मुंबई में आरएसएस चीफ मोहन भागवत का बड़ा बयान, बोले- धर्म संकट में पड़ा तो देश भुगतेगा खामियाजा
राष्ट्र और धर्म अलग नहीं : मोहन भागवत
मुंबई में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत बोले, राष्ट्र और धर्म अलग नहीं हैं। मौका था ऑल इंडिया विहार सेवा ग्रुप के 14वें वार्षिक सम्मेलन का। भागवत के मुताबिक राष्ट्र कमजोर होता है तो धर्म पर खतरा आता है। सम्मेलन में संघ के कार्यकर्ताओं और छात्रों ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया। भागवत ने समर्पण, राष्ट्र और धर्म पर अपनी बात रखी।
राष्ट्र और धर्म पर क्या कहा?
“हमारी परंपरा में राष्ट्र और धर्म अलग नहीं हैं। राष्ट्र का उद्देश्य धर्म है और धर्म राष्ट्र की सेवा के लिए है। दोनों आपस में जुड़े हुए हैं।”
– मोहन भागवत, प्रमुख, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस – RSS)
Nation and religion के रिश्ते पर भागवत का जोर साफ था। उन्होंने कहा कि एक न हो तो दूसरा भी नहीं हो सकता। दोनों को सही तरीके से साथ आगे ले जाना हमारी जिम्मेदारी है।
धर्म पर खतरा कब आता है?
भागवत ने दोनों तरफ का असर गिनाया। जब राष्ट्र कमजोर होता है, तब धर्म पर खतरा आता है। जब धर्म का अभ्यास कमजोर पड़ता है, तब राष्ट्र का पतन होता है। भागवत ने पढ़ाई को समर्पित युवा छात्रों का भी जिक्र किया। उनके अनुसार ज्ञान परंपरा की रक्षा के लिए समय निकालना राष्ट्रीय कार्य है। यह धर्म का कार्य भी है।
मोहन भागवत का बयान, कर्म पर जोर
भागवत ने कहा, राष्ट्र और धर्म को व्यवहार में अपनाने की कोशिश करें। अगर यह कर्मों से दिखा सकें, तो वही काफी है। भागवत ने संघ का उदाहरण दिया। उनके मुताबिक संघ में भी लाखों लोग बिना कुछ मांगे समय और पैसा लगाते हैं।
समर्पण पर संघ प्रमुख की सीख
भागवत ने समर्पण का महत्व भी समझाया। उनके मुताबिक नेक या पवित्र उद्देश्य का समर्पण जीवन को स्वर्ग बना सकता है।
भागवत ने किसे भाग्यशाली बताया?
सम्मेलन में मौजूद लोगों से उन्होंने कहा कि आप भाग्यशाली हैं। ऐसे उद्देश्य के लिए खुद को समर्पित करने का बुलावा आपको मिला है। नहीं तो ऐसा सार्थक काम खोजने में कई जन्मों की तपस्या लगती है। उन्होंने यह भी कहा कि शायद पिछले किसी जन्म में आपने ऐसा किया होगा।
ज्ञान परंपरा पर क्या बोले भागवत?
RSS chief Mohan Bhagwat ने दुनिया के हालात पर बात की। उनके मुताबिक हर खुशी अधूरी रहती है। हर आकांक्षा के साथ कोई नुकसान जुड़ा होता है। उन्होंने कहा कि हर निष्ठा किसी दूसरी निष्ठा से टकराती है। अतिवाद है, संतुलन नहीं है, कोई मध्यम मार्ग नहीं है। इसीलिए दुनिया परेशान है।
भारत ने 3,000 साल तक क्या किया?
भागवत ने कहा, दुनिया जानती है कि आगे का रास्ता भारत से आएगा। उनके मुताबिक करीब 3,000 साल तक भारत ने किसी देश को नहीं जीता। न किसी का धर्म बदलवाया, न किसी पर हमला किया। इसी वजह से दुनिया को भारत से उम्मीदें हैं।
भागवत की स्पीच की चार बड़ी बातें
इस RSS Mohan Bhagwat speech में चार बातें साफ उभरीं। पहली, भारत ने दूसरे देशों पर कब्जा किए बिना ज्ञान दुनिया से साझा किया। दूसरी, भारत के पास वेद, उपनिषद, रामायण, महाभारत और गीता जैसी ज्ञान परंपरा है।
इसमें जैन आगम, त्रिपिटक, गुरु ग्रंथ साहिब और संतों की शिक्षाएं भी शामिल हैं। तीसरी, भक्ति की शक्ति से ईश्वर के करीब पहुंचा जा सकता है। चौथी, ज्ञान को आगे बढ़ाने वालों को बचाना सिर्फ धार्मिक जिम्मेदारी नहीं है। भागवत के मुताबिक यह मानवता की सेवा भी है। भागवत के मुताबिक ज्ञान के रक्षक पूरी मानव जाति का भविष्य सुरक्षित करते हैं।
सम्मेलन में कौन पहुंचा, क्या रहा?
सम्मेलन ऑल इंडिया विहार सेवा ग्रुप का 14वां वार्षिक आयोजन था। मुंबई में हुए इस आयोजन में संघ के कार्यकर्ता और छात्र बड़ी संख्या में पहुंचे। इसी मंच से भागवत ने समर्पण और ज्ञान परंपरा की बात रखी।
यह खबर क्यों जरूरी है: संघ प्रमुख का यह बयान सार्वजनिक बहस के कई विषयों को छूता है। इसमें राष्ट्र, धर्म, समर्पण और सेवा जैसे मुद्दे एक साथ आए हैं। भारत का संविधान हर नागरिक को धर्म मानने की आजादी देता है। सवाल यह भी है कि पाठक राष्ट्र और धर्म के रिश्ते को कैसे देखते हैं। इसलिए बयान को पूरे संदर्भ के साथ समझना जरूरी है। बयान में दिए गए हर दावे का स्रोत भागवत का भाषण है।
आज यानी 2 अक्टूबर से एमपी दौरे पर रहेंगे भागवत
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत 2 से 6 अक्टूबर तक मध्य प्रदेश में रहेंगे। वे नागपुर से सड़क मार्ग से इंदौर पहुंचेंगे। इंदौर में 3 से 5 अक्टूबर तक संघ की वार्षिक अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल बैठक होगी, जिसमें सभी 46 प्रांतों के पदाधिकारी शामिल होंगे। संघ शताब्दी वर्ष की यह आखिरी अहम संगठनात्मक बैठक है। इसके बाद भागवत 6 अक्टूबर को बालाघाट जाएंगे।
मोहन भागवत का मध्यप्रदेश दौरा: पूरा कार्यक्रम
बता दें कि एमपी में मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) का कार्यक्रम पांच दिन का है। उनका प्रवास 2 अक्टूबर से शुरू होकर 6 अक्टूबर को खत्म होगा । इस बीच संघ प्रमुख दो जगहों पर रहेंगे: इंदौर और बालाघाट।
जानकारी के अनुसार मोहन भागवत का मप्र दौरा (Mohan Bhagwat MP Visit) नागपुर से शुरू होगा। वे सड़क मार्ग से इंदौर पहुंचेंगे। वहां तीन दिन तक संघ की बैठक चलेगी। पांच दिन के प्रवास में तीन दिन इंदौर की बैठक के नाम हैं। साथ ही 6 अक्टूबर बालाघाट के नाम है। नागपुर से इंदौर का सड़क सफर इन दोनों से पहले होगा।