जजों की नियुक्ति में सरकार के सामने नरम पड़ जाते थे पूर्व सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़-पूर्व जज संजय किशन कौल का दावा
पूर्व जस्टिस संजय किशन कौल की किताब
बता दें कि संजय किशन कौल सुप्रीम कोर्ट से साल 2023 में रिटायर हुए थे। रिटायर होने से पहले वह सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई के बाद सबसे वरिष्ठ जज थे। साथ ही कॉलेजियम प्रणाली के अहम सदस्य भी रहे हैं। अपनी आने वाली किताब विदाउट फीयर और फेवर (Without Fear or Favour) में उन्होंने न्यायपालिका के कामकाज को लेकर कई खुलासे किए हैं।
जस्टिस कौल का सीधा आरोप देश के पूर्व सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ पर है। उनका दावा है कि नए जजों की नियुक्ति को लेकर सीजेआई चंद्रचूड़ सरकार के सामने जरूरत से ज्यादा नरम पड़ जाते थे।
कॉलेजियम से पहले सरकार से चर्चा
जस्टिस कौल का कहना है कि कुछ मौकों पर सीजेआई चंद्रचूड़ कॉलेजियम की बैठक से पहले ही सरकार से बात कर लेते थे। वे संभावित जजों के नामों पर चर्चा करते थे।
जस्टिस कौल ने इस तरीके का कड़ा विरोध किया था। उनका मानना था कि कॉलेजियम की तय प्रक्रिया से पहले सरकार से ऐसी बातचीत करना सही नहीं है।
NJAC को तुरंत खारिज करना सही नहीं था
न्यायिक नियुक्तियों को लेकर जस्टिस कौल ने कॉलेजियम सिस्टम की कमियों पर भी खुलकर बात रखी है। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात को देखते हुए कॉलेजियम व्यवस्था को पूरी तरह से सही नहीं ठहराया जा सकता।
उनका कहना है कि जजों की नियुक्ति के लिए बने राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (National Judicial Appointments Commission) को सुप्रीम कोर्ट द्वारा सीधे खारिज करने के बजाय लागू होने देना चाहिए था। बाद में इसमें कोई कमी या गड़बड़ी दिखती, तो उसे सुधारा या बदला जा सकता था।
पूर्व सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने आरोपों पर दिया जवाब ?
जानकारी के अनुसार जस्टिस कौल के आरोपों पर पूर्व सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने भी जवाब दिया है। चंद्रचूड़ ने कहा कि उन्होंने अभी तक यह किताब नहीं पढ़ी है। ऐसे में पूरा मामला समझे बिना वे इस पर विस्तार से कुछ नहीं कह सकते।
हालांकि, सरकार से बातचीत के मुद्दे पर डीवाई चंद्रचूड़ ने अपनी बात स्पष्ट करते हुए कहा कि...
- सरकार की भूमिका: सरकार की बात इसलिए सुनी जाती है क्योंकि वह सीधे देश के सीजेआई से चर्चा करती है। आखिर में जजों की नियुक्ति का वारंट भी देश के राष्ट्रपति ही जारी करते हैं।
- कॉलेजियम का माहौल: जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि उनके कार्यकाल में कॉलेजियम की सभी बैठकें बेहद अच्छे माहौल में हुई थीं। किसी भी बैठक में कोई असहमति दर्ज नहीं कराई गई थी।
- आपसी संबंध: जस्टिस कौल समेत कॉलेजियम के सभी जजों के साथ उनके रिश्ते बेहद सम्मानजनक रहे हैं।
- वॉकआउट की बात: पूर्व सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने यह भी कहा कि उन्हें ऐसा कोई वाकया याद नहीं है जब जस्टिस कौल कॉलेजियम की किसी बैठक से नाराज होकर बाहर निकल गए हों।
FAQ
1. रिटायर्ड जस्टिस संजय किशन कौल ने पूर्व सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ पर क्या आरोप लगाए हैं?
जस्टिस कौल ने आरोप लगाया है कि नए जजों की नियुक्ति के मामले में तत्कालीन सीजेआई चंद्रचूड़ का रुख सरकार के प्रति काफी नरम था। वह कॉलेजियम की औपचारिक बैठक से पहले ही नामों को लेकर सरकार से बातचीत कर लेते थे, जिसका जस्टिस कौल ने कड़ा विरोध किया था।