महाराष्ट्र में जेन-जी आंदोलन, NEET, JPSC के बाद अब MPSC पर उठे सवाल
देश में इस साल परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ियों को लेकर युवाओं का गुस्सा एक के बाद एक राज्य में सड़कों पर उतर रहा है। सबसे पहले जून 2026 में दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET पेपर लीक को लेकर बड़ा आंदोलन शुरू हुआ था।
जिसके बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा था। इसके कुछ ही समय बाद झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी के आरोपों पर रांची में हजारों छात्र सड़कों पर उतर आए थे, जिसके दबाव में राज्य सरकार को कई परीक्षाएं रद्द करनी पड़ीं। अब यही गुस्सा महाराष्ट्र पहुंच चुका है, जहां पुणे में हजारों MPSC अभ्यर्थियों ने आक्रामक विरोध प्रदर्शन किया है।
महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग यानी MPSC की प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों, धांधली और पेपर लीक के गंभीर आरोपों को लेकर अभ्यर्थियों का धैर्य अब पूरी तरह जवाब दे चुका है। व्यवस्था से नाराज और अपने भविष्य को लेकर चिंतित हजारों छात्रों ने पुणे की सड़कों पर उतरकर विरोध दर्ज कराया।
सुबह 10 बजे से पुणे के ऐतिहासिक ओंकारेश्वर मंदिर चौक से जिलाधिकारी कार्यालय तक एक विशाल मार्च निकाला गया, जिसमें भारी संख्या में युवक-युवतियों ने हिस्सा लिया।
पुणे में क्यों भड़का MPSC अभ्यर्थियों का गुस्सा
प्रदर्शनकारी छात्रों का साफ कहना है कि दिन-रात मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों के हक पर डाका डाला जा रहा है। उनके मुताबिक आयोग में बैठे कुछ भ्रष्ट अधिकारियों और एजेंटों की साठगांठ ने पारदर्शी परीक्षा प्रणाली की धज्जियां उड़ा दी हैं।
MPSC छात्रों की 12 प्रमुख मांगें
आक्रोशित छात्रों ने आयोग के सामने कुल 12 मांगें रखी हैं। इनमें MPSC के मौजूदा अध्यक्ष और सचिव का तुरंत इस्तीफा लेकर बेदाग छवि वाले अधिकारियों की नियुक्ति की मांग सबसे प्रमुख है। छात्रों ने ग्रुप-B परीक्षा में लगे धांधली के आरोपों पर आयोग से 7 दिनों के भीतर आधिकारिक स्पष्टीकरण और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
इसके अलावा राज्य सेवा मुख्य परीक्षा 2025 और कृषि सेवा परीक्षा के वर्णनात्मक पेपरों के मूल्यांकन में हुई गलतियों की उच्च स्तरीय जांच, मुंबई क्राइम ब्रांच की प्राथमिक जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक करने और गिरफ्तार आरोपी अपर सचिव अभिजीत लांडे के पूरे कार्यकाल की परीक्षाओं के फॉरेंसिक ऑडिट की मांग भी शामिल है।
छात्रों ने मुख्य आरोपी लांडे, मराठे और नरखड़े के सेवाकाल व पदोन्नति की गहराई से जांच, इन आरोपियों के संपर्क में रहे चयनित उम्मीदवारों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड की जांच और एजेंट प्रवीण पाटील व मयूर ठाकरे के अलावा अन्य सक्रिय एजेंटों की भूमिका उजागर करने की भी मांग रखी है।
इसके साथ ही आयोग की अन्य परीक्षाओं की स्वतंत्र एजेंसी से जांच, ड्रग इंस्पेक्टर परीक्षा के संदिग्ध परिणामों का फॉरेंसिक ऑडिट, 25 अक्टूबर 2025 को प्रस्तावित ग्रुप-C प्रारंभिक परीक्षा को पूरी तरह पारदर्शी बनाने की गारंटी और स्टेनोग्राफर पदों पर तत्काल भर्ती निकालने की मांग भी छात्रों ने रखी है।
जब तक मांगें नहीं मानी जातीं, आंदोलन जारी रहेगा
छात्रों का स्पष्ट अल्टीमेटम है कि जब तक उनकी इन 12 सूत्रीय मांगों पर ठोस प्रशासनिक कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका यह आंदोलन थमेगा नहीं। इस तरह देश के अलग-अलग हिस्सों में परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग को लेकर युवाओं का यह आंदोलन एक राज्य से दूसरे राज्य तक फैलता जा रहा है।
दिल्ली से शुरू हुई थी यह लहर
दिल्ली में जून-जुलाई 2026 के दौरान कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में NEET पेपर लीक के खिलाफ बड़ा जेन जी प्रोटेस्ट चला था। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने भी इसमें भूख हड़ताल कर समर्थन दिया था। 20 जुलाई को हजारों प्रदर्शनकारियों ने संसद तक मार्च निकालने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस के साथ झड़प भी हुई। आखिरकार 25 जुलाई को शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया।
झारखंड JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी
इसके बाद झारखंड में भी 25 जुलाई से छात्रों ने JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी को लेकर रांची में जंतर-मंतर जैसा ही एक विरोध स्थल बना लिया था। छात्रों के दबाव में झारखंड सरकार को JSSC-CGL सहित कई परीक्षाएं रद्द करनी पड़ीं, हालांकि बाद में झारखंड हाईकोर्ट ने 11वीं और 13वीं JPSC परीक्षाओं को रद्द करने के आदेश पर रोक लगा दी।
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