दिल्ली अग्निकांड में फरिश्ते बने मुस्लिम बाप-बेटे, 2 लाख के गद्दे कुर्बान कर बचाई कई जिंदगियां

Anjali Dwivedi | Jun 05, 2026, 10:53 IST
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दिल्ली के मालवीय नगर में होटल में आग से 21 लोगों की मौत हुई। पास की गद्दे की दुकान के मालिक रियाजुद्दीन मंसूरी और बेटे अरमान ने 2 लाख रुपए के गद्दे सड़क पर बिछाकर 8 से 12 लोगों की जान बचाई। सोशल मीडिया पर दोनों की जमकर तारीफ हो रही है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • दिल्ली के मालवीय नगर में होटल में भीषण आग लगी, 21 की मौत हुई।
  • आग में फंसे लोग ऊपरी मंजिलों से कूदने को मजबूर हो गए।
  • रियाजुद्दीन और बेटे अरमान ने 20-22 गद्दे सड़क पर बिछा दिए।
  • इस कदम से 8 से 12 लोगों की जान बच गई, चोटें मामूली रहीं।
  • रियाजुद्दीन ने कहा, चाहे हिंदू हो या मुस्लिम, हम सब हिंदुस्तानी हैं।

दिल्ली में आग का कहर

दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर इलाके में बुधवार 3 जून की सुबह अचानक एक होटल में भीषण आग लग गई। देखते ही देखते आग ने पूरी इमारत को अपनी चपेट में ले लिया। होटल में ठहरे 21 लोगों की मौत हो गई, जिनमें 9 भारतीय और 12 विदेशी मेहमान शामिल थे। वहीं 11 लोग घायल भी हुए।



ग्राउंड फ्लोर पर आग इतनी तेज थी कि भागने का कोई रास्ता नहीं बचा। ऊपरी मंजिलों पर फंसे लोग खिड़कियों से चिल्ला रहे थे। हर तरफ धुआं और लपटें थीं। उस वक्त कोई नहीं जानता था कि सामने की दुकान से एक फरिश्ता आने वाला है।



गद्दे वाले बने जिंदगी की ढाल

होटल के ठीक सामने रियाजुद्दीन मंसूरी की गद्दे और रजाई की दुकान है। यह दुकान करीब 40 साल पुरानी है। सुबह करीब साढ़े आठ बजे एक पड़ोसी ने उनके बेटे अरमान को आग की खबर दी।



अरमान जब मौके पर पहुंचे तो मंजर दिल दहलाने वाला था। ऊपर से लोग चिल्ला रहे थे कि क्या हम कूद जाएं? अरमान ने एक पल भी नहीं गंवाया। उन्होंने दुकान से 20 से 22 नए गद्दे और रजाइयां निकालीं और सड़क पर एक के ऊपर एक बिछा दीं। इससे एक मोटा गद्देदार कवच बन गया और ऊपर से कूदने वाले लोग सुरक्षित जमीन पर उतर सके।



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2 लाख का नुकसान, पर दिल बेफिक्र

रियाजुद्दीन ने बाद में बताया कि उन्होंने जो गद्दे बिछाए उनकी कीमत करीब 2 लाख रुपए थी। उनकी दुकान उस दिन पूरी तरह खाली हो गई। लेकिन उनके चेहरे पर मलाल नहीं था, सुकून था।



उन्होंने कहा कि इंसानियत के आगे पैसों की कोई कीमत नहीं। उनके अनुसार गद्दों की वजह से 8 से 12 लोगों की जान बची और उन्हें केवल मामूली चोटें आईं। बाप-बेटे ने सिर्फ गद्दे ही नहीं दिए, बल्कि घायलों और मृतकों को ले जाने के लिए अपनी दुकान की चादरें और रजाई के कवर भी दे दिए।



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रियाजुद्दीन का असली परिचय

रियाजुद्दीन सिविल डिफेंस में काम कर चुके हैं। इसीलिए उन्हें पता था कि आग जैसी आपात स्थिति में लोगों की जान कैसे बचाई जाती है। उनका यह अनुभव उस दिन काम आया।



उन्होंने जो बात कही वह सबके दिल को छू गई। उनके शब्द थे, मेरा 2 लाख का नुकसान हुआ तो क्या हुआ, चाहे हिंदू हो या मुस्लिम, हम सब पहले हिंदुस्तानी हैं। अपने भाइयों की मदद करना मेरा फर्ज था। इन शब्दों ने पूरे देश को एकता का संदेश दिया।



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सोशल मीडिया पर उठी मदद की मांग

इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर रियाजुद्दीन और अरमान की जमकर तारीफ हो रही है। लोग सरकार से मांग कर रहे हैं कि इस बाप-बेटे के नुकसान की भरपाई की जाए और उन्हें सम्मानित किया जाए। कुछ लोग तो उनकी मदद के लिए खुद चंदा इकट्ठा करने को भी तैयार हैं।



साथ ही एक गुस्सा भी है। लोग पूछ रहे हैं कि बिना अग्निशमन (Fire Safety) नियमों के इस होटल को कैसे चलने दिया गया? जिन अधिकारियों ने अनदेखी की, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग भी जोर पकड़ रही है। यह हादसा एक बड़ा सवाल छोड़ गया है कि क्या होटलों की सुरक्षा जांच सिर्फ कागजों पर होती है?



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यह खबर क्यों जरूरी है?

यह खबर दो अलग-अलग संदेश देती है। पहला, इंसानियत और साहस का। रियाजुद्दीन और अरमान ने बिना किसी भेदभाव के जानें बचाईं। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 51(क) हर नागरिक से यही अपेक्षा रखता है कि वह सार्वजनिक संपत्ति और मानव जीवन की रक्षा करे।



दूसरा संदेश है लापरवाही का। 21 लोगों की मौत सवाल उठाती है कि फायर सेफ्टी नियमों की अनदेखी कैसे हुई। डिजिटल और सामाजिक नैतिकता के नजरिए से यह जरूरी है कि ऐसे असली नायकों की कहानियां सामने आएं, ताकि समाज में सकारात्मक सोच बने और जिम्मेदार तंत्र पर दबाव बना रहे।



FAQ

  1. दिल्ली के मालवीय नगर होटल हादसे में कितने लोगों की मौत हुई?
    मालवीय नगर के होटल में लगी भीषण आग में कुल 21 लोगों की मौत हुई। इनमें 9 भारतीय और 12 विदेशी नागरिक शामिल थे। इसके अलावा 11 लोग घायल हुए। यह हादसा बुधवार की सुबह हुआ जब होटल में ठहरे अधिकतर लोग सो रहे थे।
  2. रियाजुद्दीन मंसूरी ने आग में लोगों की जान कैसे बचाई?
    रियाजुद्दीन और उनके बेटे अरमान ने अपनी दुकान से 20 से 22 नए गद्दे और रजाइयां निकालकर होटल के सामने सड़क पर बिछा दीं। जब लोग ऊपरी मंजिलों से कूदे तो वे इन गद्दों पर सुरक्षित उतर गए। इस कदम से 8 से 12 लोगों की जान बची और चोटें भी मामूली रहीं।

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