मंगलुरु प्रेशर कुकर ब्लास्ट: आतंकी की इस चूक से खुली गई थी ISIS की साजिश
News in Short
- मंगलुरु में 19 नवंबर 2022 को प्रेशर कुकर ब्लास्ट आतंकवादी साजिश का हिस्सा था।
- मोहम्मद शारिक ने बम के टाइमर को गलती से 9 सेकंड पर सेट किया, जिससे योजना विफल हुई।
- शारिक का ISIS से कनेक्शन था, और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क ने फंडिंग के लिए क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल किया।
- धमाके का असली निशाना मंजुनाथ स्वामी मंदिर था, लेकिन समय की चूक से नुकसान कम हुआ।
- NIA की जांच में शारिक ने गुनाह कबूल किया, और उसे 10 साल की सजा सुनाई गई।
News in detail
19 नवंबर 2022 को कर्नाटक के मंगलुरु में हुआ प्रेशर कुकर ब्लास्ट एक आतंकवादी साजिश का हिस्सा था, जिसने सुरक्षा एजेंसियों को चौंका दिया। यह धमाका कंकनाडी पुलिस स्टेशन के पास एक ऑटोरिक्शा में हुआ, जिससे एक गंभीर आपराधिक साजिश का खुलासा हुआ।
प्रारंभिक संदेह और जांच का आरंभ
शुरुआत में इस धमाके को एक गैस सिलेंडर का धमाका माना गया था। हालांकि, पुलिस ने घटनास्थल से मिले सबूतों के आधार पर इसे एक इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) की साजिश पाया। धमाके के बाद ऑटो से जो सामान मिला, उसने यह स्पष्ट कर दिया कि यह कोई हादसा नहीं, बल्कि एक सोची-समझी साजिश थी।
9 सेकंड की गलती
मोहम्मद शारिक, जो इस साजिश में शामिल था, ने बम के टाइमर को 90 मिनट के बजाय गलती से 9 सेकंड पर सेट कर दिया। यही चूक उसकी पूरी योजना के विफल होने का कारण बनी। अगर टाइमर सही होता, तो बम का प्रभाव कहीं और होता और हमले में बड़ी तबाही हो सकती थी।
ISIS कनेक्शन
मोहम्मद शारिक का कनेक्शन ISIS से था, और वह 'कर्नल' नाम के एक ऑनलाइन हैंडलर से निर्देश प्राप्त कर रहा था। इसके अलावा, एक अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क ने इसे फंडिंग के लिए क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल किया था। यह नेटवर्क भारतीय तटों पर आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने की योजना बना रहा था।
मंजुनाथ स्वामी मंदिर को निशाना बनाना
शुरुआत में यह माना गया कि शारिक का निशाना कादरी मंजुनाथ मंदिर था। लेकिन बाद में खुलासा हुआ कि असली लक्ष्य धर्मस्थल स्थित मंजुनाथ स्वामी मंदिर था। अगर धमाका वहां हुआ होता, तो बहुत बड़ा नुकसान हो सकता था, और सांप्रदायिक तनाव फैल सकता था।
साजिश के अन्य सदस्य और उनकी भूमिका
मंगलुरु प्रेशर कुकर ब्लास्ट की साजिश में शारिक अकेला नहीं था। सैयद यासीन ने बम बनाने में मदद की। माज मुनीर अहमद ने शिवमोगा में ट्रायल ब्लास्ट किया। यह सभी एक संगठित आतंकवादी नेटवर्क का हिस्सा थे।
फंडिंग और क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल
आतंकी साजिश के लिए फंडिंग भी आधुनिक तरीकों से की गई थी। क्रिप्टोकरेंसी, खासकर USDT का इस्तेमाल कर पैसे भेजे गए थे, जिन्हें म्यूल अकाउंट्स के जरिए कैश में बदला गया था।
जांच की गंभीरता और NIA का हस्तक्षेप
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंपी गई। लंबी जांच के बाद, शारिक ने अपना गुनाह कबूल किया, और 27 अप्रैल 2026 को उसे 10 साल की सजा सुनाई गई।
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