स्कूल के 50 मीटर के दायरे में जंक फूड बेचने पर रोक, पर कौन-सा फूड अनहेल्दी है यह तय नहीं
समझें क्या है पूरा मामला...
- स्कूल के 50 मीटर दायरे में जंक फूड बेचना 2020 से बैन है।
- वहीं, 6 साल बाद भी साफ नहीं कौन से उत्पाद बैन होंगे।
- FSSAI ने हाल ही में नए पोषण मानक जारी किए हैं।
- नमक, चीनी और वसा की मात्रा से तय होगा पाबंदी का दायरा।
- अभी जंक फूड की सूची और हेल्दी मेन्यू तय नहीं हुआ है।
स्कूलों के आसपास बिकने वाले जंक फूड को लेकर एक बड़ा नियम पिछले छह साल से अधूरा है। ज्यादा नमक, चीनी और वसा वाले खाद्य पदार्थों की बिक्री पर 2020 से रोक लगी है। वहीं, आज तक साफ नहीं हो पाया कि कौन से उत्पाद इस पाबंदी की जद में आते हैं।
6 साल पुराना नियम अधूरा
स्कूल के 50 मीटर के दायरे में ऐसे खाद्य पदार्थों की बिक्री पर रोक है। इनमें ज्यादा नमक, चीनी या वसा वाले उत्पाद शामिल हैं। वहीं, इनकी पहचान के लिए कोई तय सूची अब तक नहीं बनी। इसी वजह से नियम कागजों तक सिमटा रहा। स्कूल और दुकानदार दोनों उलझन में रहे।
FSSAI का नया मानक
भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने हाल में इस उलझन को सुलझाने की कोशिश की है। प्राधिकरण ने पिछले दिनों नए पोषण मानक जारी किए हैं। इन मानकों के आधार पर अब तय होगा कि कौन सा उत्पाद पाबंदी में आता है। हर उत्पाद में मौजूद वसा, नमक और चीनी की मात्रा देखी जाएगी। इसी आधार पर यह फैसला होगा कि वह स्कूल के पास बिक सकता है या नहीं।
FSSAI का कहना है कि अभी न तो जंक फूड की पूरी सूची तय है। न ही हेल्दी मेन्यू को अंतिम रूप दिया गया है। यानी यह प्रक्रिया अभी भी शुरुआती चरण में है।
क्या कहते हैं अधिकारी
FSSAI के सेंटर एंड स्टेट रेगुलेटरी चेंज डिविजन के मैनेजर कुमार विकास ने इस पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि स्कूलों के लिए जरूरी सैंपल भोजन सूची अभी नहीं बनी है। हेल्दी विकल्पों की सूची भी अभी तैयार नहीं हुई है।
उनके मुताबिक मसौदा फाइनल होने के बाद पोषक तत्वों के आधार पर तय होगा। इससे साफ होगा कि कौन से उत्पाद 50 मीटर के दायरे में बेचे जा सकेंगे। इसके बाद स्कूल स्टाफ और गार्जियन को साफ दिशा-निर्देश दिए जाएंगे। फिलहाल इस नियम की निगरानी राज्यों के खाद्य सुरक्षा विभाग करेंगे। वहीं, इसे लागू करने की कोई तय समयसीमा अभी नहीं है।
मौजूदा नियम में क्या शामिल
मौजूदा नियम स्कूल कैंटीन, मेस और हॉस्टल पर भी लागू होता है। साथ ही 50 मीटर तक के रेस्टोरेंट भी इसके दायरे में आते हैं। ट्रांस फैट, अतिरिक्त चीनी और ज्यादा सोडियम वाले खाद्य पदार्थों पर रोक है। बच्चों को लुभाने वाले विज्ञापनों पर भी पाबंदी लगाई गई है।
वहीं, यह नियम अब तक ठीक तरह लागू नहीं हो पाया। किस उत्पाद को कितनी मात्रा में हानिकारक माना जाएगा, इसकी जांच अब तक साफ नहीं थी। नए मानक इसी कमी को दूर करने की कोशिश हैं।
पेय पदार्थ भी दायरे में
यह पाबंदी सिर्फ चिप्स और बिस्किट तक सीमित नहीं रहेगी। जूस, नारियल पानी, छाछ और चाय-कॉफी जैसे पेय भी इसमें शामिल किए जाएंगे। यानी दायरा पहले से कहीं ज्यादा बड़ा होने वाला है। इससे स्कूलों के आसपास की छोटी दुकानों पर भी असर पड़ सकता है।
ICMR की तीन श्रेणियां
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने भी खाद्य पदार्थों को लेकर काम किया है। परिषद ने खाद्य पदार्थों को तीन अलग श्रेणियों में बांटा है। यह वर्गीकरण भी नए मानक बनाने में मदद कर सकता है।
प्रस्तावित पैमाना क्या है
नए प्रस्तावित पैमाने के मुताबिक हर 100 ग्राम में तय सीमा से ज्यादा चीनी खतरनाक मानी जाएगी। ठोस खाद्य पदार्थों में प्रति 100 ग्राम 4.2 ग्राम से ज्यादा वसा खतरनाक मानी जाएगी। इसी तरह प्रति 100 ग्राम 3 ग्राम से ज्यादा चीनी को भी खतरनाक माना जाएगा।
तरल पदार्थों के लिए यह सीमा अलग रखी गई है। प्रति 100 मिली 1.5 ग्राम से ज्यादा वसा खतरनाक मानी जाएगी। वहीं प्रति 100 मिली 2 ग्राम से ज्यादा चीनी को भी खतरनाक माना जाएगा। इन्हीं आंकड़ों के आधार पर आगे तय होगा कि कौन सा उत्पाद बैन होगा।
आगे क्या होगा
अभी यह पूरी प्रक्रिया मसौदा स्तर पर है। मसौदा फाइनल होने के बाद ही असली तस्वीर साफ होगी। तब तक स्कूल, दुकानदार और अभिभावक सभी असमंजस में रहेंगे। बच्चों की सेहत से जुड़ा यह मामला इसलिए अहम माना जा रहा है।
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