मध्य प्रदेश में बढ़ी ठंड, राजस्थान में बारिश का अलर्ट, छत्तीसगढ़ में चक्रवाती तूफान का खतरा!

Sourabh Bhatnagar | Sootr Creatives | Oct 24, 2026, 07:43 IST
मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में बदला मौसम, बारिश और ठंड का अलर्ट
मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में मौसम के तीन अलग-अलग रंग दिख रहे हैं। मध्य प्रदेश में बारिश थमने के बाद ठंड बढ़ने लगी है। राजस्थान में पश्चिमी विक्षोभ ने मौसम बदलने के संकेत दिए हैं। बीकानेर से चूरू तक बारिश और तेज हवाओं के आसार हैं। छत्तीसगढ़ में बंगाल की खाड़ी से बड़ा खतरा मंडरा रहा है। यहां 27 अक्टूबर से बारिश शुरू हो सकती है।

MP Weather Update

मध्य प्रदेश में अब रात की ठंडक बढ़ने लगी है। प्रदेश के कई जिलों में बारिश का दौर थम गया है। मौसम विभाग ने अगले चार दिनों तक आंधी-बारिश का अलर्ट जारी नहीं किया है। इस दौरान रात के तापमान में गिरावट आ सकती है। अनूपपुर जिले के अमरकंटक में न्यूनतम तापमान 13 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। यह इस सीजन का सबसे कम तापमान है। मौसम विभाग के मुताबिक आने वाले दिनों में ठंड और बढ़ सकती है।



आठ दिन बाद बारिश का दौर थमा

मध्य प्रदेश के पश्चिमी हिस्से में पिछले आठ दिनों से बारिश हो रही थी। अब यह सिलसिला थम गया है। मौसम विभाग ने अगले चार दिनों के लिए कोई चेतावनी जारी नहीं की है। हालांकि अक्टूबर के आखिरी सप्ताह में फिर बारिश होने की संभावना है।



पिछले दिनों चक्रवाती सिस्टम का असर इंदौर और उज्जैन संभाग में ज्यादा रहा। भोपाल और नर्मदापुरम संभाग के कई जिलों में भी बारिश हुई। कुछ जगह तेज बारिश हुई तो कहीं हल्की बूंदाबांदी देखने को मिली।



दूसरी तरफ जबलपुर और रीवा संभाग में मौसम साफ रहा। शहडोल संभाग के कई इलाकों में भी धूप खिली रही।



शुक्रवार को इन जिलों में बदला मौसम

शुक्रवार को इंदौर संभाग के कई जिलों में मौसम बदला रहा। आलीराजपुर और धार में बादल छाए रहे। बड़वानी और खरगोन में भी मौसम का असर दिखाई दिया।



बुरहानपुर और खंडवा में भी मौसम बदला रहा। हरदा और बैतूल में कहीं बादल छाए तो कहीं बूंदाबांदी हुई।



पश्चिमी मध्य प्रदेश में पिछले कुछ दिनों से लगातार मौसम बदल रहा था। अब बारिश कम होने के साथ रात में ठंडक बढ़ रही है।



अमरकंटक में तापमान 13 डिग्री पहुंचा

प्रदेश में इस सीजन पहली बार न्यूनतम तापमान 13 डिग्री तक पहुंचा है। अनूपपुर जिले के अमरकंटक में सबसे कम तापमान दर्ज किया गया।



कटनी के करौंदी में न्यूनतम तापमान 13.1 डिग्री सेल्सियस रहा। दमोह में रात का तापमान 14.5 डिग्री दर्ज हुआ। शाजापुर में न्यूनतम तापमान 15.6 डिग्री रहा।



नीमच के मरुखेड़ा में पारा 15.8 डिग्री तक पहुंच गया। रीवा और उमरिया में भी न्यूनतम तापमान 15.8 डिग्री दर्ज हुआ।



मौसम विभाग के मुताबिक रात का तापमान और नीचे जा सकता है। आने वाले दिनों में इसमें दो से तीन डिग्री की गिरावट संभव है।



दिन में भी तापमान गिरने लगा

प्रदेश में रात के साथ दिन का तापमान भी कम हो रहा है। कई शहरों में अधिकतम तापमान एक से दो डिग्री तक गिरा है।



खजुराहो और रतलाम में अधिकतम तापमान 35 डिग्री से नीचे रहा। गुना और खरगोन में भी दिन का तापमान कम दर्ज हुआ।



भोपाल और खंडवा में अधिकतम तापमान 35 डिग्री से नीचे है। छतरपुर और ग्वालियर में भी यही स्थिति रही।



बालाघाट और राजगढ़ में भी दिन का तापमान कम रहा। उज्जैन और मंडला में भी तापमान 35 डिग्री से नीचे दर्ज हुआ। सागर में भी अधिकतम तापमान इसी स्तर से नीचे रहा।



MP Weather Update के मुताबिक आने वाले दिनों में तापमान और गिर सकता है। इससे सुबह और रात के समय ठंडक बढ़ने की संभावना है।



अक्टूबर के आखिरी सप्ताह में फिर बारिश

मौसम विभाग ने अक्टूबर के आखिरी सप्ताह में दोबारा बारिश की संभावना जताई है। नए मौसम सिस्टम का असर प्रदेश के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में दिखाई दे सकता है।



इस दौरान कुछ जिलों में बारिश हो सकती है। दूसरी तरफ रात के तापमान में भी गिरावट जारी रहने का अनुमान है।



यानी अक्टूबर के आखिरी दिनों में ठंड और बारिश दोनों का असर दिखाई देगा। फिलहाल अगले चार दिनों तक आंधी-बारिश का कोई अलर्ट नहीं है।



तीन अक्टूबर को लौट गया था मानसून

मध्य प्रदेश से दक्षिण-पश्चिम मानसून तीन अक्टूबर को विदा हो गया था। खास बात यह रही कि पूरे प्रदेश से एक ही दिन में मानसून लौटा।



मानसून की विदाई के बाद भी बारिश का सिलसिला पूरी तरह नहीं रुका। नए मौसम सिस्टम बनने से कई जिलों में बारिश होती रही।



पिछले एक सप्ताह में पूर्वी और पश्चिमी मध्य प्रदेश में मौसम बदला। कई जिलों में आंधी और तेज बारिश का असर देखा गया।



मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के मुताबिक अक्टूबर में मौसम अक्सर बदलता है। पिछले दस वर्षों के आंकड़े भी यही बताते हैं।



अक्टूबर में कभी गर्मी तो कभी बारिश का असर रहता है। इसी महीने रात में ठंडक भी बढ़ने लगती है।



इस बार भी प्रदेश में ऐसा ही मौसम देखने को मिल रहा है। अक्टूबर की शुरुआत में आसमान साफ रहा और धूप निकली। इसके बाद कई जिलों में बारिश होने लगी।



इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून प्रदेश में करीब 100 दिन तक सक्रिय रहा।



इस साल सामान्य से चार प्रतिशत कम बारिश

इस बार मध्य प्रदेश में मानसून के दौरान सामान्य से कम बारिश हुई। जून से सितंबर के बीच प्रदेश में कुल 908.4 मिलीमीटर पानी गिरा।



यह बारिश लगभग 35.8 इंच के बराबर है। प्रदेश में मानसून की सामान्य बारिश 949.5 मिलीमीटर मानी जाती है। यह करीब 37.3 इंच होती है।



इस हिसाब से प्रदेश में करीब 1.5 इंच कम बारिश हुई। कुल बारिश सामान्य के मुकाबले लगभग चार प्रतिशत कम रही।



MP Monsoon Rainfall के आंकड़ों में पूर्वी और पश्चिमी हिस्से में अंतर रहा। पूर्वी मध्य प्रदेश में सामान्य से चार प्रतिशत ज्यादा बारिश दर्ज हुई।



वहीं पश्चिमी मध्य प्रदेश में सामान्य से 12 प्रतिशत कम बारिश हुई।



पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश की स्थिति

प्रदेश के पूर्वी हिस्से में जबलपुर और रीवा संभाग आते हैं। सागर और शहडोल संभाग भी इसी हिस्से में शामिल हैं।



इस क्षेत्र में कुल बारिश सामान्य से चार प्रतिशत ज्यादा रही। कई जिलों में बारिश का कोटा पूरा हो चुका है।



हालांकि कुछ जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज हुई। इनमें बालाघाट और छिंदवाड़ा शामिल हैं।



दमोह और जबलपुर में भी बारिश कम हुई। नरसिंहपुर और पांढुर्णा में भी यही स्थिति रही।



रीवा और सागर में भी बारिश सामान्य से कम रही। सिवनी में भी बारिश का आंकड़ा सामान्य से नीचे रहा।



इन जिलों में सामान्य के मुकाबले पांच से 21 प्रतिशत तक कम बारिश हुई है।



पश्चिमी हिस्से में ज्यादा बारिश की कमी

पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई जिलों में इस बार बारिश कम हुई। आलीराजपुर और अशोकनगर में सामान्य से कम पानी गिरा।



बड़वानी और बैतूल में भी बारिश का आंकड़ा कम रहा। देवास और धार में भी सामान्य से कम बारिश हुई।



हरदा और इंदौर में भी बारिश की कमी दर्ज हुई। झाबुआ और खंडवा में भी यही स्थिति रही।



मंदसौर और मुरैना में भी सामान्य से कम पानी गिरा। नर्मदापुरम और नीमच में भी बारिश का आंकड़ा कम रहा।



रायसेन और रतलाम में भी बारिश सामान्य से नीचे रही। सीहोर और शाजापुर में भी कमी दर्ज हुई।



उज्जैन और विदिशा में भी सामान्य से कम बारिश हुई। इन जिलों में बारिश की कमी नौ से 51 प्रतिशत तक रही।



इन 25 जिलों में बारिश का कोटा पूरा

प्रदेश के 25 जिलों में इस बार बारिश का कोटा पूरा हो गया। इनमें भोपाल और राजगढ़ शामिल हैं।



बुरहानपुर और खरगोन में भी बारिश का कोटा पूरा हुआ। कटनी और मंडला भी इस सूची में शामिल हैं।



डिंडौरी और ग्वालियर में भी पर्याप्त बारिश दर्ज हुई। गुना और दतिया में भी कोटा पूरा हो गया।



पन्ना और छतरपुर में भी बारिश का आंकड़ा पूरा हुआ। टीकमगढ़ और निवाड़ी भी इस सूची में हैं।



मैहर और आगर-मालवा में भी कोटा पूरा हुआ। भिंड और श्योपुर में भी पर्याप्त बारिश दर्ज हुई।



सिंगरौली और सीधी में भी बारिश का कोटा पूरा हो गया। सतना और मऊगंज में भी यही स्थिति रही।



शहडोल और उमरिया में भी कोटा पूरा हो चुका है। अनूपपुर भी इन 25 जिलों में शामिल है।



प्रदेश के 30 जिलों में कम बारिश

प्रदेश के 30 जिलों में मानसून के दौरान सामान्य से कम बारिश दर्ज हुई। इनमें नरसिंहपुर और दमोह शामिल हैं।



बालाघाट और अशोकनगर में भी बारिश कम हुई। मुरैना और मंदसौर भी इस सूची में शामिल हैं।



खंडवा और बड़वानी में भी सामान्य से कम पानी गिरा। नीमच और जबलपुर में भी बारिश कम रही।



रीवा और सागर में भी सामान्य से कम बारिश हुई। देवास और सिवनी में भी यही स्थिति रही।



सीहोर और शिवपुरी में भी बारिश का आंकड़ा कम रहा। रायसेन और छिंदवाड़ा में भी कमी दर्ज हुई।



विदिशा और शाजापुर में भी सामान्य से कम बारिश हुई। पांढुर्णा और इंदौर में भी बारिश कम रही।



उज्जैन और बैतूल में भी सामान्य से कम पानी गिरा। हरदा और नर्मदापुरम में भी यही स्थिति रही।



रतलाम और झाबुआ में भी बारिश कम दर्ज हुई। धार और आलीराजपुर भी इस सूची में शामिल हैं।



जून में कम बारिश का असर पूरे मानसून पर पड़ा

मौसम विभाग के मुताबिक इस बार जून में बारिश कम हुई थी। जून महीने में सामान्य से 14 प्रतिशत कम पानी गिरा।



जुलाई की शुरुआत में तेज बारिश होने से आंकड़ा बढ़ा। इसके बाद मानसून दो बार कमजोर पड़ा।



इस दौरान कई दिनों तक बारिश नहीं हुई। मानसून के आखिरी सप्ताह में फिर मजबूत सिस्टम सक्रिय हुआ।



इस सिस्टम से कई जिलों में अच्छी बारिश हुई। इसके बावजूद पहले की कमी पूरी नहीं हो सकी।



जून की कमी के बाद जुलाई में भी बारिश का असर रहा। हालांकि जुलाई का आखिरी आंकड़ा सामान्य कोटे तक पहुंच गया।



अगस्त और सितंबर में भी बारिश का मासिक कोटा पूरा हुआ। फिर भी जून में हुई कमी की भरपाई नहीं हो सकी।



इसी वजह से पूरे मानसून सीजन में चार प्रतिशत कम बारिश दर्ज हुई।



अगले दिनों में कैसा रहेगा मौसम?

मौसम विभाग के अनुसार फिलहाल प्रदेश में बारिश की गतिविधियां कम हो गई हैं। अगले चार दिनों तक आंधी और बारिश का कोई अलर्ट नहीं है।



इस बीच न्यूनतम तापमान में दो से तीन डिग्री की गिरावट हो सकती है। दिन के तापमान में भी कमी आने का अनुमान है।



MP Temperature Update के मुताबिक प्रदेश में रात की ठंडक बढ़ने के संकेत हैं। अमरकंटक में तापमान 13 डिग्री पहुंचने से इसका असर साफ दिख रहा है।



अक्टूबर के आखिरी सप्ताह में नया सिस्टम सक्रिय होने की संभावना है। इससे प्रदेश के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में दोबारा बारिश हो सकती है। इस दौरान रात में ठंडक भी बनी रह सकती है।




राजस्थान मौसम अपडेट

अक्टूबर का आखिरी सप्ताह चल रहा है। इसके बावजूद राजस्थान में दिन में गर्मी का असर बना हुआ है। कई जिलों में तेज धूप निकल रही है। लोगों को दोपहर में गर्मी महसूस हो रही है।



दूसरी तरफ सुबह और रात में हल्की ठंडक बढ़ने लगी है। अब पश्चिमी विक्षोभ के कारण मौसम में फिर बदलाव होने की संभावना है।



मौसम विभाग के मुताबिक 24 अक्टूबर को नया पश्चिमी विक्षोभ असर दिखा सकता है। इससे उत्तरी और पश्चिमी राजस्थान के कुछ जिलों में बारिश हो सकती है।



इस दौरान आसमान में बादल छाए रह सकते हैं। कुछ जगह मेघगर्जन के साथ तेज हवाएं भी चल सकती हैं।



इन चार जिलों में बारिश के आसार

मौसम विज्ञान केंद्र जयपुर के मुताबिक बीकानेर संभाग में मौसम बदल सकता है। श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ में हल्की बारिश होने के आसार हैं।



चूरू और बीकानेर में भी बादल छा सकते हैं। इन जिलों में कुछ स्थानों पर मेघगर्जन की संभावना है।



बारिश के दौरान तेज हवाएं भी चल सकती हैं। हवाओं की रफ्तार 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।



Rajasthan Weather Update के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ का असर सीमित इलाकों में रहेगा। पूरे प्रदेश में बारिश होने की संभावना नहीं है।



जोधपुर संभाग के कुछ इलाकों में भी मौसम बदल सकता है। हालांकि व्यापक स्तर पर भारी बारिश का अनुमान नहीं है।



सीकर और झुंझुनूं में भी बदल सकता है मौसम

राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र में भी मौसम बदलने के संकेत हैं। सीकर और झुंझुनूं में बादलों की आवाजाही हो सकती है।



इन जिलों के कुछ इलाकों में हल्की बारिश के आसार हैं। पश्चिमी विक्षोभ का असर उत्तरी राजस्थान में ज्यादा दिखाई दे सकता है।



हालांकि शेखावाटी के सभी इलाकों में बारिश होना जरूरी नहीं है। कुछ जगह सिर्फ बादल छाए रह सकते हैं।



मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक बारिश की गतिविधियां अलग-अलग इलाकों में सीमित रहेंगी।



जयपुर और कोटा में कैसा रहेगा मौसम?

राजधानी जयपुर सहित पूर्वी राजस्थान में मौसम मुख्य रूप से शुष्क रह सकता है। यानी इन इलाकों में बारिश की संभावना कम है।



जयपुर और भरतपुर के आसपास मौसम की स्थिति अलग-अलग रह सकती है। हालांकि पूर्वी राजस्थान के ज्यादातर जिलों में मौसम साफ रहने का अनुमान है।



कोटा और उदयपुर में भी बारिश की ज्यादा संभावना नहीं जताई गई है। यहां मौसम मुख्य रूप से शुष्क बना रह सकता है।



प्रदेश के कई इलाकों में दिन के समय धूप निकलेगी। इससे लोगों को गर्मी का अहसास हो सकता है।



दूसरी तरफ सुबह और रात में हल्की ठंडक बनी रह सकती है।



बीकानेर में 4.4 मिलीमीटर बारिश दर्ज

राजस्थान के कुछ इलाकों में पहले से बारिश का असर दिखाई दे रहा है। बीकानेर में पिछले 24 घंटों के दौरान 4.4 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई।



दूसरी तरफ प्रदेश के कई जिलों में गर्मी बनी हुई है। जैसलमेर में अधिकतम तापमान 39 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया।



इससे साफ है कि राजस्थान में मौसम की स्थिति अलग-अलग बनी हुई है। पश्चिमी जिलों में कहीं बारिश हो रही है तो कहीं गर्मी है।



प्रदेश में दिन और रात के तापमान में भी अंतर दिखाई दे रहा है। दिन में गर्मी के बावजूद सुबह और रात में ठंडक महसूस हो रही है।



25 अक्टूबर से कम हो सकती है बारिश

मौसम विभाग के अनुसार 24 अक्टूबर को पश्चिमी विक्षोभ का असर रह सकता है। इसके बाद बारिश की गतिविधियां कम होने की संभावना है।



25 अक्टूबर से प्रदेश के ज्यादातर इलाकों में मौसम शुष्क रह सकता है। इस दौरान कई जिलों में आसमान साफ रहने का अनुमान है।



26 से 29 अक्टूबर के बीच भी बारिश की गतिविधियां सीमित रह सकती हैं। ज्यादातर इलाकों में मौसम मुख्य रूप से शुष्क रहने की संभावना है।



फिलहाल बारिश का ज्यादा असर उत्तरी राजस्थान में संभव है। पूर्वी हिस्से में मौसम सामान्य रहने का अनुमान है।



हालांकि अक्टूबर के आखिरी दिनों में फिर मौसम बदल सकता है। एक और पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने की संभावना पर नजर रखी जा रही है।



इस सिस्टम की स्थिति स्पष्ट होने के बाद नया पूर्वानुमान सामने आएगा। इसके बाद ही बारिश वाले जिलों की सही जानकारी मिल सकेगी।



पश्चिमी विक्षोभ से क्यों बदल रहा मौसम?

राजस्थान में मौसम बदलने की मुख्य वजह पश्चिमी विक्षोभ है। इसे अंग्रेजी में Western Disturbance कहा जाता है।



यह मौसम से जुड़ा एक सिस्टम होता है। इसके असर से बादल और बारिश की स्थिति बन सकती है।



कई बार इसके कारण तेज हवाएं भी चलती हैं। राजस्थान में 24 अक्टूबर को इसी सिस्टम का असर दिखाई दे सकता है।



मौसम विभाग के अनुसार उत्तरी और पश्चिमी हिस्से में इसका प्रभाव ज्यादा रहेगा। बीकानेर संभाग के जिलों में बारिश की संभावना इसी वजह से है।



हालांकि इस सिस्टम का असर पूरे राजस्थान में एक जैसा नहीं रहेगा। कई जिलों में मौसम शुष्क बना रह सकता है।



बारिश के बाद बढ़ सकती है ठंडक

राजस्थान में अब धीरे-धीरे रात का तापमान कम होने लगा है। सुबह और रात में हल्की ठंडक महसूस हो रही है।



मौसम में संभावित बदलाव के बाद रात का तापमान और गिर सकता ह



छत्तीसगढ़ मौसम अपडेट

छत्तीसगढ़ में अगले कुछ दिनों में मौसम बदल सकता है। प्रदेश में फिलहाल बारिश का दौर थमा हुआ है। मौसम विभाग ने 27 अक्टूबर से बारिश बढ़ने की संभावना जताई है। बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र बन गया है। यह सिस्टम मजबूत होकर चक्रवाती तूफान में बदल सकता है। इसके असर से प्रदेश में तेज बारिश होने के आसार हैं। खासकर 28 और 29 अक्टूबर को भारी बारिश की संभावना है। इस दौरान तेज हवाएं भी चल सकती हैं। हवाओं की रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।



बंगाल की खाड़ी में बन रहा तूफान

बंगाल की खाड़ी में एक नया मौसम सिस्टम सक्रिय हो गया है। इसके कारण छत्तीसगढ़ में बारिश की संभावना बढ़ गई है।



भारत मौसम विज्ञान विभाग के रायपुर केंद्र ने इसका पूर्वानुमान जारी किया है। विभाग के मुताबिक समुद्र में बना कम दबाव का क्षेत्र लगातार मजबूत हो रहा है।



यह सिस्टम 24 अक्टूबर तक अवदाब में बदल सकता है। इसके बाद 25 अक्टूबर तक इसके गहन अवदाब बनने की संभावना है।



मौसम विभाग ने 26 अक्टूबर तक इसके चक्रवाती तूफान बनने का अनुमान जताया है। इसका असर छत्तीसगढ़ के मौसम पर भी दिखाई दे सकता है।



27 अक्टूबर से बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं।



अगले तीन दिन बारिश की चेतावनी नहीं

छत्तीसगढ़ में फिलहाल मौसम शुष्क बना हुआ है। मौसम विभाग ने 24 अक्टूबर को बारिश की कोई चेतावनी जारी नहीं की है।



25 अक्टूबर को भी प्रदेश में मौसम शुष्क रहने का अनुमान है। इस दिन भी किसी तरह की चेतावनी नहीं है।



26 अक्टूबर को भी मौसम शुष्क रहने की संभावना जताई गई है। यानी अगले तीन दिनों तक ज्यादातर इलाकों में बारिश से राहत रहेगी।



हालांकि बंगाल की खाड़ी में बना सिस्टम लगातार मजबूत हो सकता है। इसके कारण 27 अक्टूबर से मौसम बदलने के आसार हैं।



27 अक्टूबर से शुरू हो सकती है बारिश

मौसम विभाग ने 27 अक्टूबर से प्रदेश में बारिश बढ़ने का अनुमान जताया है। इस दिन कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है।



एक-दो स्थानों पर भारी बारिश की भी संभावना है। इस दौरान गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं।



हवाओं की रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। ऐसे मौसम में लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।



मौसम विभाग के मुताबिक बंगाल की खाड़ी में सक्रिय सिस्टम बारिश की वजह बनेगा। इसके प्रभाव से प्रदेश के मौसम में बदलाव दिखाई दे सकता है।



28 अक्टूबर को भारी बारिश के आसार

छत्तीसगढ़ में 28 अक्टूबर को बारिश की गतिविधियां और बढ़ सकती हैं। मौसम विभाग ने प्रदेश के अनेक स्थानों पर बारिश का अनुमान जताया है।



इस दौरान हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। कुछ इलाकों में बारिश का असर ज्यादा रहने की संभावना है।



एक-दो स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। गरज-चमक के साथ तेज हवाएं भी चल सकती हैं।



हवाओं की रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक रहने का अनुमान है।



28 अक्टूबर को मौसम खराब रहने की संभावना है। ऐसे में लोगों को मौसम विभाग की चेतावनी पर ध्यान देना चाहिए।



29 अक्टूबर को भी बारिश का अनुमान

प्रदेश में 29 अक्टूबर को भी बारिश जारी रहने की संभावना है। मौसम विभाग ने अनेक स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश का अनुमान जताया है।



एक-दो जगह भारी से बहुत भारी बारिश भी हो सकती है। इससे लगातार दूसरे दिन कई इलाकों में बारिश का असर दिखाई दे सकता है।



हालांकि भारी बारिश वाले जिलों की अलग से जानकारी नहीं दी गई है। मौसम विभाग के अगले पूर्वानुमान से इसकी स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।



फिलहाल 28 और 29 अक्टूबर को ज्यादा बारिश होने के आसार जताए गए हैं।



कैसे मजबूत हो रहा मौसम सिस्टम?

मौसम विभाग के मुताबिक 23 अक्टूबर की सुबह बंगाल की खाड़ी में सिस्टम बना था। सुबह 5 बजकर 30 मिनट पर कम दबाव का क्षेत्र दर्ज हुआ।



यह सिस्टम दक्षिण-पूर्व और उससे सटे पूर्व-मध्य बंगाल की खाड़ी में बना था। इससे जुड़ा चक्रवाती परिसंचरण भी सक्रिय है।



यह परिसंचरण समुद्र तल से करीब 5.8 किलोमीटर ऊंचाई तक फैला हुआ है।



मौसम विभाग ने 24 अक्टूबर को सिस्टम के अवदाब बनने की संभावना जताई है। इसके बाद यह और मजबूत हो सकता है।



25 अक्टूबर को इसके गहन अवदाब बनने के आसार हैं। यह पश्चिम और उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ सकता है।



26 अक्टूबर की सुबह तक सिस्टम चक्रवाती तूफान का रूप ले सकता है। उस समय यह पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी के ऊपर रह सकता है।



इसके बाद तूफान उत्तर आंध्र प्रदेश की ओर बढ़ सकता है। दक्षिणी ओडिशा के तटीय इलाकों की तरफ भी बढ़ने की संभावना है।



इस सिस्टम का प्रभाव छत्तीसगढ़ के मौसम पर पड़ सकता है।



रायपुर में तापमान 33 डिग्री पहुंचा

छत्तीसगढ़ में बीते 24 घंटों के दौरान मौसम शुष्क रहा। प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में बारिश दर्ज नहीं हुई।



इस दौरान रायपुर में सबसे ज्यादा अधिकतम तापमान दर्ज किया गया। राजधानी में दिन का तापमान 33 डिग्री सेल्सियस रहा।



रायपुर में न्यूनतम तापमान 22 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। यानी दिन में गर्मी का असर बना रहा।



बिलासपुर में अधिकतम तापमान 31 डिग्री सेल्सियस रहा। जगदलपुर में दिन का तापमान 32.5 डिग्री दर्ज हुआ।



दुर्ग में अधिकतम तापमान 30.8 डिग्री सेल्सियस रहा। प्रदेश के अलग-अलग शहरों में तापमान में अंतर दिखाई दिया।



अंबिकापुर में सबसे ज्यादा ठंडक

प्रदेश के उत्तरी हिस्से में रात की ठंडक बढ़ने लगी है। अंबिकापुर में सबसे कम न्यूनतम तापमान दर्ज किया गया।



यहां रात का तापमान 13.9 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। प्रदेश में यह सबसे कम न्यूनतम तापमान रहा।



दूसरी तरफ रायपुर में न्यूनतम तापमान 22 डिग्री दर्ज हुआ। इससे दोनों शहरों के रात के तापमान में अंतर दिखाई दिया।



मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में न्यूनतम तापमान और गिरने का अनुमान जताया है।



तीन दिनों में और गिरेगा तापमान

मौसम विभाग के मुताबिक अगले तीन दिनों में रात का तापमान कम हो सकता है। प्रदेश के न्यूनतम तापमान में एक से तीन डिग्री की गिरावट संभव है।



इससे सुबह और रात में ठंडक बढ़ सकती है। हालांकि दिन के समय कई इलाकों में गर्मी बनी रह सकती है।



इसके बाद बंगाल की खाड़ी में सक्रिय सिस्टम का असर दिखाई देगा। 27 अक्टूबर से बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना है।



इस तरह प्रदेश में पहले रात का तापमान गिर सकता है। इसके बाद बारिश का दौर शुरू होने के आसार हैं।



किसानों को सावधानी बरतने की सलाह

मौसम विभाग ने संभावित बारिश को देखते हुए किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी है। खासकर खुले में रखी फसल और अनाज सुरक्षित रखने को कहा गया है।



कृषि मंडियों में रखे उत्पादों को सुरक्षित स्थान पर रखना जरूरी है। बारिश से बचाने के लिए पहले से इंतजाम करने की सलाह दी गई है।



तेज हवाओं और बारिश से खुले में रखी उपज प्रभावित हो सकती है। इसलिए किसानों को मौसम के पूर्वानुमान पर नजर रखने को कहा गया है।



27 अक्टूबर से बारिश बढ़ने की संभावना को देखते हुए सावधानी जरूरी है। 28 और 29 अक्टूबर को भारी बारिश के आसार हैं।



गरज-चमक के दौरान क्या करें?

मौसम विभाग ने तेज हवाओं और गरज-चमक के दौरान सावधानी बरतने को कहा है। ऐसे मौसम में सुरक्षित पक्के स्थान पर रहना चाहिए।



बारिश और बिजली चमकने के दौरान पेड़ों के नीचे नहीं खड़ा होना चाहिए। बिजली की लाइनों से भी सुरक्षित दूरी बनाए रखनी चाहिए।



गरज-चमक के समय बिजली से जुड़े उपकरणों के इस्तेमाल में सावधानी जरूरी है। खुले स्थानों पर रहने से बचने की सलाह दी गई है।



तेज हवा चलने पर सुरक्षित जगह पर रहना बेहतर होगा।



अगले छह दिनों में कैसा रहेगा मौसम?

Chhattisgarh Weather Forecast के अनुसार 24 से 26 अक्टूबर तक मौसम शुष्क रह सकता है। इन तीन दिनों के लिए बारिश की कोई चेतावनी जारी नहीं की गई है।



27 अक्टूबर को कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। एक-दो स्थानों पर भारी बारिश की भी संभावना है।



28 अक्टूबर को प्रदेश के अनेक इलाकों में बारिश होने के आसार हैं। कुछ जगह भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है।



29 अक्टूबर को भी बारिश की गतिविधियां जारी रहने की संभावना है। इस दिन भी एक-दो स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश संभव है।



इस बदलाव की मुख्य वजह बंगाल की खाड़ी में बन रहा सिस्टम है। मौसम विभाग के अनुसार यह चक्रवाती तूफान में बदल सकता है।



फिलहाल प्रदेश में मौसम शुष्क है। लेकिन 27 अक्टूबर से बारिश और तेज हवाओं का असर बढ़ सकता है।

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