लाहौर में 9 जगहों के नाम बदले गए, इस्लामपुरा अब कृष्णनगर, बाबरी मस्जिद चौक फिर से जैन मंदिर चौक
News in Short
- लाहौर में 9 जगहों के नाम पुराने हिंदू और ब्रिटिश नामों पर लौटाए गए।
- इस्लामपुरा अब कृष्णनगर और बाबरी चौक जैन मंदिर चौक बन गया।
- सीएम मरियम नवाज ने हेरिटेज एरिया रिवाइवल प्रोजेक्ट लागू किया।
- बोर्ड और इमारतों के नाम नए अनुसार अपडेट किए गए।
- कट्टरपंथियों ने विरोध नहीं किया, स्थानीय धार्मिक संतुलन बना रहा।
News in Detail
पाकिस्तान के लाहौर में दो महीने में 9 जगहों के नाम बदलकर पुराने हिंदू और ब्रिटिश नाम रखे गए। इस्लामपुरा अब कृष्णनगर और बाबरी चौक जैन मंदिर चौक बन गया। सीएम मरियम नवाज के नेतृत्व में हेरिटेज एरिया रिवाइवल प्रोजेक्ट के तहत बोर्ड भी अपडेट किए गए।
नाम बदलने का ऐतिहासिक फैसला
पंजाब सूबे में लाहौर दशकों तक इस्लामीकरण के प्रभाव में रहा। हाल ही में 9 जगहों के नाम फिर से मूल नामों पर लौटाए गए। इसमें इस्लामपुरा (Islampura) अब कृष्णनगर (Krishnanagar) और बाबरी मस्जिद चौक जैन मंदिर चौक (Jain Mandir Chowk) बन गया। बोर्ड भी नए नामों के अनुसार अपडेट किए गए।
पूर्व पीएम नवाज शरीफ की पहल
सीएम मरियम नवाज (Maryam Nawaz) ने बताया कि लाहौर का इतिहास ही इसकी पहचान है। पुराने नाम और इमारतें इसका प्रमाण हैं। पूर्व पीएम नवाज शरीफ (Nawaz Sharif) ने कहा कि ऐतिहासिक नामों को सहेजना जरूरी है और यूरोप से इस दृष्टि से सीख लेनी चाहिए।
हेरिटेज एरिया रिवाइवल प्रोजेक्ट
19 मार्च को उच्चस्तरीय बैठक में हेरिटेज एरिया रिवाइवल प्रोजेक्ट पर चर्चा हुई। इसमें परकोटा शहर के आठों दरवाजों सहित दिल्ली गेट का जीर्णोद्धार किया जाएगा। नाम बदलने का उद्देश्य शहर की जड़ों और सांस्कृतिक विरासत को सहेजना है।
कट्टरपंथियों का रवैया
नाम बदलने के बावजूद वहां कोई कट्टरपंथी विरोध नहीं हुआ। टीएलपी (TLP) पर प्रतिबंध के कारण विरोध नहीं दिखाई दिया। लश्कर-ए-तैयबा ने भी पुराने नाम रखने का कोई विरोध नहीं किया।
नाम बदलने का पिछला दौर
1990 के दशक में बाबरी मस्जिद के ढांचे को गिराने के बाद नाम बदलने की कवायद शुरू हुई थी। उस दौरान केंद्र में नवाज शरीफ, बेनजीर और परवेज मुशर्रफ की सरकारें थीं। 2018-2022 में पीएम इमरान खान के दौरान नाम बदलने की कोई पहल नहीं हुई।
स्थानीय प्रतिक्रिया
जैन मंदिर के पास के अनारकली इलाके के मौलाना वाजिद कादरी (Wajid Qadri) का कहना है कि पुराने नाम लौटाने से किसी का ईमान प्रभावित नहीं होगा। पूर्वज जिन्होंने ये नाम रखे, वे भी मुसलमान थे और इससे किसी प्रकार का धार्मिक विवाद नहीं हुआ।
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