मानसून की धमाकेदार एंट्री, 16 साल बाद बना ये रिकॉर्ड, एमपी समेत कई राज्यों को अलर्ट जारी
भारत के मौसम विभाग (India Meteorological Department - IMD) ने शनिवार को ऐलान किया कि दक्षिण-पश्चिम मानसून (Southwest Monsoon) ने केरल (Kerala) में दस्तक दे दी है। यह आगमन इस बार 1 जून की निर्धारित तिथि से 8 दिन पहले हुआ है, जो पिछले 16 वर्षों में सबसे जल्दी मानसून पहुंचने का रिकॉर्ड है। मौसम विभाग के अनुसार, यह 2009 और 2001 के बाद पहली बार हुआ है कि मानसून इतनी जल्दी केरल पहुंचा हो।
इतिहास और वर्तमान स्थिति
1918 में केरल में सबसे जल्दी मानसून पहुंचा था, तब यह 11 मई को था, जो अब तक का रिकॉर्ड है। वहीं 1972 में सबसे देरी से 18 जून को मानसून आया था। पिछले 25 वर्षों में सबसे ज्यादा देरी 2016 में हुई थी, जब मानसून 9 जून को पहुंचा था।
मौसम विभाग ने बताया कि पिछले चार दिनों से मानसून लगभग 40-50 किलोमीटर दूर अटका हुआ था, लेकिन शुक्रवार शाम इसे आगे बढ़ते देखा गया। आज यह तमिलनाडु और कर्नाटक के कई इलाकों में प्रवेश कर सकता है। अगले एक सप्ताह में दक्षिणी और पूर्वोत्तर भारत के अधिकांश हिस्सों में मानसून फैल जाएगा। 4 जून तक मानसून मध्य और पूर्वी भारत तक पहुंचने की संभावना है।
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8 राज्यों में आंधी-बारिश की चेतावनी
मौसम विभाग की जानकारी के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून पिछले चार दिनों से देश से लगभग 40-50 किलोमीटर दूर अटका हुआ था, लेकिन शुक्रवार शाम को यह आगे बढ़ा। आज यह तमिलनाडु और कर्नाटक के कई क्षेत्रों में प्रवेश करने की संभावना है। अगले एक सप्ताह में यह मानसून देश के दक्षिणी और पूर्वोत्तर राज्यों तक फैल सकता है। 4 जून तक मानसून मध्य और पूर्वी भारत तक पहुँचने की उम्मीद है।
मौसम विभाग ने दो प्रमुख रेड अलर्ट जारी किए :
- भारी बारिश का अलर्ट: गुजरात, गोवा, महाराष्ट्र, कर्नाटक और केरल के तटीय इलाकों में 200 मिमी तक बारिश होने की संभावना।
- भीषण गर्मी का अलर्ट: राजस्थान के पश्चिमी हिस्से में 27 मई तक तेज़ गर्म हवाओं के कारण रेड अलर्ट जारी है। जैसलमेर में शुक्रवार को तापमान 48 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा।
देश के कुल 28 राज्यों में आंधी-बारिश की चेतावनी जारी है, जिससे किसानों और आम जनता को सतर्क रहने की जरूरत है।
मध्यप्रदेश में जल्द आएगा मानसून
किसानों के लिए एक बड़ी खुशखबरी
मानसून के समय से पहले आने से कृषि क्षेत्र में उत्साह बढ़ गया है, क्योंकि यह भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। सही समय पर बारिश होने से न केवल भूजल स्तर में सुधार होता है, बल्कि जलाशयों में भी भराव होता है, जिससे खरीफ फसलों जैसे धान, दलहन, तिलहन, कपास और सब्जियों की समय पर बुवाई संभव हो पाती है। यह प्रक्रिया खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण परिवारों की आमदनी दोनों के लिए फायदेमंद साबित होती है। मौसम विशेषज्ञों ने पहले ही इस बात का संकेत दिया था कि इस बार मानसून की शुरुआत बेहतर होगी, लेकिन असली असर इस बात पर निर्भर करेगा कि आने वाले हफ्तों में मानसून पूरे देश में कितनी निरंतरता और समरूपता के साथ फैलता है। इसलिए, कृषि की समृद्धि के लिए मानसून के सही समय पर और नियमित रूप से बरसने की अहमियत सबसे ज्यादा है।
पहले कब-कब पहुंचा मॉनसून
| वर्ष | मानसून आगमन तिथि (केरल) | टिप्पणी |
|---|---|---|
| 1918 | 11 मई | सबसे जल्दी आगमन |
| 2001 | 23 मई | पिछले 16 वर्षों में जल्दी |
| 2009 | 23 मई | पिछले 16 वर्षों में जल्दी |
| 2016 | 9 जून | पिछले 25 वर्षों में देरी |
| 1972 | 18 जून | सबसे देरी |
| 2025 | 23 मई | इस साल सबसे जल्दी |
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