146 सालों का रिकॉर्ड टूटा: सबसे सूखा जून रहा यह महीना, पांच कारणों ने बिगाड़ा खेल
समझें क्या है पूरा मामला
- जून 2026 भारत के पिछले 146 वर्षों के सबसे सूखे जून महीनों में शामिल रहा।
- मानसून 4 जून को केरल पहुंचा, लेकिन 15 जून के बाद इसकी रफ्तार थम गई।
- देश में करीब 40 प्रतिशत और मध्य भारत में 60 प्रतिशत से अधिक बारिश की कमी रही।
- 23 जून के बाद कुछ राहत मिली, फिर भी कुल बारिश सामान्य की लगभग 90 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
- पांच अलग-अलग मौसमी सिस्टम एक साथ सक्रिय रहे, जिससे बारिश कमजोर पड़ी।
मानसून आया, फिर रुक गया
मानसून इस बार केरल में सही समय पर पहुंचा था। 4 जून को इसकी दस्तक हुई और दक्षिण, पूर्व और पूर्वोत्तर भारत के बड़े हिस्सों में भी यह फैल गया। लेकिन 15 जून के बाद यह रफ्तार अचानक थम गई।
करीब दो हफ्ते तक देश के बड़े हिस्से में आसमान साफ रहा। न बादल, न बारिश। इस दौरान देश में 40 प्रतिशत से ज्यादा बारिश की कमी दर्ज हुई। मध्य भारत में यह कमी 60 प्रतिशत से भी ऊपर चली गई।
मौसम विभाग के मुताबिक मानसून के रुकने की वजह कोई एक कारण नहीं था। इस बार पांच अलग-अलग मौसमी सिस्टम एक साथ बारिश के रास्ते में आ गए।
पहला कारण: कमजोर एमजेओ
एमजेओ यानी मैडेन जूलियन ऑसिलेशन (MJO – Madden Julian Oscillation) बादलों और तूफान की एक बड़ी लहर होती है। यह हर 30 से 60 दिन में पूरी दुनिया का चक्कर लगाती है।
जब यह हिंद महासागर के ऊपर से गुजरती है तो भारत में बारिश तेज हो जाती है। लेकिन इस बार जून में यह लहर आगे बढ़ गई। इसके साथ ही बारिश की रफ्तार भी चली गई।
दूसरा कारण: सोमाली जेट की कमजोरी
सोमाली जेट एक तेज हवा होती है जो अफ्रीका से अरब सागर के रास्ते भारत तक नमी लेकर आती है। यह हवा मानसून की ताकत के लिए बहुत जरूरी होती है।
इस बार यह हवा बेहद कमजोर रही। नमी कम आई तो बारिश भी कम हुई। यह मानसून की सुस्ती का दूसरा बड़ा कारण बना।
तीसरा कारण: रेगिस्तान से आई गर्म हवा
उत्तर-पश्चिम भारत और पश्चिम एशिया के रेगिस्तान से गर्म और सूखी हवा मध्य भारत की तरफ आई। इस हवा ने ऊपर एक तरह का ढक्कन बना दिया।
इस ढक्कन की वजह से बादल बन तो रहे थे लेकिन बारिश में नहीं बदल पा रहे थे। यह तीसरा बड़ा कारण रहा जिसने बारिश को रोका।
चौथा कारण: आईओडी का न्यूट्रल रहना
आईओडी यानी इंडियन ओशन डाइपोल (IOD – Indian Ocean Dipole) हिंद महासागर के दो हिस्सों के तापमान का अंतर होता है। जब यह सकारात्मक होता है तो मानसून को ताकत मिलती है।
इस बार यह न्यूट्रल यानी सामान्य बना रहा। इससे मानसून को वह जरूरी मदद नहीं मिली जो आमतौर पर मिलती है।
पांचवां कारण: बंगाल की खाड़ी में सिस्टम नहीं बना
बंगाल की खाड़ी में कम दबाव के सिस्टम बनते हैं तो बारिश देश के भीतरी हिस्सों तक खिंची चली आती है। यही सिस्टम मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में बारिश लाते हैं।
इस बार जून में ऐसा कोई सिस्टम नहीं बना। इसीलिए देश के भीतरी हिस्से बारिश से महरूम रहे। यह पांचवां और बेहद अहम कारण था।
अल नीनो का असर आगे दिखेगा
अल नीनो (El Nino) को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। अमेरिकी मौसम एजेंसी एनओएए (NOAA – National Oceanic and Atmospheric Administration) ने जून के दूसरे हफ्ते में अल नीनो की घोषणा की।
हालांकि भारतीय मौसम विभाग का कहना है कि जून की कमी में अल नीनो का बड़ा हाथ नहीं था। लेकिन जुलाई, अगस्त और सितंबर में इसका असर साफ दिख सकता है।
23 जून के बाद मिली राहत
23 जून के बाद बारिश में सुधार दिखा है। मुंबई और मध्य भारत के कुछ हिस्सों में बारिश लौटी है।लेकिन वैज्ञानिकों की चिंता कम नहीं हुई है।
उनका अनुमान है कि इस साल कुल बारिश सामान्य की तुलना में केवल 90 प्रतिशत ही रह सकती है। इसके अलावा एक और खतरा है।
गर्म होती हवा ज्यादा पानी अपने अंदर रोक लेती है। इसका नतीजा यह हो सकता है कि लंबे सूखे के बाद अचानक बहुत तेज बारिश हो जाए।
FAQ
- जून 2026 में भारत में इतनी कम बारिश क्यों हुई?
पांच मौसमी कारणों ने एक साथ मिलकर मानसून को कमजोर किया। इनमें कमजोर एमजेओ, सोमाली जेट की सुस्ती, रेगिस्तानी गर्म हवा, आईओडी का न्यूट्रल रहना और बंगाल की खाड़ी में सिस्टम न बनना शामिल हैं। इन सभी कारणों के एक साथ होने से जून 2026 रिकॉर्ड सूखा रहा। - क्या अल नीनो मानसून को और कमजोर करेगा?
मौसम विभाग के मुताबिक जून में अल नीनो का असर कम था। लेकिन जुलाई, अगस्त और सितंबर में इसका असर देखा जा सकता है। इस साल कुल बारिश सामान्य की तुलना में करीब 90 प्रतिशत रहने का अनुमान है। - मध्य भारत में बारिश की कमी इतनी ज्यादा क्यों रही?
बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का सिस्टम न बनने से मध्य भारत में बारिश नहीं पहुंच पाई। ऊपर से रेगिस्तानी हवा ने ढक्कन जैसा असर डाला। इससे मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में 60 प्रतिशत से ज्यादा की कमी रही।
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