महात्मा गांधी की डायरी 16.20 करोड़ रुपये में नीलाम, बना वर्ल्ड रिकॉर्ड

Manya Jain | Aug 22, 2026, 07:33 IST
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महात्मा गांधी के हाथ से लिखे रोजाना विचारों की डायरी सैफ्रनआर्ट की नीलामी में 16.20 करोड़ रुपए में बिकी। यह किसी भारतीय ऐतिहासिक दस्तावेज के लिए अब तक की सबसे बड़ी नीलामी कीमत है।

    महात्मा गांधी के हाथ से लिखे गए रोजाना के निजी विचारों का एक संग्रह हाल ही में नीलामी में बिका है। यह संग्रह उन्होंने अपने करीबी साथी आनंद टी. हिंगोरानी के लिए लिखा था और इसे सैफ्रनआर्ट की नीलामी में 16.20 करोड़ रुपए में खरीदा गया। यह किसी भी भारतीय ऐतिहासिक दस्तावेज के लिए अब तक की सबसे बड़ी नीलामी कीमत मानी जा रही है। इस डायरी के अलावा गांधीजी से जुड़ी कुल 86 वस्तुओं की नीलामी हुई, जिसमें उनके पत्र, चरखा और हस्ताक्षरित तस्वीर भी शामिल थी।



    गांधीजी ने यह विचार करीब 23 महीनों तक लगभग रोजाना लिखे थे। इन्हें "A Thought for the Day" नाम की किताब में संकलित किया गया है, जिसमें कुल 688 विचार दर्ज हैं। इस संग्रह में सच्चाई, आत्मसंयम और अहिंसा से जुड़े उनके निजी विचार शामिल हैं।



    हिंगोरानी और गांधीजी का रिश्ता

    आनंद टी. हिंगोरानी पहली बार महात्मा गांधी से 1930 में मिले थे। इसके बाद वे साबरमती आश्रम में गांधीजी के साथ मिलकर काम करने लगे। उन्होंने दांडी मार्च के साथ-साथ सविनय अवज्ञा आंदोलन और भारत छोड़ो आंदोलन में भी हिस्सा लिया था। आगे चलकर वे महात्मा गांधी की रचनाओं के एक बड़े प्रकाशक और संरक्षक बने।



    उनके परिवार ने यह संग्रह पीढ़ी दर पीढ़ी संभालकर रखा। हिंगोरानी का निधन 1999 में हुआ था।



    कैसे शुरू हुआ यह पत्राचार

    यह पत्राचार तब शुरू हुआ जब हिंगोरानी की पत्नी विद्या के निधन के बाद महात्मा गांधी ने खुद उनसे संपर्क किया था। उस समय हिंगोरानी अपनी बहरेपन की समस्या के इलाज के लिए प्राकृतिक चिकित्सा भी करा रहे थे और उन्होंने अपने अकेलेपन व दुख के बारे में गांधीजी को बताया था।



    सैफ्रनआर्ट की सह-संस्थापक और अध्यक्ष मीनल वजीरानी के मुताबिक, महात्मा गांधी ने हर दिन कुछ समय निकालकर एक विचार लिखना शुरू किया था। जो शुरुआत में एक निजी पत्राचार था, वह धीरे-धीरे एक साझा काम में बदल गया। गांधीजी हर विचार लिखते थे, जबकि हिंगोरानी उसे संभालते, व्यवस्थित करते और आगे प्रकाशन के लिए तैयार करते थे।



    निजी रिश्तों को भी देते थे उतनी ही अहमियत

    मीनल वजीरानी ने कहा कि गांधी को अक्सर उनके बड़े राजनीतिक आंदोलनों के लिए याद किया जाता है, लेकिन यह दस्तावेज दिखाता है कि वे निजी रिश्तों को भी उतनी ही अहमियत देते थे। यह किताब कुल 86 वस्तुओं की नीलामी का हिस्सा थी, जिसमें गांधीजी और हिंगोरानी के बीच के पत्र, पांडुलिपियां, डाक टिकट और अन्य वस्तुएं भी शामिल थीं।



    नीलामी में बिकीं और भी अहम चीजें

    इसी नीलामी में गांधीजी के भगवद गीता और ईश्वर से जुड़े विचारों वाला "मैसेज ऑफ गॉड" संग्रह 1.68 करोड़ रुपए में बिका। उनका चरखा और चरखा चलाने से जुड़े दो पत्र 1.02 करोड़ रुपए में नीलाम हुए। वहीं महात्मा गांधी की एक हस्ताक्षरित तस्वीर 78 लाख रुपए में बिकी।



    एक्सपर्ट कोट्स

    सैफ्रनआर्ट की सह-संस्थापक और अध्यक्ष मीनल वजीरानी ने कहा कि गांधी को अक्सर उनके बड़े राजनीतिक आंदोलनों के लिए याद किया जाता है, लेकिन यह दस्तावेज दिखाता है कि वे निजी रिश्तों को भी उतनी ही अहमियत देते थे। उन्होंने यह भी बताया कि गांधीजी हर विचार खुद लिखते थे, जबकि हिंगोरानी उन्हें संभालते और प्रकाशन के लिए तैयार करते थे।



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