मेजर नव्या शेखावत बनी राष्ट्रपति की पहली महिला ADC, जानिए कौन हैं ये ?
इतिहास कभी-कभी बिना शोरगुल के, सिर्फ समर्पण के दम पर बदल जाता है। मेजर नव्या शेखावत की उपलब्धि भी कुछ ऐसी ही है। उन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का एड-डी-कैंप यानी ADC नियुक्त किया गया है, जो भारतीय सेना में महिला अधिकारियों के लिए एक अहम पड़ाव है। यह उपलब्धि उनकी काबिलियत, नेतृत्व क्षमता और वर्षों की अनुशासित सेवा को मान्यता देती है। साथ ही यह सशस्त्र बलों की समान अवसर देने की बढ़ती प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है।
मेजर नव्या शेखावत वर्तमान में आर्मी सर्विस कोर में सेवारत हैं। चयन के बाद वे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की एड-डी-कैंप बनीं। उनकी यह नियुक्ति भारतीय सेना के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुई है, क्योंकि वे इस पद को संभालने वाली पहली महिला सेना अधिकारी बनी हैं। हालांकि वे इस पद तक पहुंचने वाली दूसरी महिला अधिकारी हैं। इससे पहले लेफ्टिनेंट कमांडर यशस्वी सोलंकी ने साल 2025 में यह उपलब्धि हासिल की थी।
कैसे राष्ट्रपति भवन तक पहुंचीं मेजर नव्या
मेजर शेखावत साल 2026 में राष्ट्रपति भवन में अपनी आधिकारिक जिम्मेदारियां निभा रही हैं। वे विभिन्न औपचारिक और आधिकारिक कार्यक्रमों में भारतीय सेना का प्रतिनिधित्व करती हैं। उनकी यह नियुक्ति महिला अधिकारियों के लिए बढ़ते अवसरों को भी दिखाती है।
उनका सैन्य करियर कंबाइंड डिफेंस सर्विसेज परीक्षा यानी CDS से शुरू हुआ था। यह राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा हर साल संघ लोक सेवा आयोग यानी UPSC आयोजित करता है। उन्होंने इस परीक्षा के जरिए शॉर्ट सर्विस कमीशन के लिए सफलतापूर्वक चयन हासिल किया और ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी की मेरिट लिस्ट में जगह बनाई।
इसके बाद उन्होंने चेन्नई स्थित OTA में अफसर प्रशिक्षण पूरा किया। यह एक कठिन प्रशिक्षण कार्यक्रम है, जो नेतृत्व, अनुशासन और सहनशक्ति पर केंद्रित होता है। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उन्हें आर्मी सर्विस कोर में कमीशन मिला। यह विंग लॉजिस्टिक्स, परिवहन और परिचालन आपूर्ति जैसी जिम्मेदारियां संभालती है, जो देशभर में सैन्य तैयारियों के लिए बेहद जरूरी मानी जाती हैं।
क्यों खास है मेजर नव्या शेखावत की कहानी
उनका करियर सिर्फ कुछ ही सालों में तेजी से आगे बढ़ा है। उन्हें 2021 के मध्य में कमीशन मिला था और उसके बाद उन्होंने जल्द ही मेजर के पद तक प्रमोशन हासिल कर लिया। उनकी यह प्रगति लगातार अच्छे प्रदर्शन और नेतृत्व क्षमता को दर्शाती है।
राष्ट्रपति की ADC के तौर पर उनका चयन भी उनकी इन्हीं पेशेवर खूबियों को मान्यता देता है। यह नियुक्ति दिखाती है कि उनकी क्षमताओं पर आधिकारिक तौर पर कितना भरोसा जताया गया है। उनकी यात्रा यह भी साबित करती है कि उत्कृष्टता किसी खास सेवा शाखा तक सीमित नहीं होती, बल्कि बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों को उनकी शुरुआती नियुक्ति से परे भी बड़े अवसर मिलते हैं।
कौन थे पूर्व एडीसी मेजर ऋषभ सिंह संब्याल
एड-डी-कैंप (ADC) के रूप में तैनात मेजर ऋषभ सिंह संब्याल जम्मू-कश्मीर के सांबा जिले के रहने वाले हैं। उनका परिवार देशभक्ति के माहौल से जुड़ा रहा है। बचपन से ही उनका सपना भारतीय सेना में शामिल होकर देश की सेवा करना था। इसी लक्ष्य को पूरा करने के लिए उन्होंने सैन्य शिक्षा का रास्ता चुना और सेना में जाने की तैयारी शुरू की।
ऋषभ सिंह संब्याल ने अपनी शुरुआती पढ़ाई सैनिक स्कूल कपूरथला से की। उन्होंने साल 2013 में नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) की परीक्षा पास की और 2014 में NDA के 133वें कोर्स में शामिल हुए। इसके बाद 2017 में उन्होंने इंडियन मिलिट्री एकेडमी में प्रवेश लिया और 2018 में जाट रेजिमेंट में कमीशन प्राप्त किया। सेवा के दौरान उन्हें 2021 में जाट रेजिमेंट की टुकड़ी का नेतृत्व करने का मौका मिला। इस दौरान उनकी टुकड़ी को बेहतरीन प्रदर्शन के लिए बेस्ट मार्चिंग कंटिजेंट का सम्मान मिला। वे 4 पैरा स्पेशल फोर्स का हिस्सा भी रह चुके हैं।
2023 में बने राष्ट्रपति के एडीसी
सेना में उनके अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और शानदार सेवा रिकॉर्ड को देखते हुए साल 2023 में उन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का एड-डी-कैंप नियुक्त किया गया। इस जिम्मेदारी में उन्होंने राष्ट्रपति की सुरक्षा, प्रोटोकॉल, आधिकारिक कार्यक्रमों और यात्राओं से जुड़ी अहम जिम्मेदारियां संभालीं।
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