टूटी झोपड़ी और हाथ में संविधान... मिलिए जंतर- मंतर पर वायरल हुए मोहम्मद इरफान से
समझें क्या है पूरा मामला...
- दिल्ली की एक झुग्गी बस्ती में रहने वाले मोहम्मद इरफान अचानक चर्चा में आ गए हैं।
- वे सड़क किनारे बर्फ बेचकर गुजारा करते हैं।
- न वे कभी स्कूल गए, न पढ़ना-लिखना सीखा।
- जंतर मंतर पर उनका एक वीडियो वायरल हो रहा है।
- वायरल में वे संविधान की प्रस्तावना बड़े आत्मविश्वास से सुनाते नजर आ रहे हैं।
आइए खबर पढ़ने से पहले उस वीडियो को देखते हैं जिस कारण से इरफान इन दिनों चर्चा में है...
बता दें कि मोहम्मद इरफान 35 साल के हैं। वे अविवाहित हैं। दिल्ली की एक झुग्गी बस्ती में अपने माता-पिता और दो बहनों के साथ रहते हैं। उनका घर एक कमरे का है और उस पर छत तक नहीं है। सिर्फ एक तिरपाल की चादर उन्हें मौसम से बचाती है। यह घर करीब 12 वर्ग गज (एमपी की भाषा में 9 बाई 12 का घर) में फैला है।
इरफान ने कभी स्कूल का मुंह नहीं देखा। बचपन में आंगनवाड़ी से उन्हें थोड़ी बहुत शिक्षा मिली थी। इसके बावजूद वे बड़ी स्पष्टता से बोलते हैं।
इरफान की बातों में हास्य भी झलकता है और हिंदी-उर्दू कविता के अंश भी। वे खुद को मजदूर बताते हुए मुस्कुराकर कहते हैं कि वे बहुत बोलते हैं।
जंतर मंतर पर हुई बातचीत
दरअसल जंतर मंतर पर एक पत्रकार से इरफान की बातचीत सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गई। लोग इरफान के परिवार की मदद के लिए आगे आ रहे हैं। इंटरनेट यूजर्स उनकी बोलने की कला और स्पष्टता से बेहद प्रभावित हुए हैं।
जब इरफान से पूछा गया कि उन्हें संविधान की प्रस्तावना इतनी आसानी से कैसे याद है, तो उनका जवाब सबको चौंका गया। उन्होंने बताया कि वे गूगल एआई से सवाल पूछते हैं। अगर जवाब से संतुष्ट नहीं होते, तो फिर से एआई से पूछते हैं कि क्या जवाब सही है।
विरोध प्रदर्शनों से मिली सीख
इरफान ने बताया कि उन्होंने लोगों की बातें सुनकर बहुत कुछ सीखा है। वे लोकपाल आंदोलन से लेकर शाहीन बाग तक कई प्रदर्शनों में शामिल रहे।
किसानों के धरने से लेकर महिला पहलवानों के धरने तक, हर जगह इरफान की मौजूदगी रही। उन्होंने राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा में भी हिस्सा लिया था। यह यात्रा दिल्ली से कश्मीर तक चली थी।
मजदूरों के शोषण पर बेबाक राय
इरफान भावहीन आवाज में मजदूरों के शोषण की बात करते हैं। उनका कहना है कि मजदूरों को हल्के में लिया जाता है। वजह यह है कि वे एक दिन की मजदूरी खोने का जोखिम नहीं उठा सकते। बेरोजगारों की बड़ी फौज तैयार बैठी है, इसलिए नियोक्ता न्यूनतम मजदूरी से भी कम भुगतान करते हैं।
इरफान कहते हैं कि अगर कोई मजदूर विरोध करता है, तो उसे नौकरी से निकाल दिया जाता है। नियोक्ता जानते हैं कि उसकी जगह दूसरा मजदूर आसानी से मिल जाएगा। इरफान थोड़ी ऊंची आवाज में कहते हैं कि सिर्फ पेट भरना ही जिंदगी नहीं है।
संविधान को जीने की कोशिश
इरफान अब जंतर मंतर नई दिल्ली के वायरल वीडियो से पूरे देश में पहचाने जा रहे हैं। वीडियो में वे जिस आत्मविश्वास और लय के साथ संविधान की प्रस्तावना सुनाते हैं, वह हर सुनने वाले को ठहरने पर मजबूर कर देता है।
एक टूटे-फूटे घर में रहने वाला यह युवक लोकतांत्रिक मूल्यों को सिर्फ पढ़ता नहीं, बल्कि जीने की कोशिश करता है।
सीमित संसाधनों के बावजूद इरफान ने अपने सपनों का साथ नहीं छोड़ा। उन्हें अभी सिर्फ सही अवसर और उचित मार्गदर्शन की जरूरत है। उनके भीतर सीखने की भूख और बोलने की काबिलियत साफ झलकती है।
देश की असली ताकत ऐसे ही युवाओं में छिपी होती है। जरूरत सिर्फ उन्हें पहचानने और उन पर भरोसा करने की है।
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