PM मोदी को ‘आतंकवादी’ कहने पर घिरे कांग्रेस अध्यक्ष खरगे, बाद में दी सफाई

Pawan Modiya | Apr 21, 2026, 20:51 IST
Photograph: (the sootr)
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के एक बयान ने देश की सियासत को गरमा दिया है। दरअसल, चेन्नई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान खरगे ने पीएम मोदी के लिए ‘आतंकवादी’ शब्द का इस्तेमाल कर दिया। जिसे लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया।

देश की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर एक आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी, जिससे सियासी घमासान तेज हो गया है।



तमिलनाडु में चुनाव प्रचार के आखिरी दिन चेन्नई में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान खरगे ने पीएम मोदी को ‘आतंकवादी’ कह दिया। हालांकि, बयान के कुछ ही समय बाद उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि उनका ऐसा कहने का आशय नहीं था।



तमिलनाडु चुनाव और बयान की टाइमिंग

यह पूरा विवाद तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान सामने आया। चुनाव के मद्देनजर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। खरगे ने अपने बयान में AIADMK के NDA में शामिल होने पर भी सवाल उठाए और इसे लोकतंत्र के लिए खतरा बताया।



खरगे ने क्या कहा?

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान खरगे ने कहा कि एआईएडीएमके का एनडीए में शामिल होना लोकतंत्र को कमजोर करता है। पार्टी ने अपनी पहचान खो दी है। वह पीएम मोदी के सामने झुक गई है। इसके साथ ही उन्होंने पीएम मोदी के लिए ‘आतंकवादी’ शब्द का इस्तेमाल किया, जिसने विवाद को जन्म दिया।



बाद में दी सफाई

विवाद बढ़ने के बाद खरगे ने तुरंत सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने पीएम मोदी को आतंकवादी नहीं कहा। उनका आशय यह था कि पीएम विपक्षी दलों को डराते हैं। उन्होंने ईडी, सीबीआई और आयकर विभाग के इस्तेमाल का आरोप लगाया। इस बयान के बावजूद विवाद शांत नहीं हुआ।



बीजेपी का पलटवार

बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा- कांग्रेस ‘मोहब्बत की दुकान’ की बात करती है, लेकिन बयान नफरत फैलाते हैं। यह बयान संविधान और लोकतंत्र का अपमान है। यह कोई गलती नहीं, बल्कि सोच-समझकर दिया गया बयान है।





खरगे पहले भी दे चुके विवादित बयान

यह पहली बार नहीं है, जब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पीएम मोदी को लेकर विवादित टिप्पणी की हो।



पहले भी दिए गए बयान

  • 2023: पीएम मोदी की तुलना ‘जहरीले सांप’ से
  • 2022: ‘रावण’ से तुलना

इन बयानों ने भी उस समय राजनीतिक माहौल को गरमा दिया था।



राजनीति में भाषा की मर्यादा पर सवाल

भारतीय लोकतंत्र में नेताओं से अपेक्षा की जाती है कि वे मर्यादित भाषा का इस्तेमाल करें। इस तरह की बयानबाजी राजनीतिक संवाद को कमजोर करती है। जनता के बीच गलत संदेश देती है। चुनावी माहौल को और अधिक ध्रुवीकृत बनाती है। इस विवाद के बाद सोशल मीडिया और न्यूज चैनलों पर तीखी बहस देखने को मिल रही है। कई लोगों ने इसे गैर-जिम्मेदाराना बताया, जबकि कुछ ने इसे चुनावी बयानबाजी का हिस्सा माना।



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