लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को हटाने विपक्ष ने तैयार किया प्रस्ताव, 103 सांसदों ने किए हस्ताक्षर
News In Short
- लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को हटाने के लिए विपक्षी अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहा है।
- विपक्ष राहुल गांधी को बोलने का मौका नहीं मिलने से नाराज है।
- प्रस्ताव संविधान के अनुच्छेद 94-सी के तहत लाया जा सकता है।
- हाल ही में विपक्षी दलों ने स्पीकर के खिलाफ प्रदर्शन किया था।
- केंद्रीय संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने कहा विपक्ष के पास संख्या बल नहीं है।
News In Detail
लोकसभा स्पीकर को हटाने का विपक्ष का प्रस्ताव
बजट सत्र का मंगलवार 10 फरवरी को 10वां दिन है। 1 फरवरी को 2026 का बजट पेश हुआ था। इसके बाद राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा होनी थी। लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी के मुद्दों पर सदन स्थगित हो रहा है। सोमवार को भी लोकसभा की कार्यवाही केवल 13 मिनट ही चली थी। विपक्ष राहुल गांधी को बोलने देने की मांग कर रहा था।
राहुल गांधी ने लोकसभा में कहा कि हम 1 घंटे पहले ही स्पीकर के पास गए थे। स्पीकर ने कहा था कि बजट डिस्कशन से पहले बोलने दिया जाएगा। आप मुझे बोलने नहीं दे रहे हैं। अब राहुल गांधी कह रहे हैं कि मैं आपसे पूछ रहा हूं आप मुझे बोलने देंगी या नहीं ?
वहीं लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को हटाने के लिए विपक्षी दल प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, संविधान के अनुच्छेद 94-सी के तहत यह प्रस्ताव लाया जा सकता है। अब तक 103 सांसद इस पर हस्ताक्षर कर चुके हैं।
विपक्ष नहीं हटा सकता स्पीकर को- मंत्री रिजिजू
केंद्रीय संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि विपक्ष स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव ला सकता है। उनके पास संख्या बल नहीं है इसलिए वे स्पीकर को हटा नहीं सकते। विपक्ष ने स्पीकर की टेबल पर चढ़कर प्रदर्शन किया था। संसद की गरिमा का उल्लंघन करते हुए वे स्पीकर के कमरे में भी घुस गए थे। सरकार स्पीकर से सख्त कार्रवाई की मांग कर सकती थी लेकिन स्पीकर ने 8 विपक्षी सांसदों को निलंबित किया था। सरकार इस फैसले से संतुष्ट है।
लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया
- प्रस्ताव पेश करने के लिए 50 लोकसभा सदस्यों का समर्थन जरूरी है।
- स्पीकर को नोटिस देने के लिए 14 दिन पहले लिखित रूप में सूचना दी जाती है।
- आरोपों को स्पष्ट और ठोस होना चाहिए।
- प्रस्ताव मंजूर होता है तो उस पर सदन में चर्चा और वोटिंग होती है।
- चर्चा के दौरान स्पीकर खुद सदन की अध्यक्षता नहीं कर सकते हैं।
- प्रस्ताव को पास होने के लिए लोकसभा में मौजूद सदस्यों का बहुमत चाहिए।
- लोकसभा में यह प्रस्ताव बहुमत से पास हो जाता है तो स्पीकर को तुरंत अपना पद छोड़ना पड़ता है।
इसके बाद नए स्पीकर का चुनाव शुरू होगा। आम तौर पर लोकसभा स्पीकर उसी पार्टी से होता है जो सत्ता में होती है। स्पीकर को हटाने के लिए जरूरी वोट मिल जाते हैं तो इसे सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव माना जाएगा। इसका मतलब होगा कि सत्तापक्ष लोकसभा में अपना बहुमत खो चुका है। उसे सरकार चलाने के लिए जरूरी 272 सदस्य नहीं मिल रहे हैं। इस स्थिति में विपक्ष सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव भी ला सकता है।
इसलिए राहुल गांधी को बोलने से रोका
राहुल गांधी ने कहा कि नरवणे की किताब पर सरकार ने उन्हें बार-बार बोलने नहीं दिया और सदन की कार्यवाही रोक दी। पहले किताब का जिक्र करने से रोका गया फिर मैगजीन का हवाला देने से। रक्षा मंत्री ने गलत कहा कि किताब अभी छपी नहीं है जबकि वो छप चुकी है। राष्ट्रपति के भाषण पर भी LoP और विपक्ष को बोलने नहीं दिया गया है।
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