झारखंड में परीक्षा विवाद: JPSC और JSSC भर्तियों के खिलाफ सड़कों पर उतरे छात्र
समझें क्या है पूरा मामला
- झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं को लेकर विवाद गहरा गया है।
- रांची में सैकड़ों अभ्यर्थी नौ दिन से धरने पर बैठे हैं।
- भारी बारिश में भी छात्रों ने प्रदर्शन जारी रखा है।
- अभ्यर्थी सीबीआई CBI जांच की मांग की है।
- छात्रों का आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया में बरसों से गड़बड़ी हो रही है।
विवाद की शुरुआत कैसे हुई
झारखंड छात्र प्रदर्शन14वीं JPSC संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा से जुड़ा है। आयोग ने 103 पदों के लिए विज्ञापन निकाला था। जुलाई की शुरुआत में प्रारंभिक परिणाम आने के बाद 2 हजार 204 अभ्यर्थी मुख्य परीक्षा के लिए चुने गए।
नतीजों के तुरंत बाद अभ्यर्थियों ने गड़बड़ी के आरोप लगाने शुरू कर दिए। सबसे बड़ी शिकायत यह रही कि श्रेणीवार कट-ऑफ अंक जारी नहीं किए गए। छात्रों का यह भी कहना था कि मेरिट लिस्ट पर आयोग सदस्यों के हस्ताक्षर नहीं थे।
OMR शीट ने बढ़ाया विवाद
इस बीच एक OMR (Optical Mark Recognition) शीट सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। दावा किया गया कि यह शीट एक सफल अभ्यर्थी की है। आरोप था कि उस अभ्यर्थी ने केवल 48 सवाल हल किए। जबकि क्वालिफाइंग स्कोर 144 अंक बताया गया था। इसके बावजूद उस अभ्यर्थी को मुख्य परीक्षा के लिए चुन लिया गया।
हालांकि इस OMR शीट की सत्यता अभी तक स्वतंत्र रूप से जांची नहीं गई है। फिर भी इस घटना ने जांच की मांग को और मजबूत कर दिया।
सरकार की पहली कार्रवाई
आरोपों के बाद झारखंड सरकार ने CID (Criminal Investigation Department) को जांच का जिम्मा सौंपा। CID ने मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल यानी SIT (Special Investigation Team) बनाई।
लेकिन छात्र नेताओं का कहना है कि यह आंदोलन सिर्फ एक परीक्षा तक सीमित नहीं है। उनके मुताबिक JPSC, JSSC और अन्य भर्ती एजेंसियों में सालों से देरी और पारदर्शिता की कमी रही है।
छात्रों की क्या हैं मांगें
प्रदर्शनकारियों की सबसे बड़ी मांग CBI जांच है। इसके अलावा वे यह भी चाहते हैं:
- 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा रद्द हो और नई परीक्षा कराई जाए
- भर्ती प्रक्रिया में समय पर परीक्षा और नियुक्ति सुनिश्चित हो
- भर्ती एजेंसियों में ढांचागत सुधार किए जाएं
अब तक क्या-क्या हुआ
जांच के दौरान CID ने कई लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें JPSC की डिप्टी परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता भी शामिल हैं। साथ ही JPSC अध्यक्ष एल खिआंग्ते ने 22 जुलाई को इस्तीफा दे दिया।
आयोग ने 14वीं JPSC सिविल सेवा मुख्य परीक्षा और कई अन्य भर्ती परीक्षाओं को स्थगित कर दिया है। नई तारीखों की घोषणा बाद में की जाएगी।
इन कदमों के बावजूद छात्रों का धरना जारी है। उनका कहना है कि अब तक की कार्रवाई उनकी मुख्य मांग पूरी नहीं करती। प्रदर्शनकारियों के मुताबिक निष्पक्ष जांच के लिए एक स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी ही सही विकल्प है।
CJP ने बढ़ाया समर्थन
इस आंदोलन को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP – Cockroach Janta Party) का भी समर्थन मिला है। पार्टी नेता अभिजीत दीपके और आशुतोष रंका ने फोन पर प्रदर्शनकारियों से बात की। दोनों नेताओं ने आंदोलन के प्रति एकजुटता जताई।
गौरतलब है कि CJP ने पिछले महीने दिल्ली के जंतर मंतर पर भी छात्र आंदोलन का नेतृत्व किया था। वह आंदोलन NEET-UG 2026 पेपर लीक को लेकर था। इसके बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा था। केंद्र सरकार ने बाद में परीक्षा सुधार के कई ऐलान भी किए थे।
एक्सपर्ट कोट्स
एक प्रदर्शनकारी ने मीडिया एजेंसी से बातचीत में कहा, "अगर सरकार अब भी नहीं जागी, तो हम अपने और आने वाली पीढ़ियों के अधिकारों के लिए लड़ेंगे। पिछले 26 साल से लोग इस व्यवस्था में ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।"
एक अन्य प्रदर्शनकारी ने कहा कि रांची में जो प्रदर्शन दिख रहा है, वह जल्द ही झारखंड के सभी 24 जिलों में फैल सकता है। (स्रोत: ANI, 2 अगस्त 2026)
छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने बताया कि यह आंदोलन ठीक एक महीने पहले शुरू हुआ था।
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