17 साल में 36 को फांसी की सजा देने वाले कौन हैं जज रवि कुमार दिवाकर, ज्ञानवापी मामले से आए थे सुर्खियों में
समझें क्या है पूरा मामला
- जज रवि कुमार दिवाकर ने नदीम को फांसी की सजा सुनाई।
- नदीम शहजादी हत्याकांड जुलाई 2018 का है।
- कोर्ट ने इसे रेयरेस्ट ऑफ रेयर मामला माना।
- जज ने फैसले में माफिया के दबाव का जिक्र किया।
- वे 17 साल में 36 दोषियों को मृत्युदंड दे चुके हैं।
कौन हैं जज रवि कुमार दिवाकर?
रवि कुमार दिवाकर मुजफ्फरनगर में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश हैं। उन्होंने 29 नवंबर 2025 को मुजफ्फरनगर में कार्यभार संभाला। न्यायिक सेवा में उन्हें 17 साल हो चुके हैं।
अलग-अलग गंभीर मामलों में उन्होंने 36 दोषियों को मौत की सजा दी है। यही आंकड़ा उन्हें सुर्खियों में लाया।
पांच महीने में 23 को फांसी की सजा
पिछले पांच महीने में जज दिवाकर ने 23 दोषियों को फांसी सुनाई। ये फैसले 10 चर्चित मामलों में आए। ताजा फैसला नदीम के मामले में आया।
इसी बीच उनकी अदालत से करीब 100 मुकदमे वापस लिए गए। जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने यह कदम उठाया। इन्हें दूसरी अदालतों में भेजा गया।
नदीम शहजादी हत्याकांड में क्या हुआ?
यह दहेज हत्या मामला शाहपुर कस्बे का है। जुलाई 2018 में 23 साल की शहजादी को जिंदा जलाया गया। कोर्ट ने नदीम को केरोसिन डालकर आग लगाने का दोषी माना। कोर्ट ने वारदात को बेहद क्रूर और बर्बर बताया। इसे रेयरेस्ट ऑफ रेयर मामला माना, यानी ऐसा दुर्लभ अपराध जिसमें मृत्युदंड उचित है।
दहेज हत्या मामले में फैसला आठ साल बाद आया। सुनवाई में शहजादी के माता-पिता समेत कई गवाह पलट गए। उन्होंने दहेज मांगने और क्रूरता के आरोपों से इनकार किया। कोर्ट ने मृत्यु पूर्व बयान (मरने से पहले दिया गया बयान) पर भरोसा किया। यह बयान मजिस्ट्रेट के सामने दिया गया था। जज ने माना कि इससे नदीम की भूमिका साबित होती है।
जज ने लिखा कि जिंदा जलाने वाला सहानुभूति का हकदार नहीं। नदीम पर एक लाख रुपए का जुर्माना भी लगा।
ज्ञानवापी वाले जज और धमकियां
अब जरा पीछे चलते हैं।
वे वही Gyanvapi judge हैं, जिनका नाम 2022 में सुर्खियों में आया था। उन्होंने वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद परिसर के सर्वे की अनुमति दी थी।
उनके मुताबिक इसके बाद उन्हें और परिवार को मौत की धमकियां मिलीं। उनका आरोप है कि स्थानीय प्रशासन ने पर्याप्त सुरक्षा नहीं दी। उनके मुताबिक सुरक्षा घेरा भी घटा दिया गया।
चित्रकूट और बरेली के चर्चित मामले
फैसले में उन्होंने अपने पुराने चर्चित मामलों का जिक्र किया। इनमें चित्रकूट में अब्बास अंसारी की सुनवाई शामिल है। बरेली में मौलाना तौकीर रजा से जुड़ी कार्यवाही का भी जिक्र है।
माफिया पर जज ने फैसले में क्या लिखा?
जज ने लिखा कि हाल के कुछ घटनाक्रम से वे आहत और दुखी हैं। उनके मुताबिक पश्चिमी यूपी में माफिया न्याय व्यवस्था को प्रभावित करते हैं। दबाव में आपराधिक मामले टाले या वापस लिए जाते हैं, ऐसा उनका दावा है।
मरना पसंद, डरपोक कहलाना नहीं
जज ने बताया कि वे मुकदमे हटाने की वजह जानते हैं। लेकिन पद की गरिमा के कारण वे अभी उसे उजागर नहीं करेंगे।
उनके मुताबिक मुकदमे हटने के बाद एक गैंगस्टर ने संदेश भिजवाया। संदेश में कहा गया कि पीछे पड़े तो जिले से बाहर तबादला करा देंगे। दबाव में काम करने से जनता का भरोसा कमजोर होगा, यह जज का तर्क है।
जजों पर हमलों के पुराने उदाहरण
जज दिवाकर ने फैसले में जजों पर हुए पुराने हमले गिनाए। 1982 में इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज चंद्रशेखर प्रसाद सिंह की हत्या हुई। इस हमले में उनका किशोर बेटा भी मारा गया।
2001 में लखीमपुर खीरी के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट बालक राम की हत्या हुई। 2021 में धनबाद के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश उत्तम आनंद की हत्या हुई। जज के मुताबिक ये घटनाएं जजों पर मंडराते खतरे को दिखाती हैं।
FAQ
- कौन हैं जज रवि कुमार दिवाकर?
वे मुजफ्फरनगर में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश हैं। उन्होंने 29 नवंबर 2025 को कार्यभार संभाला। 17 साल की सेवा में वे 36 दोषियों को मृत्युदंड सुना चुके हैं। - जज रवि कुमार दिवाकर अब चर्चा में क्यों हैं?
उन्होंने नदीम को 23वीं फांसी की सजा सुनाई। फैसले में उन्होंने माफिया के दबाव का दावा भी किया। वे ज्ञानवापी सर्वे की अनुमति देने के लिए भी जाने जाते हैं। - नदीम शहजादी हत्याकांड में कोर्ट ने क्या माना?
कोर्ट ने इसे रेयरेस्ट ऑफ रेयर मामला माना। मृत्यु पूर्व बयान को आधार बनाया गया। नदीम पर एक लाख रुपए का जुर्माना भी लगा।