Japan Bans Indian Mango: जापान ने भारतीय आमों पर लगाई रोक, जानें पूरी वजह
समझें क्या है पूरा मामला
- जापान ने इस साल भारतीय आमों के आयात पर पूरी तरह रोक लगा दी है।
- यह फैसला आमों की प्रोसेसिंग जांच में कमियां मिलने के बाद लिया गया।
- जापानी निरीक्षकों को वेपर हीट ट्रीटमेंट की प्रक्रिया में गड़बड़ी मिली थी।
- जापान अपने यहाँ फसलों को खतरनाक फ्रूट फ्लाई कीड़ों से बचाना चाहता है।
- इस प्रतिबंध से भारतीय आम निर्यात की विश्वसनीयता पर असर पड़ सकता है।
जापान के कड़े नियमों के कारण भारतीय आमों पर बैन
दुनिया में आम का सबसे बड़ा उत्पादक देश हमारा भारत ही है। यहाँ के आमों के स्वाद के दीवाने दुनिया भर में मौजूद हैं। लेकिन इस साल जापान के लोग भारतीय आम का स्वाद नहीं चख पाएंगे।
जापान ने इस साल भारत से आने वाले आमों पर रोक लगा दी है। जापानी अधिकारियों ने इसके पीछे पेस्ट कंट्रोल की कमियों को मुख्य वजह बताया है। इस फैसले के बाद से भारत के आम निर्यातक काफी परेशान हैं।
वेपर हीट ट्रीटमेंट की जांच में अटका पूरा मामला
यह पूरा विवाद आमों की सफाई और सुरक्षा जांच से जुड़ा हुआ है। हर साल आम के सीजन में जापान से एक विशेष टीम भारत आती है। यह टीम दिल्ली और अन्य केंद्रों पर आमों की बारीकी से जांच करती है।
इस जांच प्रक्रिया को वेपर हीट ट्रीटमेंट कहा जाता है। इसमें फलों को कुछ समय के लिए गर्म हवा वाले चैंबर में रखा जाता है। इससे फल के अंदर मौजूद कीड़े और उनके अंडे पूरी तरह नष्ट हो जाते हैं।
योकोहामा प्रोटेक्शन एसोसिएशन ने जारी किया नोटिस
इस साल निरीक्षण के दौरान जापानी टीम को इस प्रोसेसिंग में कमियां मिलीं। इसके बाद जापान की योकोहामा प्लांट प्रोटेक्शन एसोसिएशन ने एक कड़ा नोटिफिकेशन जारी किया। उन्होंने भारतीय आमों की खेप को स्वीकार करने से साफ मना कर दिया।
एसोसिएशन ने कहा कि यह रोक तब तक जारी रहेगी जब तक सुधार नहीं होता। जापानी अधिकारी जब तक पूरी तरह संतुष्ट नहीं होंगे, तब तक बैन नहीं हटेगा। यह संकट आम के पीक सीजन के दौरान सामने आया है।
1970 के दशक का वो कड़वा तजुर्बा
जापान फल और सब्जियों की क्वालिटी को लेकर बहुत ज्यादा सख्त देश है। इस सख्ती के पीछे उसका एक बहुत ही पुराना और कड़वा तजुर्बा छिपा है। साल 1970 के दशक में जापान में खतरनाक फ्रूट फ्लाई कीड़े फैल गए थे।
उस समय वहां आम और पपीते की फसलों को भारी नुकसान हुआ था। इस समस्या को खत्म करने में जापान को कई साल और करोड़ों रुपये लगे थे। इसी कारण आज वहां कीड़ों को लेकर जीरो टॉलरेंस की नीति है।
भारतीय आम बाजार पर कितना होगा असर?
सेंट्रल इंस्टीट्यूट फॉर सबट्रॉपिकल हॉर्टिकल्चर के पूर्व रिसर्च डायरेक्टर शैलेंद्र राजन ने बात की। उन्होंने बताया कि जापान अपने नियमों को लेकर कभी कोई समझौता नहीं करता है। हालांकि, भारत सबसे ज्यादा आम खाड़ी देशों को निर्यात करता है।
खाड़ी देशों में नियम जापान जितने सख्त नहीं माने जाते हैं। इसलिए इस बैन से कुल निर्यात की मात्रा पर बहुत बड़ा असर नहीं पड़ेगा। भारत इस व्यवस्था को सुधारने के लिए लगातार जरूरी कदम उठा रहा है।
प्रीमियम अल्फोंसो आम के बाजार को लगा झटका
भारत दुनिया के कुल आम उत्पादन का लगभग 45 प्रतिशत पैदा करता है। कृषि निर्यात (Mango Production) एजेंसी एपीडा के अनुसार भारत ने करीब तीस हजार टन आम एक्सपोर्ट किए। सबसे ज्यादा आम यूएई, अमेरिका और ब्रिटेन भेजे जाते हैं।
जापान मुख्य रूप से अल्फोंसो, केसर और बंगनापल्ली जैसी किस्में खरीदता था। जापानी बाजार में अल्फोंसो को एक लग्ज़री फल की तरह देखा जाता था। अब इस लग्ज़री सप्लाई पर अनिश्चितकाल के लिए पूरी तरह रोक लग गई है।
भारत के क्वालिटी सिस्टम पर सवाल
मैंगो ग्रोवर एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष एस इन्सराम अली ने भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यहाँ मामला आम की मात्रा का नहीं बल्कि गुणवत्ता का है। जापान जैसे देश द्वारा बैन लगाने से साख प्रभावित होती है।
इसका एक सिग्नल इफेक्ट दूसरे देशों पर भी पड़ने का डर रहता है। दूसरे देश भी भारतीय आमों की क्वालिटी पर सवाल उठा सकते हैं। फिलहाल इस समस्या को सुलझाने के लिए दोनों देशों में बातचीत जारी है।
मौसम की मार से पहले ही परेशान हैं आम उत्पादक
यह मुश्किल ऐसे समय आई है जब भारत में फसल पहले ही कमजोर है। सर्दियों में ज्यादा ठंड और फिर अचानक बढ़ी गर्मी से नुकसान हुआ है। उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों में आंधी से फसल खराब हुई है।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस साल आम का सीजन जल्दी खत्म हो जाएगा। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार से आई इस बुरी खबर ने किसानों को निराश किया है। अब उम्मीद सरकार की तरफ से होने वाले सुधारों पर टिकी है।
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