बाबा नीब करौली की संपत्ति पर विवाद: पोतियों का आरोप, घर-मंदिर पर ट्रस्ट का कब्जा

Sanjay Dhiman | Aug 26, 2026, 17:11 IST
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फिरोजाबाद में बाबा नीब करौली की जन्मस्थली को लेकर विवाद। छह पोतियों ने डीएम से शिकायत की, ट्रस्ट पर कब्जे का आरोप लगाया। जांच के आदेश दिए गए।

फिरोजाबाद के अकबरपुर गांव में बाबा नीब करौली की पैतृक संपत्ति पर विवाद है। बाबा के छोटे बेटे की छह बेटियों ने डीएम को पत्र लिखा है। उनका आरोप है कि घर और मंदिर ट्रस्ट को दान नहीं किया गया था। इसके बावजूद ट्रस्ट वहां कब्जा जमाए हुए है। जिलाधिकारी ने अब पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं।



विवाद की जड़ में क्या है

बाबा नीम करौली को देश-दुनिया में लाखों श्रद्धालु मानते हैं। उनकी सबसे बड़ी पहचान नैनीताल के कैंची धाम से जुड़ी है। लेकिन उनकी जन्मभूमि फिरोजाबाद के अकबरपुर गांव में है। यहीं बाबा का पुराना घर, मंदिर और डाक बंगलिया की संपत्ति है। इसी संपत्ति को लेकर अब परिवार और ट्रस्ट आमने-सामने आ गए हैं।



परिवार का आरोप क्या है

बाबा के छोटे बेटे धर्म नारायण शर्मा की छह बेटियों ने डीएम को शिकायत भेजी है। उनका कहना है कि परिवार का घर और मंदिर कभी ट्रस्ट को दान नहीं किया गया। फिर भी ट्रस्ट संपत्ति पर कब्जा जमाए बैठा है। परिवार ने मांग की है कि दस्तावेजों की जांच हो। साथ ही ट्रस्ट का संचालन भी परिवार को सौंपा जाए, जब तक स्थिति साफ न हो।



डीएम ने दिए जांच के आदेश

शिकायत मिलते ही जिलाधिकारी ने जांच के निर्देश दे दिए। अब यह देखा जाएगा कि संपत्ति असल में किसके नाम है। स्वामित्व से जुड़े दस्तावेज खंगाले जाएंगे। यह भी जांचा जाएगा कि संपत्ति विधिवत तरीके से ट्रस्ट को सौंपी गई थी या नहीं।



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परिवार की पूरी पृष्ठभूमि

बाबा नीब करौली का असली नाम लक्ष्मी नारायण शर्मा बताया जाता है। उनका जन्म अकबरपुर के एक संपन्न परिवार में हुआ था। परिवार में दो बेटे और एक बेटी थे। बड़े बेटे अनेक शर्मा, छोटे बेटे धर्म नारायण शर्मा और बेटी गिरिजा देवी। बड़े बेटे के एक बेटा और एक बेटी हैं। छोटे बेटे की छह बेटियां हैं, जिन्होंने अब शिकायत दर्ज कराई है।



ट्रस्ट का पलटवार आया सामने

ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष मनोज अग्रवाल ने परिवार के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि घर, मंदिर और डाक बंगलिया ट्रस्ट को ही दिए गए थे। उनका तर्क है कि अगर संपत्ति दान नहीं हुई होती, तो ट्रस्ट इतने सालों से देखरेख क्यों करता। ट्रस्ट का दावा है कि वहां वर्षों से धार्मिक गतिविधियां चल रही हैं।



उत्तराखंड से क्या है कनेक्शन

यह विवाद उत्तराखंड के लिए भी अहम है। बाबा नीम करौरी का सबसे मशहूर आश्रम नैनीताल के कैंची धाम में है। बाबा ने 15 जून 1964 को यहां आश्रम बनाया था। आज कैंची धाम दुनियाभर के श्रद्धालुओं का केंद्र है। अमेरिका सहित कई देशों से लोग यहां आते हैं। अकबरपुर बाबा की जन्मभूमि है और कैंची धाम कर्मभूमि। इसी वजह से दोनों जगहों का भावनात्मक जुड़ाव माना जाता है।



धार्मिक पर्यटन केंद्र बनाने की तैयारी

फिरोजाबाद प्रशासन अकबरपुर को भी विकसित करने में जुटा है। यहां पर्यटन सुविधाएं बढ़ाने की योजना है। प्रशासन जन्मस्थली परिसर का निरीक्षण भी कर चुका है। अकबरपुर का नाम बदलकर बाबा नीम करौरी धाम करने का प्रस्ताव भी भेजा गया है। यही कारण है कि संपत्ति विवाद अब और संवेदनशील हो गया है।



आगे क्या होने की उम्मीद

अब सबकी नजर प्रशासनिक जांच पर टिकी है। दस्तावेजों की पड़ताल के बाद ही साफ होगा कि संपत्ति किसकी है। परिवार और ट्रस्ट, दोनों पक्ष जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं। जब तक रिपोर्ट नहीं आती, विवाद सुलझने की उम्मीद कम है।



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