बच्चों की मेंटल हेल्थ के लिए मेटा लाया नए सेफ्टी फीचर्स, जानिए मेटा का नया प्लान
Parental Controls Meta: आज के दौर में सोशल मीडिया बच्चों की जिंदगी का बड़ा हिस्सा बन चुका है। इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसी ऐप्स युवाओं में बेहद पॉपुलर हैं। लेकिन इनकी लत और गलत असर से बच्चों को बचाना बड़ी चुनौती है। इसी समस्या से निपटने के लिए मेटा ने अमेरिका में बड़ा कदम उठाया है।
वाशिंगटन में अदालत की मंजूरी के बाद नए सेफ्टी रूल्स तैयार किए गए हैं। ये बदलाव 13 से 17 साल के टीनएजर्स के लिए लागू किए जाएंगे। इस फैसले का मकसद बच्चों के मेन्टल हेल्थ को सुरक्षित रखना है। उन्हें सोशल मीडिया के तनाव और लत से बचाना बेहद जरूरी हो गया है।
इसके अलावा पेरेंट्स को भी कई खास अधिकार दिए जा रहे हैं। मेटा अब बच्चों के ऐप्स में कई डिफॉल्ट रिस्ट्रिक्शन जोड़ने जा रहा है। ये सभी नए फेज्ड मैनर से ऐप अपडेट्स में दिखाई देंगे। चलिए जानें कि मेटा के इन नए नियमों से ऐप्स में क्या-क्या बदलाव आने वाले हैं।
स्कूल मोड में बंद रहेंगे सभी अलर्ट
मेटा ने बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान देने के लिए स्कूल मोड बनाया है। यह स्कूल मोड सुबह 8 बजे से दोपहर 3 बजे तक लागू रहेगा। इस टाइम जनरल पुश नोटिफिकेशन पूरी तरह म्यूट रहेंगे। बच्चों को बार-बार आने वाले मैसेज से कोई परेशानी नहीं होगी। हालांकि जरूरी सेफ्टी अलर्ट और डायरेक्ट मैसेज आते रहेंगे।
इससे बच्चे पढ़ाई के समय सोशल मीडिया से दूर रह सकेंगे। स्कूल के दिनों में ये फीचर अपने आप एक्टिव हो जाएगा। पढ़ाई के समय नोटिफिकेशन म्यूट करने से लेकर डेली टाइम लिमिट शामिल है। पेरेंट्स अब अपने बच्चों के स्क्रीन टाइम पर सीधी नजर रख सकेंगे।
हर 15 मिनट में मिलेगा ब्रेक का अलर्ट
लगातार फोन स्क्रीन देखने की आदत बच्चों के लिए नुकसानदायक है। इसे रोकने के लिए स्क्रीन-टाइम रिमाइंडर का सिस्टम लागू होगा। अगर कोई टीनेजर लगातार 15 मिनट ऐप इस्तेमाल करेगा तो अलर्ट आएगा।
इसके बाद 60 और 90 मिनट पर भी लगातार रिमाइंडर दिए जाएंगे। इन मैसेजेस का मकसद बच्चों को ऐप से ब्रेक दिलाना है। इस फीचर से स्क्रीन टाइम को कंट्रोल करने में मदद मिलेगी। बच्चे अपनी आंखों और दिमाग को आराम दे पाएंगे।
नॉन-अल्गोरिदम फीड चुनने की आजादी
सोशल मीडिया पर अल्गोरिदम बच्चों को ज्यादा से ज्यादा बांधकर रखता है। अब मेटा बच्चों को बिना अल्गोरिदम वाली ऑर्डिनरी फीड चुनने का मौका देगा। किशोर चाहें तो इस फीचर को कभी भी चुन सकते हैं।
इसके अलावा वीडियो ऑटोप्ले का ऑप्शन भी बंद किया जा सकेगा। वीडियो खुद-ब-खुद प्ले नहीं होंगे, जिससे समय की बचत होगी। बच्चे सिर्फ अपनी पसंद का कंटेंट ही देख पाएंगे। इससे रील्स और वीडियो की लत से बचाव होगा।
लाइक्स और रिएक्शन छिपाने का नियम
सोशल मीडिया पर लाइक्स की तुलना से बच्चों में तनाव बढ़ता है। मेटा ने लाइक्स और रिएक्शन की संख्या छिपाने का फैसला किया है। अब पोस्ट पर लाइक्स की नंबर बाय डिफॉल्ट नहीं दिखेगी।
इससे बच्चों के बीच पॉपुलैरिटी की तुलना खत्म हो जाएगी। दूसरों से आगे निकलने का मेन्टल प्रेशर भी काफी कम होगा। बच्चे बिना किसी चिंता के अपनी पोस्ट शेयर कर सकेंगे। ये कदम बच्चों की मेंटल हेल्थ के लिए सही है।
पेरेंट्स के हाथ में होगी सुरक्षा की चाबी
मेटा के नए सिस्टम (effects of screen time)में पेरेंट्स को ज्यादा राइट्स दिए गए हैं। पेरेंट्स अपने बच्चों के ऐप्स की सेटिंग्स में बदलाव कर सकेंगे। वे तय कर सकेंगे कि बच्चा कितनी देर ऐप चला सकता है।
कुछ सिक्योरिटी सेटिंग्स को मैंडेटरी बनाना भी पेरेंट्स के हाथ में होगा। बच्चे खुद से इन सेटिंग्स को बदल नहीं पाएंगे। इसके लिए उन्हें पेरेंट्स से परमिशन लेनी ही होगी। इससे पेरेंट्स को अपने बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा की तसल्ली रहेगी।
दो घंटे बाद अपने आप लॉक हो जाएगा ऐप
मेटा ने बच्चों के लिए टोटल यूसेज लिमिट भी तय की है। इन्स्टा और फेसबुक का कुल इस्तेमाल रोज दो घंटे तक सीमित होगा। जैसे ही दो घंटे का समय पूरा होगा, ऐप लॉक हो जाएगा।
इसके बाद बच्चे उस दिन ऐप का यूज नहीं कर पाएंगे। टाइम लिमिट बढ़ाने के लिए पेरेंट्स की परमिशन जरूरी होगी। इस नियम से बच्चों का सोशल मीडिया एडिक्शन (teenager screen time dangers) पूरी तरह रुकेगा। वे अपना समय खेलकूद और पढ़ाई में लगा सकेंगे। screen time and kids
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