जनजातीय गौरव दिवस 2026: 1 से 15 नवंबर तक देशभर में चलेगा विशेष अभियान, शुरू होगी 300 से ज्यादा परियोजनाएं

Amresh Kushwaha | Oct 28, 2026, 20:42 IST
1 नवंबर से केंद्र सरकार मनाएगी जनजातीय गौरव पखवाड़ा।
Tribal Pride Day 2026: A special campaign will be held across the country from November 1 to 15, and over 300 projects will be launched.
केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय 1 से 15 नवंबर तक देशभर में जनजातीय गौरव पखवाड़ा मनाएगा। इसका समापन 15 नवंबर को भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर जनजातीय गौरव दिवस के साथ होगा। इस दौरान देशभर में 300 से ज्यादा परियोजनाएं शुरू की जाएंगी। साथ ही दो नई डिजिटल पहल भी शुरू होंगी। केंद्र सरकार ने 27 अक्टूबर को इसकी जानकारी दी है।

इस बार सरकार सिर्फ कार्यक्रम आयोजित नहीं करेगी, बल्कि जनजातीय समाज के लिए चल रही योजनाओं पर भी तेजी से काम करेगी।



इस अभियान का मकसद सरकारी योजनाओं का फायदा दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले जनजातीय परिवारों तक पहुंचाना है। इसके साथ ही विद्यार्थियों और आम लोगों को उनके अधिकारों के बारे में जागरूक किया जाएगा। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान जैसे बड़ी जनजातीय आबादी वाले राज्यों के लिए भी यह अभियान अहम रहेगा।



15 नवंबर का क्या है महत्व?

केंद्र सरकार ने साल 2021 में 15 नवंबर को जनजातीय गौरव दिवस घोषित किया था। तब से हर साल भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर यह दिन मनाया जाता है। इसका मकसद आजादी की लड़ाई में जनजातीय नायकों के योगदान को याद करना और उन्हें सम्मान देना है।



धीरे-धीरे यह कार्यक्रम देशभर में बड़े अभियान का रूप ले चुका है। इससे पीएम जनमन (PM JANMAN) और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान जैसी सरकारी योजनाओं को भी बढ़ावा मिला है।



पिछले पांच साल में रांची, खूंटी, जमुई और डेडियापाड़ा में बड़े कार्यक्रम आयोजित किए गए। वहीं, भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के मौके पर 2024-25 को जनजातीय गौरव वर्ष के रूप में मनाया गया था। सरकार के मुताबिक इन आयोजनों में 3.8 करोड़ से ज्यादा लोगों ने हिस्सा लिया था।



पखवाड़े में क्या-क्या होगा?

राष्ट्रपति से संवाद और साहित्य महोत्सव

12 नवंबर को एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों (EMRS) के करीब 200 छात्र राष्ट्रपति से मुलाकात करेंगे। इस दौरान छात्र राष्ट्रपति से सीधे बातचीत कर सकेंगे। यह कार्यक्रम राष्ट्रपति भवन में होगा।



इसके अलावा 12 और 13 नवंबर को नई दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर में राष्ट्रीय जनजातीय साहित्य महोत्सव आयोजित किया जाएगा। इसमें देशभर के जनजातीय लेखक शामिल होंगे।



महिला सम्मेलन, स्वास्थ्य और पोषण शिविर

14 नवंबर को रानी दुर्गावती आदिवासी महिला सम्मेलन आयोजित होगा। इसमें 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से करीब 500 जनजातीय महिला उद्यमी शामिल होंगी। सम्मेलन का मकसद महिलाओं के कारोबार को बढ़ावा देना और उन्हें अपने सामान बेचने के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध कराना है।



वहीं, 15 अक्टूबर से 15 नवंबर तक स्वास्थ्य और पोषण से जुड़े शिविर लगाए जा रहे हैं। ये शिविर पीएम जनमन योजना के बहुउद्देशीय केंद्रों पर चल रहे हैं। इनमें विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTG) के लोगों को स्वास्थ्य और पोषण से जुड़ी सेवाएं दी जा रही हैं।



इसके अलावा देश के 73 जिलों में छात्रवृत्ति शिविर लगाए जा रहे हैं। यहां विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति के लिए आधार लिंक कराने में मदद मिल रही है।



हैदराबाद में 1 और 2 नवंबर को पारंपरिक चिकित्सकों का सम्मेलन भी होगा। इसमें देशभर से करीब 1,500 पारंपरिक चिकित्सक शामिल होंगे।



300 परियोजनाएं और दो डिजिटल पहल

जनजातीय समुदायों के विकास के लिए देशभर में 300 से ज्यादा परियोजनाएं शुरू की जाएंगी। इनमें 228 परियोजनाओं का उद्घाटन होगा, जबकि 74 नई परियोजनाओं की नींव रखी जाएगी।



इनमें अरुणाचल प्रदेश के ईटानगर में जनजातीय अनुसंधान संस्थान की नई इमारत भी शामिल है। वहीं, मिजोरम के केल्सिह में रोपुलियानी जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय भी शुरू होगा।



इसके साथ ही सरकार दो नए डिजिटल प्लेटफॉर्म भी लॉन्च करेगी। पहला जन-एचआईटी पोर्टल है। इस पर जनजातीय समुदायों के स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी एक जगह मिलेगी। यह देश में अपनी तरह का पहला प्लेटफॉर्म होगा, जिसमें 20 राज्यों का स्वास्थ्य डेटा शामिल रहेगा।



दूसरा राष्ट्रीय वन अधिकार डिजिटल प्लेटफॉर्म है। यह वन अधिकार अधिनियम 2006 से जुड़ा है। इसके जरिए वन अधिकारों के लिए आवेदन से लेकर अधिकार-पत्र जारी करने तक का काम डिजिटल तरीके से होगा। ग्राम सभा में आवेदन करने से लेकर डिजिटल हस्ताक्षर वाला अधिकार-पत्र मिलने तक की पूरी प्रक्रिया एक ही प्लेटफॉर्म पर होगी।



राज्यों में कौन से आयोजन होंगे?

जनजातीय गौरव पखवाड़े के दौरान देश के अलग-अलग राज्यों में भी कार्यक्रम होंगे। राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अपने जनजातीय अनुसंधान संस्थानों के जरिए इनका आयोजन करेंगे। 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 160 से ज्यादा कार्यक्रम रखे गए हैं। इनमें एक लाख से ज्यादा लोगों के शामिल होने की उम्मीद है।



आंध्र प्रदेश में राज्य स्तर पर जनजातीय कार्निवल आयोजित होगा। गोवा में आदिवासी कला और खेलों से जुड़े कार्यक्रम होंगे। ओडिशा में भगवान बिरसा मुंडा के नाम पर पैवेलियन बनाया जाएगा।



वहीं, मेघालय के शिलांग में जनजातीय संगीत महोत्सव होगा। गुजरात के अहमदाबाद हाट में जनजातीय कला और हस्तशिल्प का मेला लगेगा। यहां लोग जनजातीय कलाकारों की कला और उनके बनाए सामान को देख सकेंगे।



MP-CG और राजस्थान में कितने आदिवासी?

भारत की कुल जनजातीय आबादी में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान की बड़ी हिस्सेदारी है। साल 2011 की जनगणना के मुताबिक इन तीनों राज्यों में करीब 3.23 करोड़ जनजातीय लोग रहते हैं।



मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा जनजातीय आबादी

मध्य प्रदेश में 1 करोड़ 53 लाख से ज्यादा जनजातीय लोग रहते हैं। यह राज्य की कुल आबादी का 21.1 फीसदी है। देश की कुल जनजातीय आबादी में मध्य प्रदेश की हिस्सेदारी 13.57 फीसदी बताई गई है। जनजातीय लोगों की संख्या के मामले में मध्य प्रदेश देश में पहले स्थान पर है। यहां भील, गोंड, कोल, बैगा, सहरिया और कोरकू प्रमुख जनजातियां हैं।



छत्तीसगढ़ में 78 लाख से ज्यादा आदिवासी

छत्तीसगढ़ में करीब 78.22 लाख जनजातीय लोग रहते हैं। यह राज्य की कुल आबादी का 30.60 फीसदी है। यानी प्रदेश में हर 100 लोगों में करीब 31 लोग जनजातीय समुदाय से आते हैं। यहां गोंड, हलबा, कवार, उरांव, बैगा और अबुझमाड़िया प्रमुख जनजातियां हैं।



राजस्थान में 92 लाख से ज्यादा जनजातीय लोग

राजस्थान में करीब 92.38 लाख जनजातीय लोग रहते हैं। यह राज्य की कुल आबादी का 13.47 फीसदी है। जनजातीय आबादी के मामले में राजस्थान देश में छठे स्थान पर है। यहां मीणा, भील, गरासिया और डामोर प्रमुख जनजातियां हैं।

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