टीईटी अनिवार्यता पर भड़का शिक्षक संगठन, बोला- पुराने शिक्षकों के साथ हो रहा अन्याय

Ramanand Tiwari | May 30, 2026, 24:00 IST
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सुप्रीम कोर्ट ने इन-सर्विस शिक्षकों पर टीईटी अनिवार्यता कायम रखी। नई डेडलाइन 31 अगस्त 2028 तय की गई। मध्यप्रदेश शिक्षक संगठनों ने फैसले का विरोध जताया।

सुप्रीम कोर्ट ने इन-सर्विस शिक्षकों के लिए टीईटी पास करना अनिवार्य रखने का फैसला बरकरार रखा है। हालांकि कोर्ट ने राहत देते हुए टीईटी पास करने की समय सीमा 2 साल से बढ़ाकर 3 साल कर दी है। साथ ही नई डेडलाइन 31 अगस्त 2028 तय की है। लेकिन इस फैसले के बाद मध्यप्रदेश में शिक्षक संगठनों की नाराजगी खुलकर सामने आने लगी है। ट्राइबल वेलफेयर टीचर्स एसोसिएशन ने इसे पुराने शिक्षकों के सेवा अधिकारों पर सीधा प्रहार बताया है।



क्या है पूरा मामला?

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अंजुमन इशात-ए-तालीम ट्रस्ट मामले में दायर रिव्यू पिटीशन्स पर फैसला सुनाया। कोर्ट ने साफ किया कि सेवा में कार्यरत शिक्षकों के लिए भी टीईटी पास करना जरूरी रहेगा। हालांकि शिक्षकों को अतिरिक्त समय देते हुए अंतिम तिथि 31 अगस्त 2028 कर दी गई। इस फैसले के बाद हजारों शिक्षकों में असमंजस और दबाव की स्थिति बन गई है।



शिक्षक संगठन ने फैसले पर उठाए सवाल

ट्राइबल वेलफेयर टीचर्स एसोसिएशन और अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा ने फैसले को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। संगठन का कहना है कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों पर नई पात्रता शर्त थोपना व्यावहारिक नहीं है। संगठन इसे शिक्षा व्यवस्था से ज्यादा प्रशासनिक दबाव मॉडल बता रहा है।



शिक्षकों की प्रमुख आपत्तियां

  • पुराने शिक्षकों पर नई पात्रता लागू करना।
  • सेवा सुरक्षा पर संकट की आशंका।
  • अनुभव से ज्यादा परीक्षा को महत्व।
  • ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के शिक्षकों पर अतिरिक्त दबाव।
  • नौकरी बचाने के लिए फिर परीक्षा देने की मजबूरी।

सड़क से संसद तक लड़ाई की चेतावनी

ट्राइबल वेलफेयर टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष डीके सिंगोरे ने बड़ा बयान दिया है। शिक्षक संगठनों ने कहा कि मामला केवल कोर्ट तक सीमित नहीं रहेगा। संगठन आरटीई एक्ट में संशोधन की मांग को लेकर राजनीतिक और कानूनी मोर्चों पर तैयारी कर रहा है। संगठन का दावा है कि जरूरत पड़ी तो क्यूरेटिव पिटीशन और अन्य न्यायिक विकल्प अपनाए जाएंगे। पुराने शिक्षकों पर टीईटी की अनिवार्यता अन्यायपूर्ण है। अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा इस फैसले के खिलाफ हर स्तर पर लड़ाई लड़ेगा।



फैसले के बाद बढ़े ये सवाल

अनुभवी शिक्षकों की योग्यता पर सवाल उठ रहे हैं। वर्षों की सेवा के बाद दोबारा परीक्षा देना विवादित है। ग्रामीण शिक्षकों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ सकता है। सरकार शिक्षकों की व्यावहारिक समस्याएं समझ रही है। सुप्रीम कोर्ट ने टीईटी अनिवार्यता बरकरार रखी। यह नियम इन-सर्विस शिक्षकों पर भी लागू होगा। टीईटी पास करने की नई डेडलाइन 31 अगस्त 2028 है। शिक्षक संगठनों ने फैसले का विरोध किया। सड़क से संसद तक आंदोलन की चेतावनी दी गई। क्यूरेटिव पिटीशन दायर करने की तैयारी चल रही है।



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