Ragging Report 2026: देश के किस राज्य और कॉलेज में आए सबसे ज्यादा रैगिंग के मामले
समझें क्या है पूरा मामला
- नेशनल एंटी रैगिंग पोर्टल ने रैगिंग की शिकायतों पर नई रिपोर्ट जारी की है।
- यह रिपोर्ट अप्रैल 2022 से फरवरी 2026 के बीच की शिकायतों पर आधारित है।
- इस लिस्ट में मध्य प्रदेश पूरे देश में तीसरे नंबर पर आया है।
- भोपाल का आरजीपीवी (RGPV) देश के टॉप 10 सबसे ज्यादा शिकायत वाले कॉलेजों में है।
- पूरे देश में पिछले चार साल में कुल 4364 रैगिंग के मामले दर्ज हुए हैं।
नेशनल एंटी रैगिंग रिपोर्ट 2026
Ragging Report 2026: देश के हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस से एक परेशान करने वाली खबर सामने आई है। नेशनल एंटी रैगिंग पोर्टल ने हाल ही में अपनी नई रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि कॉलेजों में रैगिंग अभी भी थमी नहीं है। यह डेटा अप्रैल 2022 से फरवरी 2026 के बीच का है।
इस ताजा रिपोर्ट में मध्य प्रदेश का नाम काफी ऊपर दिखाई दे रहा है। रैगिंग की शिकायतों के मामले में मध्य प्रदेश पूरे देश में तीसरे नंबर पर है। वहीं भोपाल का सरकारी राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (RGPV) भी चर्चा में है।
इसके साथ ही सागर का बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज भी इस लिस्ट में शामिल है। ये दोनों ही इंस्टीट्यूट्स देश के सबसे ज्यादा शिकायत वाले टॉप 10 कैंपसों में आए हैं। इस खबर ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रैगिंग मामलों में कौन सा राज्य आगे है
अगर हम पूरे देश के आंकड़ों (ragging case) को देखें तो उत्तर प्रदेश सबसे आगे है। उत्तर प्रदेश में रैगिंग की सबसे ज्यादा 747 शिकायतें दर्ज की गई हैं। इसके बाद दूसरे नंबर पर पश्चिम बंगाल का नाम आता है। पश्चिम बंगाल में रैगिंग के कुल 442 मामले सामने आए हैं।
तीसरे नंबर पर मध्य प्रदेश है जहां कुल 392 शिकायतें दर्ज हुई हैं। इसके बाद बिहार में 375 और महाराष्ट्र में 272 मामले रिकॉर्ड किए गए हैं। इन आंकड़ों से साफ है कि कई राज्यों में स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है। छात्र आज भी कैंपसों में सुरक्षित महसूस नहीं कर पा रहे हैं।
कॉलेज कैंपसों की हालत सबसे खराब है
देश के सबसे ज्यादा बदनाम टॉप तीन कॉलेज भी उत्तर प्रदेश के ही हैं। इस लिस्ट में बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) सबसे ऊपर है। बीएचयू में रैगिंग की कुल 57 अलग-अलग शिकायतें दर्ज कराई गई हैं। इसके बाद लखनऊ यूनिवर्सिटी का नाम दूसरे नंबर पर आता है।
लखनऊ यूनिवर्सिटी में रैगिंग की 44 शिकायतें पोर्टल पर दर्ज की गई हैं। तीसरे नंबर पर इलाहाबाद यूनिवर्सिटी है जहां कुल 32 मामले सामने आए हैं। इन बड़े और प्रतिष्ठित संस्थानों में ऐसे मामले आना सचमुच बहुत चिंताजनक (एंटी रैगिंग कमेटी) है।
भोपाल के RGPV में दर्ज हुए कई मामले
अब बात करते हैं मध्य प्रदेश के उन दो कॉलेजों की जो टॉप टेन में हैं। भोपाल के आरजीपीवी (RGPV) के यूआईटी कैंपस में 20 शिकायतें दर्ज (Students in RGPV troubled by ragging) हुई हैं। वहीं सागर के बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में रैगिंग के 17 मामले सामने आए हैं। इसके कारण ये दोनों संस्थान देश के टॉप टेन में शामिल हैं।
अन्य राज्यों के कुछ कॉलेज भी इस लिस्ट का हिस्सा बने हुए हैं। पश्चिम बंगाल की मौलाना अबुल कलाम आजाद यूनिवर्सिटी में 28 मामले मिले हैं। बिहार के गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक कॉलेज दरभंगा में भी 28 शिकायतें दर्ज हुई हैं।
ओडिशा के एमकेसीजी मेडिकल कॉलेज में रैगिंग की 24 शिकायतें आई हैं। गुवाहाटी यूनिवर्सिटी में 24 और बर्दवान यूनिवर्सिटी में 17 शिकायतें दर्ज की गई हैं।
लड़के या लड़कियां कौन हैं ज्यादा परेशान
इस चार साल के ड्यूरेशन में पूरे देश से कुल 4 हजार 364 शिकायतें आईं। आंकड़ों के मुताबिक, रैगिंग के शिकार होने वालों में लड़के सबसे आगे हैं। कुल शिकायत करने वालों में लड़कों की संख्या 82.1 प्रतिशत दर्ज हुई है। वहीं लड़कियों की संख्या इस लिस्ट में केवल 17.9 प्रतिशत है।
मध्य प्रदेश के अधिकारियों का कहना है कि शिकायतें सिर्फ रैगिंग तक सीमित नहीं हैं। छात्रों ने कॉलेजों की अन्य व्यवस्थाओं को लेकर भी आवाज उठाई है। इसमें एडमिशन में गड़बड़ी और परीक्षा के गलत तरीकों की शिकायतें शामिल हैं। प्रोफेसरों की भर्ती में पक्षपात के आरोप भी लगाए गए हैं।
एक्सपर्ट्स ने बताई इसकी असली वजह
एजुकेशन वर्ल्ड के जानकारों ने इन शिकायतों के बढ़ने की बड़ी वजह बताई है। उनका कहना है कि राज्य में प्रोफेशनल कॉलेजों की संख्या बहुत तेजी से बढ़ी है। लेकिन उस हिसाब से इन कॉलेजों की निगरानी और चेकिंग नहीं हो पा रही है।
नियमों में ढील के कारण ऐसी घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। आरजीपीवी (RGPV) कैंपस से जुड़े सूत्रों ने कई प्रशासनिक कमियों की बात मानी है। छात्र और उनके माता-पिता परीक्षाओं को लेकर हमेशा चिंतित रहते हैं।
उनका आरोप है कि एग्जाम कराने के तरीके में कम्पलीट ट्रांसपेरेंसी नहीं है। रिजल्ट और डिग्री सर्टिफिकेट मिलने में भी महीनों की देरी होती है।
प्रशासन उठाएंगे कड़े कदम
यूनिवर्सिटी के बड़े अधिकारियों ने कई शिकायतें मिलने की बात स्वीकार की है। उन्होंने कहा कि आंतरिक जांच के बाद बहुत से मामलों को सुलझा लिया गया है। अधिकारी अब गंभीर आरोपों की जांच में पूरा सहयोग करने की बात कह रहे हैं। पेंडिंग केस को निपटाने के लिए रूल्स रिव्यु की जा रही है।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि ज्यादा छात्र संख्या वाले राज्यों में शिकायतें ज्यादा हैं। मध्य प्रदेश सरकार ने अब कॉलेजों की निगरानी सख्त करने का वादा किया है। इसके लिए शिकायत निवारण तंत्र (Grievance Redressal Mechanism) को और मजबूत बनाने का काम शुरू होगा।
आने वाले समय में नए एडमिनिस्ट्रेटिव रूल्स भी लागू किए जाएंगे। अब छात्रों और अभिभावकों की मांग भी साफ है। वे चाहते हैं कि कॉलेजों में जांच की प्रक्रिया तेज और निष्पक्ष हो। आरजीपीवी जैसे बड़े संस्थानों में कम्पलीट ट्रांसपेरेंसी लाकर ही दोबारा भरोसा जीता जा सकता है।
References:
- नेशनल एंटी रैगिंग पोर्टल (National Anti-Ragging Portal), UGC anti-ragging helplineकेंद्रीय शिक्षा मंत्रालय
- भारत सरकार (Ministry of Education, Government of India) की रिपोर्ट एंटी-रैगिंग पोर्टल।
FAQ
- नेशनल एंटी रैगिंग पोर्टल की रिपोर्ट में मध्य प्रदेश का कौन सा स्थान है?
इस रिपोर्ट के अनुसार, रैगिंग की शिकायतों के मामले में मध्य प्रदेश पूरे देश में तीसरे स्थान पर है। राज्य में कुल 392 रैगिंग की शिकायतें दर्ज की गई हैं। - भोपाल के आरजीपीवी (RGPV) में रैगिंग की कितनी शिकायतें दर्ज हुई हैं?
भोपाल के आरजीपीवी (RGPV) के यूआईटी कैंपस में रैगिंग की कुल 20 अलग-अलग शिकायतें दर्ज कराई गई हैं, जिसके कारण यह देश के टॉप 10 शिकायत वाले कैंपसों में शामिल है। - देश भर में रैगिंग की सबसे ज्यादा शिकायतें किस राज्य और कॉलेज से आई हैं?
देश में सबसे ज्यादा 747 शिकायतें उत्तर प्रदेश से आई हैं। कॉलेजों की बात करें तो बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) 57 शिकायतों के साथ पूरे देश में पहले नंबर पर है।
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