क्या फिर बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल और LPG के दाम, ट्रंप के फैसले ने बढ़ाई टेंशन
समझें क्या है पूरा मामला...
- अमेरिका और ईरान के बीच जंग फिर शुरू हो गई है।
- डोनाल्ड ट्रंपके एक ऐलान के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर पहुंच गया है।
- अमेरिका ने बुधवार, 08 जुलाई को ईरान के 90 ठिकानों को निशाना बनाया।
- इससे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में रुकावट का खतरा बढ़ गया है।
- इस जंग का सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
होर्मुज स्ट्रेट क्यों अहम
मिडिल ईस्ट में तनाव की वजह से एक बार फिर कच्चा तेल दुनिया को डराने लगा है। फरवरी के आखिर से जून की शुरुआत तक चली जंग के दौरान भारत में इसका असर देखा जा चुका है।
भारत ने अपने तेल आयात में विविधता जरूर लाई है। लेकिन होर्मुज स्ट्रेट आज भी देश की सप्लाई चेन के लिए बेहद जरूरी बना हुआ है।
युद्ध शुरू होने से पहले इस समुद्री रास्ते से भारत का करीब 40 फीसदी कच्चा तेल आता था। इसके अलावा एलएनजी (LNG – Liquefied Natural Gas) का करीब 60 फीसदी हिस्सा भी यहीं से आता है।
इस रास्ते में रुकावट आते ही देश में करीब 4 साल बाद पेट्रोल-डीजल अचानक महंगा हो गया था। एलपीजी की कीमतें भी उस दौरान बढ़ गई थी।
आयात बिल बढ़ने का डर
बता दें कि भारत अपनी कुल जरूरत का करीब 85 फीसदी कच्चा तेल बाहर से मंगाता है। इतनी बड़ी निर्भरता का मतलब है कि क्रूड की अंतरराष्ट्रीय कीमतों का असर सीधे देश पर पड़ता है।
अगर होर्मुज स्ट्रेट में रुकावट आती है, तो क्रूड ऑइल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं। यह असर अभी से दिखना शुरू भी हो चुका है।
तेल महंगा होने का सीधा मतलब है भारत का इंपोर्ट बिल बढ़ना। इससे देश का चालू घाटा भी बढ़ सकता है। चालू घाटा बढ़ने पर रुपये पर दबाव बनता है, जो पूरी अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा संकेत नहीं माना जाता।
सस्ते फ्यूल की उम्मीद टूटी
पिछली बार जब यह संकट गहराया था, तो सरकारी तेल कंपनियों को भारी नुकसान झेलना पड़ा था। इसी वजह से पेट्रोल-डीजल की कीमत चार बार में करीब 7 रुपए प्रति लीटर तक बढ़ा दी गई थीं। चार साल से स्थिर रही कीमतों में यह बढ़ोतरी आम लोगों के लिए बड़ा झटका थी।
बाद में सीजफायर होने और क्रूड सस्ता होने से उम्मीद जगी थी कि आने वाले दिनों में ईंधन के दाम घट सकते हैं। लेकिन अब क्रूड ऑइल की कीमतों में फिर उछाल और होर्मुज को लेकर बढ़े तनाव ने इस उम्मीद पर पानी फेर दिया है।
महंगाई की नई मार
तेल के दाम बढ़ने का असर सीधे आम आदमी की जेब पर पड़ता है। भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में शामिल है और इसका बड़ा हिस्सा होर्मुज से ही आता है। अगर यह रास्ता बंद होता है और कीमतें और बढ़ती हैं, तो भारत को तेल आयात पर ज्यादा डॉलर खर्च करने होंगे।
इससे रुपए पर दबाव बनेगा और आयातित सामान महंगे हो जाएंगे। नतीजतन आम लोगों को महंगाई की एक और मार झेलनी पड़ सकती है। यह असर पेट्रोल-डीजल से लेकर रोजमर्रा की चीजों तक दिख सकता है।
शेयर बाजार में हलचल
ग्लोबल टेंशन बढ़ने पर निवेशक अक्सर सुरक्षित निवेश की तरफ रुख करते हैं। इससे शेयर बाजार में बिकवाली शुरू हो जाती है। बुधवार को इसका बड़ा उदाहरण देखने को मिला।
ट्रंप ने ईरान के साथ शांति वार्ता को समय की बर्बादी बताया और नई धमकियां दीं। इस बयान के आते ही भारतीय शेयर बाजार में भूचाल आ गया और बाजार क्रैश हो गया। इससे साफ है कि यह जंग सिर्फ तेल तक सीमित नहीं, बल्कि निवेशकों के लिए भी परेशानी बन सकती है।
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