मोबाइल की लत से बच्चों को बचाएगा माइनर मोड, जानें क्या है
इन दिनों सोशल मीडिया पर कई ऐसी रील्स वायरल हो रही हैं, जिनमें बच्चों की फोन की लत साफ दिखाई देती है। एक वायरल रील में 10 साल का बच्चा अपनी मां को सिर्फ इसलिए पीटता नजर आता है, क्योंकि उसने उसके हाथ से फोन ले लिया था। यह कोई अकेला मामला नहीं है। देशभर में आए दिन ऐसी घटनाएं सामने आती रहती हैं, जहां फोन की लत की वजह से बच्चे गुस्सा करने लगते हैं और कई बार उनका व्यवहार हिंसक भी हो जाता है।
बच्चों में बढ़ती इसी फोन की लत को देखते हुए केंद्र सरकार 'माइनर मोड' लाने पर विचार कर रही है। माना जा रहा है कि इससे बच्चों के फोन इस्तेमाल पर नियंत्रण रखा जा सकेगा और उनकी मोबाइल की लत कम करने में भी मदद मिलेगी।
केंद्र कर रही है विचार
इसके तहत स्मार्टफोन के इस्तेमाल पर कुछ सीमाएं तय की जा सकती हैं। आगे चलकर देश में बिकने वाले सभी स्मार्टफोन में 'माइनर मोड' देना जरूरी भी किया जा सकता है।
इस मोड के जरिए मोबाइल कंपनियों और ऐप बनाने वाली कंपनियों को बच्चों की सुरक्षा से जुड़े खास फीचर जोड़ने पड़ सकते हैं। हालांकि, पढ़ाई और इमरजेंसी में संपर्क करने जैसी जरूरी सुविधाएं चालू रहेंगी।
माता-पिता कर सकेंगे नियंत्रित
माइनर मोड के जरिए माता-पिता बच्चों के फोन इस्तेमाल को नियंत्रित कर सकेंगे। वे तय कर सकेंगे कि उनका बच्चा कितनी देर फोन इस्तेमाल कर सकता है। इसके साथ ही फोन का स्क्रीन टाइम भी तय किया जा सकेगा।
माता-पिता सोशल मीडिया के ज्यादा इस्तेमाल को भी नियंत्रित कर सकेंगे। इसके अलावा बच्चों के लिए हानिकारक ऐप्स के इस्तेमाल पर रोक लगाई जा सकेगी।
क्या है माइनर मोड
माइनर मोड फोन में मिलने वाला एक खास सेफ्टी फीचर है। इसका मकसद बच्चों के मोबाइल और सोशल मीडिया इस्तेमाल पर नियंत्रण रखना है। भारत सरकार भी इस तरह का फीचर लागू करने पर विचार कर रही है, ताकि बच्चों में बढ़ती फोन की लत को कम किया जा सके।
माइनर मोड के मुख्य फीचर्स
यदि यह मोड फोन में लागू होता है, तो इसमें कई तरह की पाबंदियां और फीचर्स देखने को मिल सकते हैं।
स्क्रीन टाइम पर लॉक:उम्र के हिसाब से बच्चों के लिए रोजाना screen time and kids फोन इस्तेमाल करने का समय तय किया जा सकेगा। उदाहरण के लिए, एक या दो घंटे की समय सीमा तय की जा सकती है। समय सीमा खत्म होने के बाद संबंधित ऐप्स बंद हो सकते हैं।
नाइट कर्फ्यू:रात के समय बच्चों के इंटरनेट और ऐप्स के इस्तेमाल पर रोक लगाई जा सकती है। इसके लिए रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक का समय तय किया जा सकता है।
कंटेंट फिल्टरिंग:screen time and kids उनकी उम्र के अनुकूल कंटेंट दिखाने की व्यवस्था हो सकती है। हानिकारक, एडल्ट या हिंसक कंटेंट को फिल्टर किया जा सकेगा।
ऐप डाउनलोड पर रोक:बच्चे माता-पिता की अनुमति के बिना नया ऐप या गेम डाउनलोड नहीं कर सकेंगे।
इन ऐप्स में मौजूद हैं ऐसे फीचर्स
भारत सरकार अभी माइनर मोड लाने पर विचार कर रही है। हालांकि, अगर आप अपने बच्चों की फोन की लत को कम करना चाहते हैं, तो मौजूदा समय में भी कुछ टूल्स और फीचर्स का इस्तेमाल कर सकते हैं।
Google Family Link:एंड्रॉइड फोन के लिए गूगल का यह पैरेंटल कंट्रोल टूल है। इसकी मदद से माता-पिता बच्चे के स्क्रीन टाइम और ऐप्स के इस्तेमाल को नियंत्रित कर सकते हैं।
Digital Wellbeing (Android):फोन की सेटिंग्स में मौजूद इस फीचर की मदद से किसी भी ऐप, जैसे यूट्यूब या गेम्स, के इस्तेमाल के लिए रोजाना की समय सीमा तय की जा सकती है।
Screen Time (iPhone/iOS):अगर बच्चा आईफोन इस्तेमाल करता है, तो सेटिंग्स में जाकर 'Screen Time' फीचर की मदद से ऐप्स, कंटेंट और डाउनलोड को नियंत्रित किया जा सकता है।
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