BCI का यू-टर्न, CJI सूर्यकांत का विरोध करने वाले छात्रों पर लगी रोक हटानी पड़ी

Pawan Modiya | Aug 13, 2026, 23:29 IST
सीजेआई का विरोध
NALSAR छात्रों ने CJI सूर्यकांत की कन्वोकेशन मौजूदगी का विरोध किया। BCI ने एनरोलमेंट पर रोक लगाई, फिर 3 घंटे में वापस ले ली। जांच जारी रहेगी।

    समझें क्या है पूरा मामला

    • NALSAR के 2026 बैच छात्रों ने CJI सूर्यकांत की कन्वोकेशन मौजूदगी का विरोध किया।
    • इसके बाद BCI ने सभी छात्रों के वकील एनरोलमेंट पर रोक लगा दी।
    • कड़े विरोध के बाद BCI ने सिर्फ 3 घंटे में यह रोक हटा ली।
    • BCI ने कहा कि जांच पूरी होने तक कोई कार्रवाई नहीं होगी।
    • शुरुआती जांच में ज्यादातर छात्र बेगुनाह पाए गए हैं, BCI का दावा है।

    बार काउंसिल ऑफ इंडिया यानी BCI ने बड़ा फैसला वापस लिया है। NALSAR यूनिवर्सिटी हैदराबाद के 2026 बैच के छात्रों पर लगी रोक हटाई गई। यह रोक कुछ घंटे पहले ही लगाई गई थी। मामला मुख्य न्यायाधीश यानी CJI सूर्यकांत से जुड़ा है। छात्रों ने कन्वोकेशन में उनकी मौजूदगी का विरोध किया था।



    क्या है पूरा विवाद

    NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ देश के टॉप लॉ स्कूलों में गिनी जाती है। यहां के 2026 बैच के छात्रों ने विरोध शुरू किया था। छात्रों ने यूनिवर्सिटी प्रशासन को चेतावनी दी थी।



    उन्होंने कहा था कि अगर CJI सूर्यकांत कन्वोकेशन में आए तो बहिष्कार होगा। छात्रों का आरोप था कि CJI ने बेरोजगार लोगों पर अपमानजनक टिप्पणी की थी। दरअसल, यह टिप्पणी नकली डिग्री के मामले पर आई थी। बाद में CJI सूर्यकांत ने खुद सफाई भी दी। उन्होंने कहा कि उनका इशारा नकली डिग्री वालों की तरफ था। बेरोजगार युवाओं की तरफ नहीं।



    विवाद की जड़ में एक और मामला भी जुड़ा है। छात्रों ने CJI पर एक याचिका जल्दी सुनवाई से इनकार करने का आरोप लगाया। छात्रों ने याचिका में यह भी दावा किया था। सुनवाई के दौरान उनकी बात ठीक से नहीं सुनी गई।



    यह याचिका दिल्ली में हुई पुलिस कार्रवाई से जुड़ी थी। यह कार्रवाई 20 जुलाई के एक विरोध मार्च के दौरान हुई थी। इस मार्च का आयोजन कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP ने किया था।



    BCI ने क्यों लगाई रोक

    छात्रों के विरोध की खबरें सार्वजनिक तौर पर सामने आईं। इसके बाद BCI ने बड़ा कदम उठाया। काउंसिल ने सभी राज्य बार काउंसिल को निर्देश दिया। निर्देश था कि NALSAR के 2026 बैच का कोई छात्र वकील न बने। यह रोक जांच पूरी होने तक के लिए लगाई गई थी।



    BCI चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने इस पर अपना पक्ष रखा। उनके मुताबिक काउंसिल ने सार्वजनिक जानकारी और रिपोर्ट का संज्ञान लिया था। इनमें CJI की मौजूदगी के खिलाफ संगठित कैंपेन का जिक्र था।



    BCI ने NALSAR के वाइस-चांसलर को भी निर्देश दिया। वाइस-चांसलर से तीन दिन में तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी गई। इसमें कैंपेन से जुड़े सभी दस्तावेज शामिल करने को कहा गया। साथ ही हस्ताक्षर करने वाले सभी छात्रों की सूची भी मांगी गई। यूनिवर्सिटी से यह भी पूछा गया कि कैंपेन किसने शुरू किया। इसमें छात्र संगठन, फैकल्टी, शोधार्थी या बाहरी लोग भी शामिल हो सकते हैं।



    फैसले का विरोध और काउंसिल का यू-टर्न

    BCI के इस फैसले का तीखा विरोध शुरू हो गया। कई बार काउंसिल सदस्यों ने इसे गलत फैसला बताया। कॉकरोच जनता पार्टी ने भी इस आदेश को गैरजरूरी बताया। पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास ने आदेश की निंदा की। उनका कहना था कि छात्रों को सामूहिक रूप से दंडित नहीं किया जा सकता।



    पार्टी ने BCI दफ्तर के बाहर प्रदर्शन की चेतावनी भी दी। पार्टी संस्थापक अभिजीत डिपके ने भी आदेश पर सवाल उठाए। इतने विरोध के बाद BCI को अपना फैसला बदलना पड़ा। आदेश के करीब तीन घंटे बाद ही रोक हटा ली गई।



    BCI ने साफ किया कि जांच पूरी होने तक कोई फैसला नहीं होगा। छात्रों के खिलाफ कार्रवाई फिलहाल टाल दी गई है। हालांकि कैंपेन में मुख्य भूमिका निभाने वालों की जांच जारी रहेगी।



    ज्यादातर छात्र बेगुनाह

    BCI ने अपनी शुरुआती जांच का ब्योरा भी साझा किया। काउंसिल के मुताबिक ज्यादातर छात्र बेगुनाह पाए गए हैं। उनकी मंशा CJI का अपमान करने की नहीं थी, ऐसा BCI ने कहा। हालांकि कुछ मामलों में और जांच जरूरी हो सकती है।



    ऐसे लोगों के नाम संबंधित राज्य बार काउंसिल को भेजे जा सकते हैं। जांच पूरी होने तक उनका एनरोलमेंट रोका जा सकता है। बाकी सभी छात्रों को वकील बनने की राह अभी साफ है।



    आगे क्या होगा

    अब सबकी नजर NALSAR की तथ्यात्मक रिपोर्ट पर टिकी है। यह रिपोर्ट तीन दिन के भीतर BCI को सौंपी जानी है। रिपोर्ट के आधार पर आगे की जांच दिशा तय होगी। यूनिवर्सिटी से यह भी पूछा गया कि क्या प्रदर्शन की अनुमति ली गई थी। कैंपस अनुशासन के नियम लागू हुए थे या नहीं, यह भी जांचा जाएगा।



    जिन छात्रों या लोगों की भूमिका साफ नहीं होगी, उनकी अलग जांच होगी। तब तक बाकी सभी 2026 बैच के छात्रों का एनरोलमेंट सामान्य रहेगा। BCI ने साफ किया कि किसी को तुरंत अयोग्य घोषित नहीं किया गया। एडवोकेट्स एक्ट की धारा 24ए के तहत यह स्पष्टीकरण दिया गया है।



    यह मामला न्यायपालिका और छात्र अधिकारों की बहस से जुड़ गया है। आने वाले दिनों में इस विवाद पर और स्पष्टता सामने आ सकती है।



    जरूरी FAQ

    BCI ने NALSAR छात्रों के एनरोलमेंट पर रोक क्यों लगाई थी?


    NALSAR के 2026 बैच के छात्रों ने कन्वोकेशन में CJI सूर्यकांत की मौजूदगी का विरोध किया था। इस कैंपेन की रिपोर्ट सार्वजनिक तौर पर सामने आने के बाद BCI ने सभी राज्य बार काउंसिल को निर्देश दिया। निर्देश था कि जांच पूरी होने तक किसी भी 2026 बैच के छात्र को वकील न बनाया जाए।



    BCI ने यह रोक कितनी जल्दी वापस ली?


    BCI ने आदेश के करीब तीन घंटे के भीतर ही रोक वापस ले ली। भारी विरोध के बाद यह फैसला लिया गया। कई बार काउंसिल सदस्यों और कॉकरोच जनता पार्टी ने इस आदेश को गलत और गैरजरूरी बताया था। BCI ने कहा कि जांच पूरी होने तक छात्रों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी।



    क्या सभी छात्रों की अब भी जांच होगी?


    BCI के मुताबिक शुरुआती जांच में ज्यादातर छात्र बेगुनाह पाए गए हैं। हालांकि कैंपेन में मुख्य भूमिका निभाने वालों की अलग जांच जारी रहेगी। ऐसे लोगों के नाम राज्य बार काउंसिल को भेजे जा सकते हैं। NALSAR को तीन दिन में तथ्यात्मक रिपोर्ट सौंपनी है, जिसके आधार पर आगे कदम तय होंगे।



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