क्या है उज्जैन के बाबा महाकाल की सवारी का इतिहास, जानें कैसे शुरू हुई थी ये परंपरा
Kaushiki | Jul 22, 2025, 15:08 IST
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शाही सम्मान और आरतीImage credit : Kaushiki
सवारी शुरू होने से पहले श्री महाकालेश्वर मंदिर (baba mahakal king of ujjain) के सभा मंडप में पूजा-अर्चना की जाती है। महाकाल की सवारी में तलवारबाज और घुड़सवार भी शामिल होते हैं, जो इसे और भी रोमांचक और आकर्षक बनाते हैं।
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महाकाल की सवारी का महत्वImage credit : Kaushiki
महाकाल की सवारी (Baba Mahakal of Ujjain) हर साल सावन माह में निकलती है। इसे लेकर मान्यता है कि महाकाल प्रजा का हाल जानने निकलते हैं और उनके दर्शन से भय और रोगों का नाश होता है। यह अद्भुत मिलन भक्त और भगवान के बीच होता है, जिसे देखने के लिए लोग देश-विदेश से आते हैं।Madhya Pradesh
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दिव्य रूप और शाही सवारीImage credit : Kaushiki
सावन के हर सोमवार को बाबा महाकाल अपने अलग-अलग रूप में चांदी की पालकी पर सवार होकर भक्तों को दर्शन देने निकलते हैं। इस दौरान जय महाकाल के जयकारों से पूरा उज्जैन गूंज उठता है।
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महाकाल की सवारी का इतिहासImage credit : Kaushiki
महाकाल की सवारी की परंपरा राजा भोज ने शुरू की थी, जब नए रथ और हाथी शामिल किए गए थे। यह परंपरा आज भी विधिपूर्वक निभाई जाती है।
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उज्जैन में बाबा महाकाल की सवारीImage credit : Kaushiki
सावन का महीना शिवभक्तों के लिए एक बड़ा उत्सव होता है और ऐसे में इस समय मध्यप्रदेश के उज्जैन के बाबा महाकाल की सवारी का नजारा बेहद खास होता है। आज हम इस सवारी की कुछ खास बातें जानेंगे।
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सृष्टि के संचालक महाकालImage credit : Kaushiki
मान्यता है कि वर्षा काल में सभी देवी-देवता शयनकाल में चले जाते हैं और उस दौरान बाबा महाकाल ही पूरी सृष्टि का संचालन करते हैं। इसलिए, उनका ये भ्रमण और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।
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राजाधिराज का नगर भ्रमणImage credit : Kaushiki
बाबा महाकाल को उज्जैन का राजाधिराज माना जाता है। सावन के महीने में वे अपनी प्रजा का हाल जानने के लिए मंदिर से नगर भ्रमण पर निकलते हैं।