लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश, बजट चर्चा स्थगित

Sanjay Dhiman | Feb 10, 2026, 15:45 IST
Photograph: (the sootr)
लोकसभा में विपक्षी सांसदों ने स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश कर दिया। इस दौरान बजट सत्र में दो बार कार्यवाही स्थगित हुई। हंगामे के बीच संसदीय कार्यमंत्री ने चर्चा की अपील की। राहुल गांधी ने पूर्व आर्मी चीफ की किताब विवाद पर बयान दिया।

New Delhi. लोकसभा में मंगलवार को नई राजनीतिक हलचल देखने को मिली। विपक्षी सांसदों ने स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश कर दिया। यह प्रस्ताव बजट सत्र के 10वें दिन आया।



इससे पहले, मंगलवार को लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान कार्यवाही नहीं हो सकी, क्योंकि विपक्ष ने हंगामा किया। मजे की बात यह है कि पेश किए गए अविश्वास प्रस्ताव पर विपक्ष के नेता राहुल गांधी के ही हस्ताक्षर नही हैं।



सत्र शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने हंगामे की शुरुआत कर दी, जिससे चेयर पर मौजूद पीसी मोहन को कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। महज एक मिनट बाद सदन को 12 बजे तक स्थगित कर दिया गया। इसके बाद भी हंगामा थमने का नाम नहीं ले रहा था और कार्यवाही को फिर से दो बजे तक स्थगित कर दिया गया।



संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने इस दौरान विपक्षी सांसदों से विनम्र अपील की कि बजट पर चर्चा होने दें, क्योंकि इस हंगामे से सभी का नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा कि रोज-रोज हंगामा करने से काम नहीं हो पा रहा है और हमें सभी मुद्दों पर चर्चा करने का मौका मिलना चाहिए।



दोपहर दो बजे कार्यवाही फिर से शुरू हुई और ओम बिरला की जगह केपी तेनेट्टी ने अध्यक्षता की। उन्होंने शशि थरूर से आम बजट पर चर्चा शुरू करने को कहा।



इस बीच, राहुल गांधी ने संसद के बाहर बुक कॉन्ट्रोवर्सी पर बयान दिया। उन्होंने कहा कि या तो पूर्व आर्मी चीफ जनरल नरवणे झूठ बोल रहे हैं, या फिर पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया। राहुल का यह बयान पेंगुइन की सफाई के बाद आया, जिसमें कंपनी ने दावा किया कि नरवणे की किताब अभी तक पब्लिश नहीं हुई है।



पेंगुइन रैंडम हाउस ने स्पष्ट किया कि किताब की कोई भी छपी हुई या डिजिटल कॉपी अब तक सार्वजनिक नहीं की गई है, और अनअथॉराइज्ड कॉपियों का लीक होना उनके नियंत्रण में नहीं था। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में FIR दर्ज की है। विपक्ष ने इस मुद्दे पर जोर दिया कि उन्हें सदन में बोलने दिया जाए।



राहुल गांधी को छोड़ 118 सांसदों ने किए हस्ताक्षर

बजट सत्र के दौरान विपक्ष लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया है। इस प्रस्ताव पर कांग्रेस, SP, Left, RJD सहित कुल 118 सांसदों ने हस्ताक्षर किए है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस प्रस्ताव पर साइन नहीं किए है। कांग्रेस की ओर से इस पर प्रियंका गांधी ने हस्ताक्षर किए है।



इन सांसदों ने सौंपा नोटिस

अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस देने के लिए विपक्ष की ओर से तीन सांसद लोकसभा सचिव के पास पहुंचे थे। इनमें कांग्रेस सांसद सुरेश कोडिकुन्निल, गौरव गोगोई,मोहम्मद जावेद शामिल थे।



सरकार के दबाव में काम करते हैं स्पीकर: प्रियंका

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने कहा कि लोकसभा स्पीकर सदन में पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाते है। उन्होंने आरोप लगाया कि संसद में सरकार ने स्पीकर का अपमान किया है। दबाव में स्पीकर को बयान देना पड़ रहा है। कांग्रेस सांसद ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री पर संसद में हमले का सवाल ही नहीं उठता है। पीएम विपक्ष के सवालों से बचना चाहते थे इसलिए लोकसभा में नहीं आए।



यह आरोप लगाए हैं विपक्ष ने

  • लोकसभा में विपक्ष के नेता को बोलने नहीं दिया जा रहा है।
  • विपक्ष के आठ सांसदों के निलंबित कर दिया गया है।
  • भाजपा सांसल ने सदन में पूर्व प्रधानमंत्रियों को लेकर आपत्तिजनक बातें कहीं
  • स्पीकर ने कांग्रेस सांसदों पर गंभीर आरोप लगाए है।

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लोकसभा अध्यक्ष को कब और किस स्थिति में हटाया जा सकता है?

लोकसभा अध्यक्ष को केवल एक विशेष प्रक्रिया के तहत ही हटाया जा सकता है, जो संविधान के अनुच्छेद 94 के तहत निर्धारित है। यह सामान्य अविश्वास प्रस्ताव से अलग और कड़ी शर्तों पर आधारित प्रक्रिया है। आइए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से।



1. लोकसभा अध्यक्ष को हटाने की मुख्य प्रक्रिया

लोकसभा अध्यक्ष को पद से हटाने के लिए एक विशेष प्रस्ताव लाना होता है। इस प्रस्ताव को कम से कम 14 दिन पहले लोकसभा के महासचिव को लिखित रूप में देना जरूरी है। साथ ही, इस प्रस्ताव पर कम से कम 50 सांसदों का समर्थन होना चाहिए। यदि यह समर्थन नहीं मिलता, तो प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया जाता।



इसके बाद, प्रस्ताव पर चर्चा होती है और इसे लोकसभा के स्पष्ट बहुमत (यानी आधे से अधिक सदस्य) से पारित करना होता है। उदाहरण के लिए, 543 सदस्यीय लोकसभा में 272 वोट का समर्थन चाहिए। यदि प्रस्ताव पारित हो जाता है, तो अध्यक्ष को तत्काल पद छोड़ना पड़ता है।



2. अध्यक्ष की भूमिका चर्चा के दौरान

जब अध्यक्ष के खिलाफ प्रस्ताव पर चर्चा हो रही हो, तो वे सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता नहीं कर सकते। हालांकि, वे सदस्य के रूप में बहस कर सकते हैं और यदि स्थिति बराबरी की हो, तो निर्णायक वोट भी दे सकते हैं।



3. अन्य हटाने की स्थितियां

अयोग्यता: अगर अध्यक्ष लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 7 या 8 के तहत लोकसभा सदस्यता के लिए अयोग्य घोषित हो जाते हैं, तो उन्हें स्वतः पद से हटना पड़ता है।



इस्तीफा: अध्यक्ष अपनी इच्छा से डिप्टी स्पीकर को लिखित इस्तीफा दे सकते हैं और पद छोड़ सकते हैं।



4. कब-कब बनी ऐसी स्थिति

भारतीय संसद में अब तक लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ तीन बार प्रस्ताव लाए गए हैं, लेकिन सभी असफल रहे। आज तक कोई भी अध्यक्ष इस प्रक्रिया से पद से हटाया नहीं गया।



लोकसभा अध्यक्ष को हटाने की यह प्रक्रिया संविधान द्वारा निर्धारित कड़ी शर्तों के तहत काम करती है। यह सुनिश्चित करती है कि ऐसा कदम केवल मजबूत और गंभीर परिस्थितियों में ही उठाया जा सके।



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क्या लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ महाभियोग लाया जा सकता है?

महाभियोग एक संवैधानिक प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से किसी भी उच्च पदस्थ अधिकारी को उनके पद से हटाया जा सकता है, अगर वह अपने कर्तव्यों में गंभीर रूप से लापरवाही करते हैं या संवैधानिक और कानूनी नियमों का उल्लंघन करते हैं। यह प्रक्रिया विशेष रूप से राष्ट्रपति, उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों, और अन्य संवैधानिक अधिकारियों के खिलाफ लागू होती है।



लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ महाभियोग (impeachment) प्रस्ताव नहीं लाया जा सकता। लोकसभा अध्यक्ष को हटाने की प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 94 (सी) के तहत एक विशेष संकल्प (resolution) द्वारा की जाती है।



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