पति से ज्यादा इनकम वाली पत्नी गुजारा भत्ते की हकदार नहीं: कर्नाटक हाईकोर्ट
पांच पाइंट में समझें पूरा मामला
- पत्नी की सैलरी पति से ज्यादा, कोर्ट ने गुजारा भत्ता नकारा।
- गुजारा भत्ता केस में हाईकोर्ट का चौंकाने वाला फैसला आया।
- सिर्फ दो महीने चली शादी, इसके बाद पत्नी ने मांगा था गुजारा भत्ता।
- ट्रायल कोर्ट का आदेश हाईकोर्ट ने पूरी तरह पलट दिया।
- पत्नी कमाती है हर महीना डेढ़ लाख, फिर भी मांगा था भत्ता।
बेंगलुरु से एक अहम कानूनी फैसला सामने आया है। कर्नाटक हाईकोर्ट ने गुजारा भत्ता से जुड़े एक मामले पर बड़ी टिप्पणी की है। कोर्ट ने साफ कहा कि अगर पत्नी अपने पति से ज्यादा कमा रही है, तो वो भत्ता पाने की हकदार नहीं है।
यह फैसला जस्टिस डॉ. चिल्लाकुर सुमालथा की एकल पीठ ने सुनाया। हाईकोर्ट ने मैसूर की एक ट्रायल कोर्ट का आदेश रद्द कर दिया। ट्रायल कोर्ट ने पति को हर महीने 20 हजार रुपये देने को कहा था।
समझें क्या है पूरा मामला
दंपती की शादी 2024 में हुई थी। दोनों सिर्फ दो महीने साथ रह पाए। इसके बाद पत्नी ने घरेलू हिंसा का केस दर्ज कराया। उसने हर महीने 1 लाख 13 हजार रुपए गुजारा भत्ता मांगा। हाईकोर्ट ने यह मांग खारिज कर दी।
ट्रायल कोर्ट पर हाईकोर्ट की टिप्पणी
हाईकोर्ट ने निचली अदालत की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने पति की आय पर तो गहराई से चर्चा की। लेकिन पत्नी की भारी आय को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया।
कोर्ट ने यह भी कहा कि घरेलू हिंसा अधिनियम या हिंदू दत्तक ग्रहण एवं भरण-पोषण अधिनियम के तहत मांग करने का मतलब यह नहीं कि पति को तुरंत भुगतान का आदेश दिया जाए। दोनों पक्षों की आर्थिक स्थिति का संतुलित आकलन जरूरी है।
दोनों की कमाई में बड़ा अंतर
पति ने कोर्ट को बताया कि वो एक प्राइवेट कंपनी में काम करता है। उसकी मासिक आय करीब 57 हजार रुपए है। वहीं टीडीएस (TDS – Tax Deducted at Source) रिकॉर्ड और पत्नी के अपने हलफनामे के अनुसार, उसकी सैलरी 1 लाख से 1.64 लाख रुपए के बीच थी। यानी पत्नी की कमाई पति से लगभग दोगुनी थी।
कर्ज का तर्क कोर्ट ने नहीं माना
पत्नी ने दलील दी थी कि उस पर शादी से जुड़े कर्ज चुकाने की जिम्मेदारी है। हाईकोर्ट ने इस तर्क को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि कर्ज चुकाना एक निजी मामला है। इसके आधार पर पति से जबरन भत्ता नहीं वसूला जा सकता।
कोर्ट ने यह भी पाया कि पत्नी पूरी तरह आत्मनिर्भर है। उस पर किसी बच्चे या अन्य आश्रित की जिम्मेदारी भी नहीं है। इसलिए सिर्फ इस पुरानी सोच पर भत्ता नहीं दिया जा सकता कि खर्च उठाना सिर्फ पति का काम है।
आगे क्या हो सकता है
हाईकोर्ट ने फिलहाल अंतरिम राहत का आदेश रद्द कर दिया है। लेकिन कोर्ट ने यह भी साफ किया कि अगर भविष्य में परिस्थितियां बदलती हैं, तो पत्नी दोबारा भत्ते के लिए कानूनी रास्ता अपना सकती है। यानी यह फैसला अंतिम नहीं, बल्कि मौजूदा हालात पर आधारित है।
यह फैसला उन मामलों के लिए एक नजीर बन सकता है, जहां पत्नी की आय पति से ज्यादा होती है। कानूनी जानकारों का मानना है कि अदालतें अब दोनों पक्षों की आर्थिक स्थिति को ज्यादा बारीकी से देखेंगी।
FAQ
- क्या पति से ज्यादा कमाने वाली पत्नी को गुजारा भत्ता मिल सकता है?
कर्नाटक हाईकोर्ट के अनुसार नहीं। कोर्ट ने कहा कि भत्ता तभी मिलेगा जब पत्नी के पास पर्याप्त साधन न हों। यह फैसला मौजूदा हालात पर आधारित है। - यह पूरा मामला किस बारे में है?
यह मामला मैसूर के एक दंपती से जुड़ा है। शादी के दो महीने बाद पत्नी ने भत्ते की मांग की थी। हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का आदेश रद्द कर दिया। - क्या पत्नी भविष्य में दोबारा भत्ता मांग सकती है?
हां, हाईकोर्ट ने साफ किया है कि परिस्थितियां बदलने पर पत्नी दोबारा कानूनी मांग कर सकती है। यह फैसला अंतिम नहीं है।
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निचली अदालत का फैसला