मदुरै कोर्ट ने सथानकुलम हत्याकांड में नौ पुलिसवालों को सुनाई मौत की सजा

Sandeep Kumar | Apr 07, 2026, 24:12 IST
nine police officers death
मदुरै की लोकल कोर्ट ने सथानकुलम हत्याकांड में नौ पुलिसकर्मियों को मौत की सजा सुनाई। ये पुलिसकर्मी 2020 में पिता-पुत्र की हिरासत में हुई मौत के लिए जिम्मेदार थे।

News in short

  • मदुरै की लोकल कोर्ट ने सथानकुलम हत्याकांड में नौ पुलिसकर्मियों को मौत की सजा सुनाई
  • पुलिस ने पी जयराज और उनके बेटे बेनिक्स को हिरासत में लेकर बेरहमी से पीटा।
  • सीबीआई की जांच के बाद आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर की गई।
  • अदालत ने दोषियों के लिए सुधार की कोई गुंजाइश न होने के कारण मौत की सजा दी।

News in Detail

तमिलनाडु के सथानकुलम में हुई पिता-पुत्र की हिरासत में हत्या के मामले में मदुरै की लोकल कोर्ट ने नौ पुलिसकर्मियों को मौत की सजा सुनाई। पुलिसवालों ने 2020 में पी जयराज और उनके बेटे बेनिक्स को हिरासत में यातना दी, जिससे उनकी मौत हो गई। अदालत ने इसे "दुर्लभतम से भी दुर्लभ" मामला मानते हुए मौत की सजा का आदेश दिया।



क्या है पूरा मामला ?

यह घटना 19 जून, 2020 को सथानकुलम के एक मोबाइल शोरूम में हुई। जब जयराज अपने बेटे के साथ शोरूम में थे, पुलिस ने उन्हें कोविड-19 कर्फ्यू उल्लंघन के आरोप में गिरफ्तार किया। बाद में बेनिक्स ने पुलिस स्टेशन में अपने पिता को छुड़वाने का प्रयास किया। पुलिस ने उन्हें और उनके पिता को बेरहमी से पीटा। इसके बाद पुलिस ने दोनों को पूरी रात टॉर्चर किया।



हिरासत में मौत

अगले दिन दोनों को न्यायिक हिरासत में भेजा गया। बिना इलाज के उन्हें कोविलपट्टी उप-जेल में डाला गया। दोनों की तबीयत बिगड़ गई और 22 जून 2020 को बेनिक्स की मौत हो गई। जयराज की मृत्यु 23 जून को हुई। दोनों की मौत के बाद एफआईआर दर्ज की गई। मामला सीबीआई को सौंपा गया।



सीबीआई की जांच

सीबीआई ने इस मामले की जांच शुरू की। 25 सितंबर 2020 को आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर की। अदालत में चार साल तक लंबी सुनवाई चली। 23 मार्च 2026 को न्यायाधीश जी मुथुकुमारन ने नौ पुलिसकर्मियों को दोषी पाया। उन्हें मौत की सजा सुनाई गई।



अदालत का फैसला

अदालत ने इसे दुर्लभतम से भी दुर्लभ मामला माना। पुलिसकर्मियों को मौत की सजा सुनाई गई। सीबीआई के विशेष सरकारी वकील ने दलील दी कि यह समाज को झकझोर देने वाला है। इसके लिए मौत की सजा या आजीवन कारावास मिलना चाहिए। दोषियों के वकीलों ने कम सजा की मांग की। अदालत ने इसे ठुकरा दिया।



अदालत ने कृत्य के गंभीर परिणामों को ध्यान में रखा। दोषियों को सुधार की कोई गुंजाइश नहीं समझी गई। इसलिए उन्हें मौत की सजा दी गई। पीड़ित पक्ष के वकील ने कहा कि दोषियों ने पूरी रात पिता-पुत्र को बेरहमी से पीटा। यह साफ था कि वे अपने कृत्य से अवगत थे।



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