महाराष्ट्र में ऑटो-टैक्सी ड्राइवरों को तीन महीने में सीखनी होगी मराठी, वर्ना रद्द होगा लाइसेंस

Kaushiki | Aug 23, 2026, 12:38 IST
Maharashtra auto taxi rules
महाराष्ट्र में ऑटो-टैक्सी ड्राइवरों के लिए कामचलाऊ मराठी बोलना अनिवार्य कर दिया गया है। राज्य सरकार इसके लिए विशेष चेकिंग अभियान चला रही है। तीन महीने में भाषा न सीखने पर लाइसेंस सस्पेंड हो सकता है। इससे प्रवासी ड्राइवरों में भारी चिंता देखी जा रही है।

Maharashtra auto taxi rules: महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में नया भाषाई नियम लागू किया है। अब ऑटो और टैक्सी चालकों को मराठी बोलना आना चाहिए। परिवहन विभाग इसके लिए सड़कों पर सख्त अभियान चला रहा है।



मुंबई और आसपास के शहरों में चेकिंग तेजी से बढ़ गई है। RTO के अधिकारी गाड़ियों को रोककर ड्राइवरों की जांच कर रहे हैं। उनसे मराठी में बातचीत करके उनका भाषा ज्ञान परखा जा रहा है।



Maharashtra auto taxi rules


यूनियन ने उठाई समय बढ़ाने की मांग

ऑटो-टैक्सी यूनियन ने सरकार से कुछ ढील देने की मांग की है। यूनियन के अध्यक्ष शशांक राव ने सरकार को पत्र लिखा है। उन्होंने चालकों को तीन महीने का अतिरिक्त समय देने की मांग की। साथ ही किसी भी तरह की कार्रवाई पर रोक लगाने को कहा।



स्वाभिमान यूनियन के केके तिवारी ने भी सरकार का विरोध किया। उन्होंने लाइसेंस रद्द करने की धमकी को गलत ठहराया है। 60 साल से अधिक उम्र वाले चालकों को छूट मिलनी चाहिए। सेंटर्स पर सीखने के नाम पर वसूली की शिकायतें आ रही हैं।



सीखनी होगी कामचलाऊ मराठी भाषा

जो ड्राइवर मराठी नहीं बोल पा रहे हैं उन्हें नोटिस मिल रहा है। सरकार उन्हें भाषा सीखने के लिए तीन महीने की मोहलत दे रही है। इस दौरान उन्हें कामचलाऊ मराठी भाषा सीखनी ही होगी। अगर तीन महीने बाद भी ड्राइवर मराठी नहीं सीख पाते हैं, तो उनका बैज निलंबित कर दिया जाएगा।



इसके बाद भी सुधार न होने पर परमिट रद्द होगा। राज्य में करीब नौ लाख से अधिक ऑटो-रिक्शा रजिस्टर्ड हैं। वहीं 60 हजार से अधिक टैक्सियां सड़कों पर दौड़ती हैं।



सरकार छह लाख प्रवासियों को भाषा से जोड़ना चाहती है। अब तक डेढ़ लाख से अधिक चालक इस अभियान से जुड़े हैं। कई जगह ड्राइवरों को ट्रेनिंग सेंटर्स भेजे जा रहे हैं।



Maharashtra auto taxi rules


आरटीओ की पैनी नजर

सड़कों पर जांच प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए RTO सतर्क है। चेकिंग के दौरान फ्लाइंग स्क्वॉड पूरी बातचीत का वीडियो बना रही है। इससे किसी भी तरह के विवाद से बचा जा सकेगा।



नया लाइसेंस लेने वालों की भी जांच होगी। अब ऑनलाइन आवेदन के साथ मौखिक टेस्ट पास करना जरूरी है। टेस्ट पास करने वाले को ही नया परमिट दिया जाएगा।



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प्रवासी ड्राइवरों के रोजी-रोटी पर संकट

राज्य में काम करने वाले प्रवासी चालक काफी घबराए हुए हैं। ठाणे में रहने वाले रमापति गिरी बरसों से ऑटो चला रहे हैं। 46 साल की उम्र में परीक्षा का डर उन्हें सता रहा है।



बोरीवली के सूर्यकांत यादव भी नियम से काफी परेशान दिखे। उनका कहना है कि वे नियम का पूरा सम्मान करते हैं। लेकिन चेकिंग के दौरान अधिकारी बहुत गलत रवैया अपनाते हैं। दहिसर में बाबुलनाथ मिश्रा को शब्द की गलती पर टोक दिया गया। वे 22 सालों से मुंबई की सड़कों पर गाड़ी चला रहे हैं।



अधिकतर चालक उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों से आते हैं। वे बरसों से इस शहर में अपनी सेवा दे रहे हैं। अचानक नियम सख्त होने से वे बहुत निराश नजर आ रहे हैं।



अगर ड्राइविंग लाइसेंस सस्पेंड हुआ तो रोजी-रोटी का साधन छिन जाएगा। केंद्रीय मंत्रियों ने भी सरकार से समय देने की अपील की है। कार्रवाई से शहर का ट्रांसपोर्ट सिस्टम भी काफी प्रभावित हो सकता है।



अभियान और विरोध

परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक का कहना है कि नियम बहुत पुराना है। ये Motor Vehicles Act, 1989 का ही एक हिस्सा है। सरकार केवल इसका कड़ाई से पालन करवा रही है।



सरकार ने ड्राइवरों को भाषा सिखाने के लिए कोचिंग क्लास भी चलाईं। इसमें डेढ़ लाख से ज्यादा ड्राइवरों ने ट्रेनिंग पूरी की है। हालांकि अब भी लाखों ड्राइवर भाषा सीखने से बचे हुए हैं।



राजनीतिक स्तर पर भी इस फैसले का मिला-जुला असर दिख रहा है। केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने चालकों को और समय देने की मांग की है। उनका कहना है कि सख्त कार्रवाई से गरीबों का नुकसान होगा।



यूनियन के नेताओं ने भी सरकार के इस नियम पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि वर्किंग नॉलेज की परिभाषा साफ नहीं की गई है। इससे RTO अधिकारियों की मनमानी और भ्रष्टाचार बढ़ने का खतरा है।



ड्राइवरों की चिंता

सरकार के इस कदम से गैर-मराठी ड्राइवरों में काफी चिंता है। उत्तर प्रदेश और बिहार से आए लोग काफी परेशान दिखाई दे रहे हैं। वे सालों से मुंबई की सड़कों पर गाड़ियां (Taxi Driver) चला रहे हैं।



अचानक परीक्षा और नोटिस से उनकी रोजी-रोटी पर संकट आ गया है। उनका कहना है कि वे सवारियों से काम भर की बात कर लेते हैं। लेकिन कठिन टेस्ट पास करना उनके लिए बहुत मुश्किल काम है।



महाराष्ट्र सरकार का यह फैसला भाषाई पहचान को मजबूत करने की कोशिश है। हालांकि इससे लाखों प्रवासी ड्राइवरों का भविष्य अधर में लटक गया है। आने वाले समय में देखना होगा कि यह अभियान कितना सफल रहता है।



FAQ

  1. महाराष्ट्र में ऑटो चालकों के लिए मराठी भाषा का क्या नियम बना है?
    महाराष्ट्र सरकार ने ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए कामचलाऊ मराठी भाषा बोलना अनिवार्य कर दिया है। मराठी न आने पर तीन महीने का समय दिया जाएगा, सुधार न होने पर लाइसेंस रद्द हो सकता है।
  2. मराठी न सीखने वाले ड्राइवरों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी?
    RTO जांच के दौरान मराठी न बोल पाने पर पहले नोटिस जारी होगा। तीन महीने में भाषा न सीखने पर बैज सस्पेंड होगा और बाद में परमिट हमेशा के लिए रद्द कर दिया जाएगा।
  3. क्या नए लाइसेंस और परमिट के लिए भी मराठी का टेस्ट देना होगा?
    हां, अब नए ऑटो-टैक्सी लाइसेंस या बैज के लिए RTO अधिकारी मौखिक जांच करेंगे। इस पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग होगी और टेस्ट पास करने पर ही परमिट मिलेगा।

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