Loneliness : छह महीने में अपने घरों में अकेले रहने वाले करीब 40 हजार लोगों की हुई मौत

Jitendra Shrivastava | Aug 31, 2024, 23:39 IST
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देश-दुनिया। जापान में इस साल की पहली छमाही के दौरान करीब 40 हजार लोगों की मौत उनके घरों में अकेले हुई है। जापान की पुलिस की एक रिपोर्ट के अनुसार 4 हजार लोगों के शव उनकी मौत के एक महीने बाद मिले हैं...

जापान में इस साल की पहली छमाही के दौरान करीब 40 हजार लोगों की मौत उनके घरों में अकेले हुई है। यह आंकड़े जापान की पुलिस की एक रिपोर्ट में बताए गए हैं। राष्ट्रीय पुलिस एजेंसी के अनुसार, इनमें से करीब 4 हजार लोगों के शव उनकी मौत के एक महीने बाद मिले हैं और 130 लोगों के शव करीब एक साल तक लापता रहे। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक मैजूदा वक्त में जापान में सबसे ज्यादा बुजुर्ग जनसंख्या है और वहां अकेलापन भी गंभीर समस्या है।



ब्रिटेन में सरकारी विभागों में अकेलेपन की समस्या सुलझाने मंत्री की पोस्टिंग

हमने अपनी जिंदगी में कभी न कभी खुद को अकेला महसूस किया होगा। आज दुनिया भर में इस अकेलेपन को लेकर बहुत चर्चा हो रही है। दिक्कत ये है कि अकेलेपन को लेकर तमाम मिथक गढ़े गए हैं। ये सच्चाई से परे हैं। मगर बहुत से लोग इन पर यकीन करते हैं, वहीं कई लोग इसे हंसी में टाल जाते हैं। इसी को लेकर ब्रिटेन में एक मंत्री को सरकारी विभागों में अकेलेपन से जूझ रहे लोगों की समस्याओं को सुलझाने की जिम्मेदारी तक दे दी गई है।



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अकेलेपन से होने वाली समस्याओं के 4 सच...

अकेलेपन का मतलब आपका किसी से जुड़ाव नहीं

अकेलापन महसूस करने का मतलब अकेला होना नहीं होता। इसका ये मतलब है कि आप दूसरों से जुड़ाव महसूस नहीं करते हो। आप सोचते हैं कि आपको कोई नहीं समझता। इसमें अलग रहना भी एक वजह हो सकती है, लेकिन ये अकेलापन नहीं हो सकता। अकेलापन तो आप भीड़ में भी महसूस कर सकते हैं। वहीं, कई बार आप अकेले समय बिताकर भी बेहद खुशी और राहत महसूस करते हैं। 2016 में बीबीसी की 'रेस्ट टेस्ट' रिसर्च में लोगों से पूछा गया था कि उनके लिए राहत का क्या अनुभव है। टॉप पांच विकल्पों में सभी ने यही कहा कि वो कुछ वक्त अकेले बिताकर आराम महसूस करते हैं, लेकिन जब हमारे पास विकल्प न हो तो हम अकेलेपन के शिकार हो जाते हैं।



इस समय महामारी की तरह फैल रहा अकेलापन

आज की तारीख में दुनिया भर में अकेलेपन की चर्चा भले ही हो रही हो, लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि कुछ साल पहले के मुकाबले आज ज्यादा अकेलेपन के शिकार हैं। साल 1948 में लंदन की ब्रुनेल यूनिवर्सिटी में एक शोध से लेकर आज तक समाज में अकेलापन महसूस करने वालों का अनुपात लगभग एक जैसा ही रहा है। यानी पिछले 70 सालों से आबादी के 6-13 फीसदी लोग अकेलेपन की शिकायत कर रहे हैं। इनकी आबादी बढ़ी है वहीं अकेलापन महसूस करने वालों की संख्या भी बढ़ी है।



अकेलेपन में दोस्त को तलाशते हो

अकेलापन यकीनन खराब है। मगर कई बार हमें ये नए लोगों से जुड़ने और नए दोस्त बनाने का बढ़ावा भी देता है। शिकागो यूनिवर्सिटी के सामाजिक मनोवैज्ञानिक जॉन कैसिओपो बताते हैं कि ये मामला प्यास का है। जैसे आप प्यास में पानी तलाशते हैं ठीक वैसे ही अकेलापन महसूस करने पर दोस्त, साथी और परिचितों को तलाशते हैं, ताकी उनके साथ अच्छा वक्त बिता सके। जो आपको समझ सकें। यानी की कई बार अकेलेपन में हमें नए रिश्ते बनाने और पुरानों को बेहतर करने का मौका भी मिलता है। अकेलापन मुश्किलों से निपटने का मानवता का एक तरीका रहा है। आम तौर पर अकेलापन स्थायी नहीं होता, लेकिन अगर ये ज्यादा बढ़ जाए तो गंभीर हो सकता है।



ज्यादातर बुजुर्ग होते हैं अकेलेपन के शिकार

आमतौर पर ज्यादा उम्र में लोग अकेलापन ज्यादा महसूस करते हैं, लेकिन मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी की पामेला क्वाल्टर के शोध में पता चला कि किशोर भी अकेलेपन के शिकार होते हैं। कई शोध ने ये भी बताया है कि आम राय के हिसाब से 50 से 60 के उम्रदराज लोग अकेलेपन के शिकार नहीं होते हैं।



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