डिमेंशिया से बचना है तो 40 में बदलें अपनी डाइट, बड़ी स्टडी का खुलासा
5 प्वाइंट में समझें क्या है पूरा मामला
- JAMA Neurology में छपी एक बड़ी स्टडी में 1.5 लाख से ज्यादा वयस्कों को ट्रैक किया गया।
- स्टडी में पाया गया कि 45 से 54 साल की उम्र में खाई जाने वाली डाइट याददाश्त पर सीधा असर डालती है।
- फल, सब्जियां, साबुत अनाज और मछली खाने वालों में बाद में याददाश्त कमजोर होने के संकेत कम मिले।
- DASH (Dietary Approaches to Stop Hypertension) डाइट को दिमागी सेहत के लिए सबसे फायदेमंद पाया गया।
- भारत में डिमेंशिया के मामले तेजी से बढ़ने की आशंका है, इसलिए विशेषज्ञ मिडलाइफ में ही सावधान रहने की सलाह दे रहे हैं।
40 में जो खाया, 80 में वही याद रहेगा
अगर आप चाहते हैं कि बुढ़ापे में भी दिमाग तेज रहे, तो अभी से अपनी थाली पर ध्यान देना जरूरी है। JAMA Neurology जर्नल में छपी एक बड़ी स्टडी ने यही बताया है। इस शोध में 1.5 लाख से ज्यादा वयस्कों को लंबे समय तक फॉलो किया गया।
नतीजे साफ थे- जो लोग मिडलाइफ यानी 45 से 54 साल की उम्र में बेहतर खाना खाते थे, उनकी याददाश्त और सोचने-समझने की क्षमता बाद में भी अच्छी बनी रही। फल, सब्जियां, साबुत अनाज और मछली खाने वालों में कॉग्निटिव डिक्लाइन यानी दिमागी कमजोरी के शुरुआती लक्षण कम देखे गए।
45 से 54 साल की उम्र क्यों है खास
एम्स (AIIMS - All India Institute of Medical Sciences) दिल्ली की डायटिशियन मोनिता गहलोत ने बताया कि यह उम्र दिमाग के लिए सबसे अहम होती है। इस दौर में हाई ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर में उतार-चढ़ाव, सूजन और नसों को नुकसान जैसी समस्याएं चुपचाप शुरू होने लगती हैं। ये सब मिलकर दिमाग को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाते हैं।
उन्होंने कहा, मिडलाइफ एक अहम खिड़की है क्योंकि इस उम्र में दिमाग में अभी भी बदलाव को अपनाने की क्षमता होती है। इस दौर में बनाई गई अच्छी आदतें कॉग्निटिव रिजर्व बनाती हैं और डिमेंशिया का खतरा कम या टाल सकती हैं।
DASH डाइट निकली सबसे असरदार
स्टडी में जिन डाइट पैटर्न को परखा गया, उनमें DASH डाइट का असर सबसे मजबूत रहा। यह डाइट मूल रूप से हाई ब्लड प्रेशर को काबू में करने के लिए बनाई गई थी। लेकिन नए नतीजे बताते हैं कि यह दिमाग की सेहत के लिए भी उतनी ही जरूरी है।
DASH डाइट में फल, सब्जियां, कम वसा वाले डेयरी उत्पाद, साबुत अनाज और नट्स शामिल होते हैं। नमक, चीनी और प्रोसेस्ड फूड इसमें कम किए जाते हैं।
थाली में क्या रखें, क्या छोड़ें
मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल की चीफ क्लिनिकल न्यूट्रिशनिस्ट रितिका समद्दार ने बताया कि डाइट का दिमाग पर सीधा और लंबे समय तक असर रहता है। उनके मुताबिक फल, सब्जियां, साबुत अनाज, नट्स, बीज, ऑलिव ऑयल और मछली जैसी चीजें खाना फायदेमंद है। वहीं रेड मीट, प्रोसेस्ड मीट, मैदे से बनी चीजें, शुगरी ड्रिंक्स और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड से दूरी बनाना जरूरी है।
रितिका समद्दार ने आगे कहा, एक स्वस्थ गट माइक्रोबायोम यानी पेट के अच्छे बैक्टीरिया दिमाग और मूड दोनों को सहारा देते हैं। खराब खानपान से सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ता है जो दिमाग की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाता है। ब्लड शुगर और नसों की सेहत भी दिमागी कार्यक्षमता के लिए जरूरी है।
भारत के लिए क्यों जरूरी है यह चेतावनी
स्टडी में यह भी सामने आया कि रेड मीट, प्रोसेस्ड फूड और ब्लड शुगर बढ़ाने वाली चीजें खाने से दिमागी सेहत पर बुरा असर पड़ता है। एक्सपर्ट कहते हैं कि दिमाग का बुढ़ापा काफी पहले शुरू हो जाता है। इसलिए बचाव भी मिडलाइफ से ही शुरू होना चाहिए।
भारत में डिमेंशिया के मामले आने वाले सालों में तेजी से बढ़ने का अनुमान है। ऐसे में यह स्टडी देश के लिए एक जरूरी चेतावनी है। अगर 40 की उम्र से ही खानपान पर ध्यान दिया जाए, तो बुढ़ापे में दिमाग को काफी हद तक सुरक्षित रखा जा सकता है।
FAQ
- मिडलाइफ में कौन सी डाइट दिमाग के लिए सबसे फायदेमंद मानी गई है?
AMA Neurology में छपी स्टडी के मुताबिक DASH डाइट दिमाग के लिए सबसे असरदार पाई गई। इसमें फल, सब्जियां, साबुत अनाज, नट्स, मछली और कम वसा वाले डेयरी उत्पाद शामिल होते हैं। साथ ही नमक, चीनी, रेड मीट और प्रोसेस्ड फूड कम किए जाते हैं। यह डाइट पहले सिर्फ ब्लड प्रेशर के लिए जानी जाती थी, लेकिन अब यह याददाश्त और दिमागी सेहत के लिए भी जरूरी मानी जा रही है। - क्या खाने से बुढ़ापे में याददाश्त कमजोर होने का खतरा बढ़ता है?
हां, स्टडी में पाया गया कि रेड मीट, प्रोसेस्ड मीट, मैदे से बनी चीजें, शुगरी ड्रिंक्स और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड खाने से दिमाग पर बुरा असर पड़ता है। ये चीजें शरीर में सूजन बढ़ाती हैं, ब्लड शुगर को अस्थिर करती हैं और दिमाग की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाती हैं। लंबे समय तक ऐसा खानपान डिमेंशिया और कॉग्निटिव डिक्लाइन का खतरा बढ़ाता है। - भारत में डिमेंशिया का खतरा कितना बड़ा है और इससे कैसे बचें?
विशेषज्ञों के मुताबिक भारत में आने वाले सालों में डिमेंशिया के मामले तेजी से बढ़ने वाले हैं। बुजुर्गों की बढ़ती आबादी और खराब जीवनशैली इसके बड़े कारण हैं। बचाव के लिए 45 से 54 साल की उम्र से ही खानपान सुधारना सबसे जरूरी है। फल, सब्जियां, साबुत अनाज और मछली को डाइट में शामिल करें। प्रोसेस्ड और जंक फूड से दूरी बनाएं। नियमित व्यायाम और ब्लड प्रेशर व शुगर पर नियंत्रण भी उतना ही जरूरी है।
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