ऑफिस से बिस्किट घर ले गया चपरासी! अधिकारियों ने भ्रष्टाचारी कहकर नौकरी से निकाला

Aman Vaishnav | Jun 29, 2026, 15:00 IST
ऑफिस से बिस्कुट घर ले गया चपरासी
अधिकारियों की मीटिंग के बाद बची चाय पत्ती और बिस्कुट घर ले जाने पर एक संविदा चपरासी को नौकरी से निकाल दिया गया था। झारखंड हाईकोर्ट ने इसे संवेदनहीनता से भरा अन्याय बताया है।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • चाय पत्ती और बिस्कुट घर ले जाने पर एक चपरासी को नौकरी से निकाल दिया गया था।
  • अधिकारियों ने चपरासी के इस कदम को भ्रष्टाचार माना था।
  • चपरासी ने न्याय के लिए झारखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
  • हाईकोर्ट ने इस कार्रवाई को पूरी तरह से गलत बताया है।
  • अदालत ने चपरासी को 1 जुलाई तक वापस नौकरी पर रखने का आदेश दिया है।

अधिकारियों की ठसक और कर्मचारी की कहानी

यह पूरा मामला सरकारी अधिकारियों की धौंस और एक कर्मचारी की बेबसी को दिखाता है। एक संविदा चपरासी को सिर्फ इसलिए नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया, क्योंकि उसने मीटिंग खत्म होने के बाद बची हुई चाय पत्ती और बिस्कुट को अपने घर ले जाने की हिम्मत की थी।



विभागीय अधिकारी ने इस बात को बहुत बड़ा मुद्दा बना दिया। उन्होंने इसे भ्रष्टाचार का एक गंभीर अपराध माना। साथ ही चपरासी को सीधे नौकरी से बाहर का रास्ता दिखा दिया।



वहीं जब चपरासी को अपने ही विभाग से कोई न्याय नहीं मिला, तो उसने झारखंड हाईकोर्ट की चौखट पर गुहार लगाई।



कोर्ट की सुनवाई में सामने आईं कानूनी कमियां

जब इस मामले की सुनवाई झारखंड हाईकोर्ट में हुई, तो अदालत ने पूरी कानूनी प्रक्रिया में कई गंभीर कमियां पाईं।



कोर्ट ने साफ कहा कि कर्मचारी को जो नोटिस दिया गया था, वह बिल्कुल भी स्पष्ट नहीं था। कानून की नजर में ऐसे धुंधले या अस्पष्ट नोटिस की कोई कीमत नहीं होती।





चपरासी को यह तक नहीं बताया गया था कि उस पर असल में कौन सी और कितनी सामग्री ले जाने का आरोप है। इसके बिना वह अपना पक्ष कैसे रखता? कोर्ट ने इसे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का सीधा उल्लंघन माना।



कोर्ट ने कहा कि इतने किसी कर्मचारी की 17 साल की वफादार सेवा को खत्म कर देना अनुपातिकता के सिद्धांत के खिलाफ है।



झारखंड हाईकोर्ट ने कहा कि यह कार्रवाई दया से संतुलित न्याय नहीं है, बल्कि संवेदनहीनता से भरा एक अन्याय है।



नौकरी पर वापस रखने का आदेश

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को कड़ा निर्देश दिया है कि रणजीत कुमार हिमांशु को 1 जुलाई 2026 तक काम पर वापस लिया जाए। इसके साथ ही कोर्ट ने उसे उसकी आधी बकाया सैलरी यानी 50 प्रतिशत बैक वेजेस देने को भी कहा है।



इस आदेश को समय पर पूरा करने की पूरी जिम्मेदारी बोकारो के उपायुक्त (DC) और उप विकास आयुक्त (DDC) को दी गई है। इन दोनों बड़े अधिकारियों को कोर्ट में इस बात की अनुपालन रिपोर्ट भी जमा करनी होगी कि आदेश का पालन हुआ या नहीं।



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