मोदी मैजिक से बीजेपी का बढ़ा कुनबा, 1700 से अधिक विधायकों के साथ 22 राज्यों में भगवा का परचम
भारतीय राजनीति के कैनवास पर पिछले एक दशक में जो बदलाव आए हैं, उसने सत्ता के समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया है। 2014 के बाद से देश की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू हुआ है। इसे आज दुनिया मोदी मैजिक (Modi Magic) के नाम से जानती है।
ताजा आंकड़ों और चुनावी नतीजों के बाद अब देश के 31 में से 22 राज्यों में भाजपा या एनडीए (NDA) की सरकारें काबिज हैं। 1700 से अधिक विधायकों की फौज के साथ बीजेपी ने न केवल अपना कुनबा बढ़ाया है, बल्कि उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक अपनी जड़ों को मजबूत किया है।
2013 से 2026: शून्य से शिखर तक का सफर
राजनीति में समय का पहिया कितनी तेजी से घूमता है, इसे बीजेपी के उदय से समझा जा सकता है। 13 सितंबर 2013 को जब भाजपा संसदीय बोर्ड ने नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया था, तब पार्टी की पकड़ कुछ ही राज्यों तक सीमित थी।
कई राज्यों में तो संगठन की स्थिति नगण्य थी। वहीं, 2014 के बाद तस्वीर बदली। 04 मई 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, बीजेपी और उसके सहयोगियों का शासन अब देश के 72 प्रतिशत क्षेत्रफलऔर 78 प्रतिशत आबादी पर है।
बंगाल से ओडिशा तक मिली जीत
बीजेपी ने उन क्षेत्रों में भी अपनी जमीन तैयार की है जहां कभी उसे बाहरी माना जाता था। ओडिशा में सत्ता हासिल करने के बाद, अब पश्चिम बंगाल की 207 सीटों पर मिली ऐतिहासिक जीत ने विपक्ष को पूरी तरह पस्त कर दिया है।
बंगाल जैसे राज्य में, जहां पार्टी कार्यकर्ताओं को भारी संघर्ष और बलिदान देना पड़ा, वहां ममता बनर्जी की विदाई और भगवा का लहराना मोदी नीति की बड़ी जीत मानी जा रही है।
विधायकों की संख्या में भारी उछाल
यदि हम संख्या बल की बात करें, तो प्रधानमंत्री मोदी के शपथ लेने से पहले सितंबर 2013 तक देश भर में बीजेपी विधायकों (MLAs) की कुल संख्या महज 773 थी। वहीं, 04 मई 2026 की मतगणना के रुझानों और नतीजों को मिलाकर यह संख्या अब 1798 तक पहुंच गई है। हालांकि पांच राज्यों के अंतिम आंकड़े अभी घोषित होने बाकी हैं। इससे इस संख्या में और भी इजाफा होने की संभावना है। उत्तर प्रदेश (257 सीटें) और गुजरात (161 सीटें) जैसे बड़े राज्यों में भाजपा का दबदबा बरकरार है।
छोटे राज्यों से बड़े बदलाव की गूंज
मोदी लहर का असर केवल बड़े राज्यों तक सीमित नहीं रहा। पूर्वोत्तर भारत (North-East India) के राज्यों जैसे अरुणाचल प्रदेश में सीटों की संख्या तीन से बढ़कर 46 हो गई, वहीं त्रिपुरा में शून्य से 32 तक का सफर तय किया गया। दक्षिण में भी पैठ बढ़ी है; आंध्र प्रदेश में जहां 2013 में मात्र दो सीटें थीं, अब वहां आठ सीटें हैं। मणिपुर (36 सीटें) और असम (82 सीटें) में भी पार्टी ने अभूतपूर्व मजबूती दिखाई है। जम्मू-कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक बीजेपी ने अपनी सांगठनिक शक्ति का लोहा मनवाया है।
विपक्ष के लिए आत्ममंथन का समय
इस भारी चुनावी सफलता ने विपक्षी खेमे में खलबली मचा दी है। पीएम मोदी ने राज्यों की राजनीति के लिए विकास और सुशासन (Governance) का जो नया मॉडल पेश किया, उसने पारंपरिक जातिगत समीकरणों को ध्वस्त कर दिया है। हरियाणा, राजस्थान, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में बीजेपी का निरंतर मजबूत होना यह दर्शाता है कि जनता का भरोसा 'मोदी गारंटी' पर अडिग है।
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