मोदी के बतौर प्रधानमंत्री 12 साल: हिंदू ग्रोथ रेट को बताया कांग्रेस की नाकामी
समझें क्या है पूरा मामला
- पीएम मोदी ने 10 जून 2026 को प्रधानमंत्री के रूप में लगातार 12 साल पूरे किए।
- भारत मंडपम, दिल्ली में NDA कॉन्क्लेव को पीएम मोदी ने संबोधित किया।
- उन्होंने 'हिंदू ग्रोथ रेट' को कांग्रेस की विफलता का नाम बताया।
- कांग्रेस के घोटालों और अस्थिरता को देश के नुकसान की वजह कहा।
- मोदी ने कहा कि भारत अब 7.7 प्रतिशत की दर से आगे बढ़ रहा है।
12 साल पूरे, ये जनता का आशीर्वाद है
10 जून 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने निरंतर निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में 12 साल पूरे किए। यह भारत के इतिहास में एक रिकॉर्ड है। इस मौके पर नई दिल्ली के भारत मंडपम में एनडीए (NDA - National Democratic Alliance) कॉन्क्लेव का आयोजन किया गया। इसमें एनडीए शासित राज्यों के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री मौजूद थे। पीएम मोदी ने इस अवसर पर देश की जनता को नमन करते हुए कहा कि यह उन्हीं का आशीर्वाद है जिसने देश को स्थिरता दी।
'हिंदू ग्रोथ रेट' पर सीधा हमला
इस कार्यक्रम में पीएम मोदी ने 'हिंदू ग्रोथ रेट' (Hindu Growth Rate) के मुद्दे पर कांग्रेस को जमकर घेरा। उन्होंने कहा कि देश को यह एहसास कराया जाता था कि भारत में विकास धीरे-धीरे ही होता है और तेज विकास संभव ही नहीं है। इस धीमी विकास को बड़ी चतुराई से 'हिंदू ग्रोथ रेट' का नाम दे दिया गया।
पीएम मोदी ने इस पर सीधे शब्दों में कहा, "कार्यशैली कांग्रेस की, दायित्व कांग्रेस का, विफलता कांग्रेस की लेकिन कलंक देश की बड़ी हिंदू आबादी के नाम लगाया गया। जबकि असल में इस कुसंस्कृति का नाम होना चाहिए था कांग्रेस ग्रोथ रेट। इस कांग्रेस ग्रोथ रेट में न सुशासन था, न नीति, न नीयत और ना निर्णय।"
क्या होता है 'हिंदू ग्रोथ रेट'?
'हिंदू ग्रोथ रेट' भारतीय अर्थव्यवस्था की उस धीमी वृद्धि को कहते हैं जो आजादी के बाद लगभग 1950 से 1980 के दशक तक रही। इस दौरान भारत की औसत वार्षिक जीडीपी (GDP - Gross Domestic Product) वृद्धि दर तीन से साढ़े तीन प्रतिशत के आसपास रही। प्रति व्यक्ति आय वृद्धि 1.3 प्रतिशत से भी कम थी।
समाजवादी नीतियां, लाइसेंस राज, अत्यधिक सरकारी नियंत्रण और बंद अर्थव्यवस्था को इसकी वजह माना जाता है। इन नीतियों ने उद्यमिता को कुचला और प्रतिस्पर्द्धा को पनपने नहीं दिया। 1990-91 के आर्थिक उदारीकरण (Economic Liberalisation) के बाद भारत इस दर को पार कर गया। पीएम मोदी का कहना है कि इस धीमेपन की जिम्मेदारी कांग्रेस की थी, लेकिन दोष हिंदू समाज पर मढ़ा गया।
2004 की हार और फिर कांग्रेस का 'शिकंजा'
पीएम मोदी ने 2004 की एनडीए की हार को भी याद किया। उन्होंने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में पहली एनडीए सरकार ने झलकाया था कि विकास में गति कैसे आती है। लेकिन 2004 में देश फिर कांग्रेस के शिकंजे में फंस गया।
पीएम मोदी ने कहा कि कांग्रेस शासन में एक के बाद एक हजारों करोड़ों रुपए के घोटाले सामने आए। देश को लाचारगी, बेचारगी और हीन भावना के गर्त में धकेला गया। देश का भाग्य तब बदला जब 2014 में एनडीए की सरकार बनी।
कांग्रेस और एनडीए की ग्रोथ रेट का फर्क
पीएम मोदी ने सबसे अहम सवाल यह उठाया कि अगर 12 साल में इतना कुछ हो सकता है तो दशकों तक क्यों नहीं हुआ? उन्होंने इसे 'कांग्रेस ग्रोथ रेट' और 'एनडीए ग्रोथ रेट' का बुनियादी फर्क बताया।
पीएम ने कहा कि एक व्यवस्था लोगों को इंतजार कराती थी। दूसरी काम अटकाती-भटकाती थी। आज की व्यवस्था कहती है, काम अभी होगा, समय पर होगा और बड़े पैमाने पर होगा।
कोरोना से उबरे, 7.7% की रफ्तार से दौड़ रहा भारत
पीएम मोदी ने कहा कि कोरोना जैसी महामारी (Pandemic) के दौरान जब हर तरफ हाहाकार मचा था, भारत ने उसका सफलतापूर्वक मुकाबला किया। जब दुनिया की दूसरी अर्थव्यवस्थाएं संघर्ष कर रही हैं तब भारत 7.7 प्रतिशत की दर से आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि 2014 से 2026 की कहानी सिर्फ आंकड़ों की कहानी नहीं है। यह उस भारत की कहानी है जिसने पहली बार अपनी पूरी क्षमता के साथ दौड़ना तय किया है। कल के विकसित भारत की गारंटी है आज का आकांक्षी भारत।
2014 में क्या कहा था मोदी ने?
पीएम मोदी ने याद दिलाया कि 2014 में जब एनडीए जीती थी, तब उन्होंने कहा था कि देश के सामान्य मानवी में एक नई आशा का उदय हुआ है। उन्होंने कहा कि देश के लोगों ने कांग्रेस के विश्वासघात के बाद अपना भरोसा एनडीए को सौंपा था और उस भरोसे को एनडीए परिवार ने हमेशा मजबूत किया है।
जरूरी FAQ
'हिंदू ग्रोथ रेट' क्या है और इसे यह नाम क्यों दिया गया?
'हिंदू ग्रोथ रेट' एक आर्थिक पद है जिसे भारतीय अर्थशास्त्री राज कृष्ण ने 1978 में दिया था। इसका मतलब है वह धीमी सालाना वृद्धि दर जो भारत में 1950 से लगभग 1980 तक रही यानी करीब 3 से 3.5 प्रतिशत। इसे यह नाम इसलिए नहीं दिया गया क्योंकि हिंदू धर्म से इसका कोई संबंध है बल्कि यह उस दौर की भारतीय (Hindu = Indus यानी Indian, पुराने अर्थ में) अर्थव्यवस्था की विशेषता थी। पीएम मोदी ने इसे कांग्रेस की नाकामी का नाम बताते हुए कहा कि इसका असली नाम 'कांग्रेस ग्रोथ रेट' होना चाहिए था।
पीएम मोदी ने NDA कॉन्क्लेव में क्या मुख्य बातें कहीं?
10 जून 2026 को दिल्ली के भारत मंडपम में NDA कॉन्क्लेव में पीएम मोदी ने कहा कि 12 साल के शासन में जो हुआ वह कांग्रेस के दशकों में क्यों नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि एक व्यवस्था लोगों को इंतजार कराती थी, आज की व्यवस्था परिणाम दिखाती है। कांग्रेस शासन में घोटालों और अस्थिरता का दौर था जबकि आज भारत दुनिया की सबसे तेज बड़ी अर्थव्यवस्था बनते हुए 7.7 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है।
PM मोदी भारत के सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने वाले नेता कैसे बने?
पीएम नरेंद्र मोदी ने 26 मई 2014 को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। 2019 में दोबारा और 2024 में तीसरी बार जीतकर वे लगातार सत्ता में रहे। 10 जून 2026 को उन्होंने निरंतर निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में 12 साल पूरे किए। इससे पहले यह रिकॉर्ड पंडित जवाहरलाल नेहरू के नाम था जो लगातार 17 साल प्रधानमंत्री रहे थे, लेकिन मोदी ने अटल बिहारी वाजपेयी के 6 साल के रिकॉर्ड को पहले ही पार कर लिया था।
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