दिन-रात तालाब में रहने को मजबूर है ये बच्चा, अनंत अंबानी ने लिया इलाज का जिम्मा
Murshidabad Boy Iqbal: पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में एक बहुत ही अनोखी घटना सामने आई है। यहां रहने वाला 14 साल का इकबाल अपना ज्यादातर समय तालाब में बिताता था। परिवार के लोगों ने बताया कि वह सुबह से रात तक पानी में रहता था। अगर वह पानी से बाहर आता, तो उसके शरीर में जलन होने लगती थी।
यह स्थिति बच्चे और उसके परिवार के लिए बेहद दुखद और चिंताजनक थी। इकबाल कई बार एक तालाब से निकलकर दूसरे तालाब में चला जाता था। गांव के लोग उसे दिन-रात पानी में देखकर हैरान और परेशान रहते थे। किसी को समझ नहीं आ रहा था कि आखिर इकबाल के साथ क्या हो रहा है।
वायरल वीडियो ने बदली इकबाल की जिंदगी
सोशल मीडिया पर इकबाल का एक वीडियो तेजी से वायरल होने लगा। उस वीडियो में वह तालाब के पानी में बैठकर बड़े मजे से स्नैक्स खा रहा था। वीडियो देखकर हर कोई हैरान रह गया कि बच्चा पानी में क्यों बैठा है। धीरे-धीरे यह वीडियो इंटरनेट पर लाखों लोगों तक पहुंच गया।
वीडियो वायरल होने के बाद मीडिया और डॉक्टरों का ध्यान इस तरफ गया। इकबाल ने बताया कि उसे लगता था कोई अदृश्य शक्ति उसे पानी में खींचती है। हालांकि डॉक्टर इसे एक मानसिक या शारीरिक बीमारी का लक्षण मान रहे हैं। अंधविश्वास की जगह मेडिकल साइंस के जरिए अब इसका सच निकाला जा रहा है।
अनंत अंबानी ने बढ़ाया मदद का हाथ
ऐसे में जब इकबाल की हालत की खबर फैली, तो उद्योगपति अनंत अंबानी (Anant Ambani) आगे आए है। उन्होंने बच्चे के इलाज का पूरा जिम्मा उठाने का फैसला किया है। अनंत अंबानी ने इकबाल को तुरंत बंगाल से एयरलिफ्ट करवाकर मुंबई बुलवाया। मुंबई के मशहूर सर एचएन रिलायंस फाउंडेशन अस्पताल में उसे भर्ती कराया गया।
इकबाल के माता-पिता इस दुर्लभ बीमारी केइलाज का इतना ज्यादा खर्च नहीं उठा सकते थे। उन्होंने पहले भी स्थानीय अस्पतालों में दिखाया, पर कोई फायदा नहीं हुआ था। अब मुंबई के बड़े विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम इकबाल का इलाज कर रही है। अनंत अंबानी की इस मदद की पूरे देश में तारीफ हो रही है। treatment
क्या होती है पानी में रहने की बीमारी
डॉक्टरों के अनुसार लगातार पानी में रहने से शरीर को नुकसान होता है। लंबे समय तक पानी में रहने से स्किन मैसरेशन नाम की समस्या हो सकती है। स्किन मैसरेशन में इंसान की त्वचा एकदम सफेद, नरम और पतली हो जाती है। त्वचा कमजोर होने से उसमें दरारें पड़ने लगती हैं और जलन बढ़ती है। इसके अलावा गीली त्वचा पर फंगल और बैक्टीरियल इंफेक्शन का खतरा बहुत बढ़ जाता है।
पानी से बाहर आने पर हवा लगते ही सूखी त्वचा में तेज जलन होती है। चिकित्सकों का कहना है कि मरीज को जलन से बचने के लिए पानी में जाने की आदत पड़ जाती है। यह एक तरह का साइकोलॉजिकल और स्किन से जुड़ा चक्र बन जाता है।
अक्वाजेनिक प्रुरिटस और मानसिक स्थिति
मेडिकल साइंस में एक स्थिति होती है जिसे अक्वाजेनिक प्रुरिटस (Aquagenic Pruritus) कहते हैं। इस बीमारी में पानी के संपर्क में आते ही या बाहर निकलते ही स्किन पर तेज खुजली और जलन होती है। हालांकि इकबाल के मामले में पानी में रहने पर आराम मिलता है। इसलिए डॉक्टर इसे एक दुर्लभ डर्मेटोलॉजिकल कंडीशन मान रहे हैं।
इसके साथ ही इकबाल की मेंटल हेल्थ की भी जांच की जा रही है। कई बार दिमाग के कुछ न्यूरोलॉजिकल बदलावों के कारण भी इंसान को ऐसी इच्छा महसूस होती है। डॉक्टरों की टीम हर एंगल से इकबाल के टेस्ट कर रही है। सही डायग्नोसिस के बाद ही इसका पक्का इलाज शुरू किया जाएगा।
लंबे समय तक पानी में रहने के खतरे
विशेषज्ञों का कहना है कि ज्यादा समय पानी में बिताना शरीर के लिए खतरनाक है। इससे शरीर का तापमान गिर सकता है और हाइपोथर्मिया हो सकता है। इसके साथ ही फेफड़ों में पानी की नमी जाने से सांस की बीमारी हो सकती है। तालाब के गंदे पानी से पेट और आंखों में गंभीर इंफेक्शन फैल सकता है।
त्वचा की प्राकृतिक परत खत्म होने से बैक्टीरिया आसानी से शरीर में घुस जाते हैं। इससे खून में इंफेक्शन फैलने का भी बड़ा जोखिम बन जाता है। इसलिए डॉक्टरों ने सलाह दी है कि बच्चे को पानी से दूर रखा जाए। सही दवाइयों और थेरेपी की मदद से इस बीमारी पर काबू पाया जा सकता है।
समय पर इलाज की बड़ी अहमियत
इकबाल का मामला यह सिखाता है कि किसी भी बीमारी को छोटा न समझें। शरीर में कोई भी अजीब लक्षण दिखे तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं। अंधविश्वास के चक्कर में पड़कर समय बर्बाद बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए। समय पर सही मेडिकल ट्रीटमेंट मिलने से गंभीर बीमारियां भी ठीक हो सकती हैं।
गांवों में जागरूकता की कमी के कारण अक्सर लोग बीमारियों को ऊपरी हवा समझ लेते हैं। इकबाल को सही समय पर सही अस्पताल पहुंचाना एक अच्छी पहल है। अब मुंबई में विशेषज्ञों की देखरेख में इकबाल तेजी से ठीक हो रहा है। उम्मीद है कि वह जल्द ही एक सामान्य जीवन जीने लगेगा।
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