मेरठ के नीला ड्रम हत्याकांड में मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा, पति को मारकर सीमेंट में छिपाया था शव
क्या था नीला ड्रम हत्याकांड?
उत्तर प्रदेश के मेरठ में 3 मार्च 2025 की रात सौरभ राजपूत की हत्या हुई थी। यह घटना शहर के ब्रह्मपुरी इलाके में हुई थी। पुलिस जांच के मुताबिक मुस्कान (Muskan Rastogi) ने अपने पति सौरभ को खाने में बेहोशी की दवा मिलाकर दी थी। इसके बाद उसने साहिल के साथ मिलकर सौरभ पर चाकू से हमला किया था।
हत्या के बाद दोनों ने शव के टुकड़े कर दिए थे। इसके बाद शव के हिस्सों को नीले प्लास्टिक ड्रम में रखा था। पहचान छिपाने के लिए ड्रम में सीमेंट भर दिया था। इसी वजह से यह मामला नीला ड्रम हत्याकांड के नाम से चर्चित हुआ था।
हत्या के बाद हिमाचल में मजे कर रहे थे दोनों
वारदात के अगले दिन 4 मार्च को मुस्कान और साहिल हिमाचल प्रदेश चले गए थे। इस दौरान सौरभ का शव घर में रखे ड्रम में छिपा हुआ था।
मामले का खुलासा होने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की थी। पुलिस ने 18 मार्च 2025 को मुस्कान और साहिल को गिरफ्तार किया था। इसके बाद घर में रखे नीले ड्रम से सौरभ का शव बरामद किया गया था।
पुलिस ने घटनास्थल से हत्या (Saurabh Rajput Murder Case) से जुड़े सबूत जुटाए थे। जांच पूरी होने के बाद दोनों के खिलाफ अदालत में आरोपपत्र पेश किया गया था।
कोर्ट ने कब सुनाया फैसला?
मेरठ की जिला अदालत में इस मामले की सुनवाई हुई थी। अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने गवाह और सबूत पेश किए थे। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने 30 सितंबर को मुस्कान और साहिल को दोषी ठहराया था।
अदालत ने दोनों को हत्या और सबूत मिटाने का दोषी पाया था। इसके बाद सजा सुनाने के लिए 14 अक्टूबर की तारीख तय की गई थी। तय तारीख पर अदालत ने दोनों को फांसी की सजा सुनाई।
हालांकि मौत की सजा लागू होने से पहले हाई कोर्ट की पुष्टि जरूरी होगी। दोषियों के पास फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती देने का अधिकार भी है।
सजा से पहले दोनों की क्या हालत थी?
दोषी ठहराए जाने के बाद मुस्कान और साहिल के व्यवहार में बदलाव आया था। जेल प्रशासन के मुताबिक दोनों पहले से काफी कम बातचीत कर रहे थे।
मेरठ के वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश राज शर्मा ने बताया था कि दोनों तनाव में दिखाई दे रहे थे। इसे देखते हुए उनका मेडिकल परीक्षण कराया गया था। साथ ही दोनों की काउंसिलिंग भी कराई गई थी।
साहिल पिछले तीन दिनों से लगभग चुप था। वहीं मुस्कान ने पूजा-पाठ करना भी कम कर दिया था। जेल प्रशासन ने दोनों की सुरक्षा और निगरानी बढ़ा दी थी।
सजा से पहले बेटी से मिलना चाहती थी मुस्कान
सजा सुनाए जाने से पहले मुस्कान ने अपनी बड़ी बेटी पीहू से मिलने की इच्छा जताई थी। उसने जेल से अपनी बेटी को एक पत्र भी लिखा था।
पत्र में मुस्कान ने अपनी बेटियों के भविष्य को लेकर चिंता जताई थी। वह अपनी बेटी से मिलना चाहती थी। हालांकि उसकी मुलाकात हुई या नहीं, इसकी जानकारी सामने नहीं आई थी।
सजा सुनाए जाने के दौरान दोनों को जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश किया गया था।
सौरभ की मां ने की थी फांसी की मांग
सौरभ की मां रेणु राजपूत शुरुआत से ही दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग कर रही थीं। उनका कहना था कि बेटे की हत्या करने वालों को फांसी से कम सजा नहीं मिलनी चाहिए।
रेणु राजपूत ने न्याय के लिए हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक जाने की बात कही थी। अदालत के फैसले से पहले उन्होंने अपने घर पर पूजा-पाठ भी किया था।
सौरभ के परिवार के अलावा मुस्कान के परिजनों ने भी उसका साथ छोड़ दिया था। उन्होंने भी दोनों दोषियों को फांसी की सजा देने की मांग की थी।
अब आगे क्या होगा?
सत्र अदालत से मौत की सजा सुनाए जाने के बाद मामले में हाई कोर्ट की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। कानून के मुताबिक हाई कोर्ट की पुष्टि के बिना फांसी की सजा लागू नहीं की जा सकती।
हाई कोर्ट मामले के सबूतों और सजा के आधार की समीक्षा करेगा। इसके बाद मौत की सजा बरकरार रखने या उसमें बदलाव करने का फैसला हो सकता है।
दोषियों के पास ऊपरी अदालत में अपील करने का विकल्प भी रहेगा। ऐसे में सजा के अंतिम रूप से लागू होने के लिए आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी होना जरूरी है।