परिसीमन पर गरमाई राजनीति, महिला आरक्षण के साथ विपक्ष; कल होगी बड़ी बहस
भारत में लोकसभा सीटों को लेकर केंद्र सरकार द्वारा किए गए प्रस्ताव पर विपक्ष ने अपनी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। यह मामला संसद के आगामी विशेष सत्र से जुड़ा हुआ है, जिसमें तीन महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा होगी। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बुधवार को विपक्षी दलों के नेताओं के साथ बैठक के बाद इस मुद्दे पर बयान दिया। उनके अनुसार, विपक्षी दल महिला आरक्षण के समर्थन में हैं, लेकिन लोकसभा की सीटें बढ़ाने के प्रस्ताव के खिलाफ हैं। खड़गे ने कहा कि यह प्रस्ताव सरकार द्वारा राजनीतिक लाभ प्राप्त करने के लिए उठाया गया कदम है।
महिला आरक्षण के लिए समर्थन
कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे ने कहा कि विपक्ष महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है, बल्कि सरकार इसे राजनीतिक कारणों से आगे बढ़ा रही है ताकि विपक्ष को दबाया जा सके। खड़गे का यह बयान इस बात को दर्शाता है कि विपक्ष महिला आरक्षण का समर्थन करता है, लेकिन इसे राजनीतिक खेल से जोड़कर आगे बढ़ाने पर आपत्ति है। बैठक में राहुल गांधी, TMC, RJD, शिवसेना (UBT), NCP (शरद गुट) और AAP के नेता शामिल हुए।
महिला आरक्षण पर विपक्ष का स्टैंड
विपक्ष ने स्पष्ट किया कि वह महिला आरक्षण (Women Reservation) के खिलाफ नहीं है।
क्या है विपक्ष की मांग?
- महिलाओं को 33% आरक्षण दिया जाए
- इसे 2029 के चुनाव से लागू किया जाए
- मौजूदा 543 सीटों के आधार पर लागू किया जाए
विपक्ष का कहना है कि सरकार इस मुद्दे को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल कर रही है।
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परिसीमन विधेयक पर विरोध
विपक्षी दलों ने परिसीमन विधेयक (संशोधन) को लेकर भी अपने कड़े विरोध का इज़हार किया है। कांग्रेस के अलावा, अन्य दल जैसे टीएमसी, आरजेडी, शिवसेना (यूबीटी), एनसीपी (शरद गुट), और AAP ने भी इस विधेयक का विरोध करने का निर्णय लिया है। यह विधेयक सरकार द्वारा लोकसभा की सीटों को 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव करता है, जिसमें करीब 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएंगी।
विपक्ष की मुख्य आपत्तियां
- महिला आरक्षण का समर्थन, लेकिन समय और तरीके पर सवाल
- परिसीमन प्रक्रिया को “राजनीतिक हथियार” बताया
- दक्षिण बनाम उत्तर प्रतिनिधित्व का मुद्दा
- संसद में बिल के खिलाफ वोट करने का ऐलान
विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रिया
BRS पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष KTR ने परिसीमन प्रक्रिया पर अपना रुख साफ करते हुए कहा कि दक्षिण भारतीय राज्यों के हितों की रक्षा की जानी चाहिए। उनका यह कहना है कि वर्तमान में संसद में दक्षिण भारतीय राज्यों का प्रतिनिधित्व 24% है, और यदि परिसीमन के इस प्रस्ताव को लागू किया गया, तो यह और भी घट सकता है।
TVK अध्यक्ष विजय ने भी परिसीमन विधेयक को एक पक्षपाती कदम बताया। उनका कहना है कि इस विधेयक के पारित होने के बाद, दक्षिणी और उत्तरी राज्यों के बीच प्रतिनिधित्व का अनुपात काफी बदल जाएगा, जो उनके अनुसार असंतुलित होगा।
IUML सांसद ई टी मोहम्मद बशीर ने कहा, "हम परिसीमन बिल का विरोध कर रहे हैं क्योंकि यह असल में एक जाल है। वे 2023 में भी आरक्षण दे सकते थे, और हम अब भी उसका समर्थन करते हैं। लेकिन साथ ही, यह संवैधानिक संशोधन एक खतरनाक चीज है।"
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विशेष सत्र में प्रस्तावित बिल
सरकार 16, 17 और 18 अप्रैल को संसद के विशेष सत्र में तीन महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा लाने वाली है:
- संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026
- परिसीमन विधेयक (संशोधन)
- केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026
सरकार का प्रस्ताव है कि लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ाकर 850 की जाएं, जिसमें से 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएंगी।
विपक्ष ने साफ किया है कि वे इन विधेयकों के खिलाफ वोट करेंगे। खड़गे ने कहा कि हम महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन इस विधेयक के पारित होने से यह प्रतीत होता है कि सरकार महिला आरक्षण का इस्तेमाल राजनीतिक फायदा उठाने के लिए कर रही है।
लोकसभा सीट बढ़ाने का प्रस्ताव क्या है?
केंद्र सरकार द्वारा लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव देश की राजनीति में एक बड़ा बदलाव ला सकता है। इस प्रस्ताव के तहत लगभग 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने की योजना भी शामिल है।
सरकार इस प्रस्ताव को लागू करने के लिए संविधान (131वां संशोधन) बिल (Constitution Amendment Bill), परिसीमन विधेयक (Delimitation Bill) और केंद्र शासित प्रदेश कानून संशोधन (UT Amendment Bill) को संसद के विशेष सत्र (16-18 अप्रैल 2026) में पेश करने वाली है।
परिसीमन बिल क्या है और क्यों है अहम?
परिसीमन का मतलब होता है—जनसंख्या के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं का निर्धारण।
इस प्रक्रिया के तहत:
- लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाएं तय होती हैं
- जनसंख्या के अनुसार सीटों की संख्या बदली जाती है
- प्रतिनिधित्व को संतुलित करने की कोशिश होती है
यह बिल क्यों बना विवाद का कारण?
विपक्ष का आरोप है कि यह बिल राजनीतिक लाभ के लिए लाया जा रहा है। खासकर दक्षिण भारतीय राज्यों को लेकर चिंता जताई जा रही है कि उनका प्रतिनिधित्व कम हो सकता है।
FAQs:
- क्या है लोकसभा सीटें बढ़ाने का प्रस्ताव?
केंद्र सरकार का प्रस्ताव लोकसभा की सीटों को 543 से बढ़ाकर 850 करने का है। इसके साथ ही लगभग 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएंगी। - विपक्ष क्यों विरोध कर रहा है?
विपक्ष का कहना है कि सरकार इस विधेयक का इस्तेमाल राजनीतिक कारणों से कर रही है, ताकि महिला आरक्षण का समर्थन करने वाले विपक्षी दलों को दबाया जा सके। साथ ही, विपक्षी दल परिसीमन विधेयक का भी विरोध कर रहे हैं। - महिला आरक्षण के पक्ष में क्या कहा गया है?
विपक्ष ने कहा है कि वे महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन इसे राजनीतिक रूप से बढ़ावा देने पर आपत्ति है। विपक्षी दल इस मुद्दे पर एकजुट हैं और महिला आरक्षण के लिए उचित कदम उठाने की बात कर रहे हैं।