और आरटीआई के दायरे से बाहर रहेगा।
News In Detail
पहली बार पूरी तरह डिजिटल जनगणना
भारत की 16वीं जनगणना का पहला चरण बुधवार यानी 01 अप्रैल से शुरू हो रहा है। जनगणना 2027 में पूरी तरह हाईटेक होगी और इस बार मकानों की गिनती में जियो-रेफरेंसिंग का इस्तेमाल होगा। इसका मतलब है कि हर घर का लोकेशन डिजिटल मैप पर दर्ज होगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि न कोई मकान छूटे और न किसी की जानकारी दो बार दर्ज हो।
जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने बताया कि पहले चरण में हाउस लिस्टिंग होगी। दूसरा चरण यानी जनसंख्या गणना फरवरी 2027 में होगी। आजादी के बाद पहली बार जिला का डेटा जुटाया जाएगा। इससे पहले 1931 में ऐसा हुआ था।
33 सवाल, चार बड़े विषय
पहले चरण में जनगणना कर्मचारी हर घर में जाकर 33 सवाल पूछेंगे। ये सवाल चार बड़े विषयों पर आधारित हैं: मकान और उसकी बनावट, परिवार और मुखिया की जानकारी, सुविधाएं और संसाधन, और डिजिटल उपकरण तथा वाहन।
मकान से जुड़े सवालों में भवन संख्या, निर्माण सामग्री, छत की सामग्री, मकान का उपयोग और घर का नंबर जैसी जानकारी ली जाएगी। परिवार की जानकारी में मुखिया का नाम, जेंडर, जाति, अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा और मकान की मालिकाना हक की स्थिति पूछी जाएगी।
यहां देखें जनगणना 2027 के 33 सवालों की सूची...
सुविधाओं से जुड़े सवाल भी अहम
सुविधाओं के बारे में पूछे जाने वाले सवालों में पीने के पानी का मुख्य स्रोत, शौचालय की उपलब्धता, बिजली का स्रोत, स्नान की सुविधा, रसोई की उपलब्धता और एलपीजी (Liquefied Petroleum Gas) या पाइप गैस का कनेक्शन शामिल है। खाना पकाने के लिए ईंधन के विकल्पों पर भी सवाल होगा।
डिजिटल उपकरण और वाहन से जुड़े सवालों में इंटरनेट की सुविधा, लैपटॉप या कंप्यूटर, मोबाइल फोन या स्मार्टफोन, साइकिल, स्कूटर या मोटरसाइकिल, और कार, जीप या वैन की उपलब्धता के बारे में पूछा जाएगा।
लिव-इन, रेडियो और वाहन पर स्पष्ट नियम
जनगणना में कुछ खास परिभाषाएं भी तय की गई हैं। यदि घर में लिव-इन में रहने वाले जोड़े हैं तो उन्हें डिजिटल युगल माना जाएगा। वहीं, ई-रिक्शा या ऑटो रिक्शा को बाइक नहीं माना जाएगा।
रेडियो की बात करें तो यदि मोबाइल में एफएम (FM) है तो उसे रेडियो गिना जाएगा। वहीं, मोबाइल पर यूट्यूब देखना टीवी नहीं माना जाएगा, इसके लिए अलग टीवी का होना जरूरी है। घर में एक से ज्यादा भाग में खाना बनता है और लोग अलग सोते हैं तो उन्हें अलग परिवार माना जाएगा।
कर्मचारी नहीं पूछेंगे ये तीन बातें
जनगणना कर्मचारी आपसे कुछ जानकारी बिल्कुल नहीं मांगेंगे। महीने की कमाई या बैंक बैलेंस नहीं पूछा जाएगा। आधार, पैन या किसी अन्य पहचान पत्र का नंबर देने का कोई दबाव नहीं होगा। बैंक खाता नंबर या ओटीपी (One Time Password) जैसी निजी वित्तीय जानकारी भी नहीं मांगी जाएगी।
खुद भी भर सकते हैं जानकारी
यदि आप खुद जानकारी भरना चाहते हैं तो सरकार ने इसके लिए पोर्टल census.gov.in बनाया है।
- इस पर लॉगिन करके, अपना राज्य चुनें और कैप्चा भरें।
- मुखिया का नाम और मोबाइल नंबर दर्ज करें।
- भाषा चुनें, पता और मैप पर लाल मार्कर से घर की सटीक लोकेशन दर्ज करें।
- इसके बाद 33 सवालों के जवाब दें।
- पूरा डेटा चेक करने के बाद फाइनल सबमिट करें।
जनगणना कर्मचारी आने पर वे एसई आईडी (SE ID) दिखाएंगे। उसका स्क्रीनशॉट लें, यह एसएमएस और ईमेल पर भी आएगा।
डेटा की सुरक्षा पर खास ध्यान
इस बार जनगणना के डेटा को बैंकिंग सिस्टम जैसी मजबूत सुरक्षा मिलेगी। जनगणना का डेटा परमाणु ऊर्जा केंद्र, नेशनल पावर ग्रिड या मिलिट्री नेटवर्क को मिलने वाली सुरक्षा के समान होगी।
नेशनल क्रिटिकल इन्फॉर्मेशन इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोटेक्शन सेंटर (National Critical Information Infrastructure Protection Centre) की निगरानी में डेटा रहेगा। इसका मकसद बाहरी और आंतरिक खतरों से डेटा की सुरक्षा करना है।
सरकार ने इस जनगणना के आंकड़ों को अति-संवेदनशील सूचना बुनियादी ढांचे की श्रेणी में शामिल किया है। डेटा लीक की स्थिति में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई होगी।
यह खबर क्यों जरूरी है?
जनगणना किसी भी देश की नीति निर्माण की नींव होती है। भारत में आखिरी जनगणना 2011 में हुई थी। यानी 14 साल बाद देश को अपनी असली आबादी और संसाधनों का सही अंदाजा लगेगा। भारतीय संविधान की सूची I यानी संघ सूची (Union List) में जनगणना को केंद्र की जिम्मेदारी बताया गया है। इस डेटा के आधार पर ही स्कूल, अस्पताल, राशन वितरण, आरक्षण और परिसीमन जैसे अहम फैसले होते हैं। पहली बार डिजिटल और जियो-मैपिंग आधारित जनगणना होने से डेटा की सटीकता बढ़ेगी। आम नागरिक को यह समझना जरूरी है कि यह सिर्फ गिनती नहीं, उनके अधिकारों और सुविधाओं की नींव है।
thesootr.com
FAQ
- जनगणना 2027 में क्या नया है?
16वीं जनगणना पहली बार पूरी तरह डिजिटल होगी। मकानों की गिनती में जियो-रेफरेंसिंग तकनीक का इस्तेमाल होगा ताकि कोई घर न छूटे और न दोबारा दर्ज हो। पहले चरण में 33 सवाल पूछे जाएंगे। डेटा को बैंकिंग सिस्टम जैसी सुरक्षा मिलेगी और वह आरटीआई के दायरे से बाहर रहेगा। नागरिक खुद भी census.gov.in पोर्टल पर जाकर जानकारी भर सकते हैं। - जनगणना 2027 में कौन सी जानकारी नहीं देनी है?
जनगणना कर्मचारी आपसे कमाई या बैंक बैलेंस नहीं पूछेंगे। आधार, पैन या किसी अन्य पहचान पत्र की जानकारी देने का कोई दबाव नहीं होगा। बैंक खाता नंबर या ओटीपी जैसी वित्तीय जानकारी भी नहीं मांगी जाएगी। अगर कोई ऐसी जानकारी मांगे तो वह फर्जी हो सकता है। - जनगणना 2027 का डेटा कितना सुरक्षित रहेगा?
जनगणना के डेटा को सरकार ने अति-संवेदनशील सूचना बुनियादी ढांचे की श्रेणी में रखा है। इसे परमाणु ऊर्जा केंद्र और मिलिट्री नेटवर्क जैसी सुरक्षा मिलेगी। एनसीआईआईपीसी (National Critical Information Infrastructure Protection Centre) की निगरानी में यह डेटा रहेगा। डेटा लीक होने पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई होगी।
ये खबर भी पढ़िए...
Census 2027 में लिव-इन जोड़े माने जाएंगे विवाहित, घर बैठे ऑनलाइन फॉर्म भरने की सुविधा
Census 2027: पहले चरण में 33 सवालों के साथ होगी जनगणना, यह भी पूछेंगे- आपके घर रेडियो है?
आईएएस संजीव श्रीवास्तव होंगे मध्य प्रदेश के जनगणना निदेशक, DOPT से आई स्वीकृति
जातिगत कॉलम के साथ पहली बार होगी डिजिटल जनगणना, व्हाट्सएप चैनल CENSUS 2027 हुआ लॉन्च