NEET UG 2026 Re-Exam: अगले साल से CBT मोड में एग्जाम देंगे नीट के छात्र, OMR सिस्टम होगा खत्म

Kaushiki | May 15, 2026, 11:20 IST
NEET UG 2026
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने नीट यूजी परीक्षा को अगले साल से ऑनलाइन (CBT) मोड में कराने का फैसला लिया है। पेपर लीक रोकने के लिए ओएमआर सिस्टम खत्म होगा। साल 2026 का री-एग्जाम 21 जून को होगा, जिसमें छात्रों को कई विशेष सुविधाएं दी जाएंगी।

समझें क्या है पूरा मामला

  • अगले साल (2027) से नीट परीक्षा अब पेन-पेपर की जगह कंप्यूटर पर ऑनलाइन (CBT) आयोजित होगी।
  • पेपर लीक की घटनाओं को रोकने के लिए सरकार ने यह कड़ा कदम उठाया है।
  • इस साल रद्द हुई परीक्षा अब 21 जून 2026 को दोबारा आयोजित की जाएगी।
  • री-एग्जाम देने वाले छात्रों से कोई फीस नहीं ली जाएगी और समय भी बढ़ाया गया है।
  • सीबीआई अब इस पूरे पेपर लीक कांड की जड़ों तक जाकर दोषियों को सजा देगी।

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आज (15 मई) एक बड़ी घोषणा की है। NEET-UG परीक्षा में अब बड़ा बदलाव होने वाला है। अगले साल (2027) से अब नीट भी JEE की तरह कंप्यूटर पर होगी। यानी अब CBT (Computer Based Exam) ऑनलाइन परीक्षा होगी। पेपर लीक रोकने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है।



एनटीए के सिस्टम में सुधार करना अब सरकार की प्राथमिकता है। इसका मकसद परीक्षा में पारदर्शिता बढ़ाना और पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकना है। जैसे JEE में होता है, नीट में भी 'Normalisation' लागू होगी। इससे छात्रों को अपनी परफॉर्मेंस सुधारने का मौका मिलेगा। शिक्षा मंत्रालय का कहना है कि डिजिटल मोड से परीक्षा ज्यादा सुरक्षित और एरर-फ्री होगी। आइए जानें धर्मेंद्र प्रधान ने और क्या-क्या कहा।



21 जून को होगा नीट का री-एग्जाम

इस साल की नीट परीक्षा अब दोबारा आयोजित होगी। एनटीए ने इसके लिए 21 जून की तारीख तय की है। यह फैसला गुरुवार को एक हाई-लेवल बैठक में हुआ।



यह बैठक शिक्षा मंत्री के आवास पर हुई थी। इसमें उच्च शिक्षा और स्कूली शिक्षा के बड़े सचिव शामिल थे। सरकार चाहती है कि परीक्षा पूरी तरह पारदर्शी हो।



छात्रों को मिलेंगी ये खास सुविधाएं

री-एग्जाम देने वाले छात्रों को कई बड़ी राहतें मिलेंगी। पहली बात यह कि दोबारा परीक्षा की कोई फीस नहीं होगी। छात्रों को मनपसंद शहर चुनने का पूरा मौका मिलेगा।



परीक्षा का समय भी 15 मिनट बढ़ा दिया गया है। एडमिट कार्ड 14 जून तक जारी कर दिए जाएंगे। छात्रों के आने-जाने की व्यवस्था भी सरकार देखेगी।



छात्रों का भरोसा जीतना जरूरी है

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आज (15 मई) प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपनी बात रखी। उन्होंने माना कि परीक्षा प्रणाली में कमियां रही हैं। प्रधान ने कहा कि हम एनटीए में सुधार करेंगे। किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।



सीबीआई अब इस मामले की एक-एक कड़ी जोड़ेगी। उन्होंने छात्रों से बिना डरे परीक्षा देने की अपील की। हम माफियाओं को आपका हक नहीं छीनने देंगे।



क्या हैं NEET और JEE

NEET-UG मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन के लिए होने वाली राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षा है। यह परीक्षा पेन और पेपर मोड में होती है। इसका आयोजन National Testing Agency (NTA) करता है। परीक्षा 13 भाषाओं अंग्रेजी, हिंदी, असमिया, बंगाली, गुजराती, कन्नड़, मलयालम, मराठी, ओड़िया, पंजाबी, तमिल, तेलुगु और उर्दू में आयोजित की जाती है।



वहीं, JEE Main इंजीनियरिंग और केंद्र सरकार के वित्त पोषित तकनीकी संस्थानों में दाखिले के लिए आयोजित होती है। JEE Main पास करने वाले विद्यार्थी IIT में प्रवेश के लिए JEE Advanced दे सकते हैं। JEE Main का आयोजन NTA करता है, जबकि JEE Advanced पूरी तरह IITs कराते हैं।



सबसे बड़ा फर्क तो यह है...

NEET और JEE के बीच सबसे बड़ा अंतर परीक्षा के मोड का है। NEET अभी भी पेन-पेपर आधारित परीक्षा है, जबकि JEE कंप्यूटर आधारित टेस्ट है। यही वजह है कि NEET में पेपर लीक का खतरा ज्यादा माना जाता है। ऑफलाइन परीक्षा में प्रश्नपत्र छापने से लेकर उसे ट्रांसपोर्ट करने और परीक्षा केंद्र तक पहुंचाने तक कई ऐसे पॉइंट होते हैं, जहां से पेपर बाहर जा सकता है।



इसके उलट ऑनलाइन परीक्षा में प्रश्नपत्र की फिजिकल कॉपी नहीं होती। न प्रिंटिंग प्रेस की जरूरत पड़ती है, न ट्रांसपोर्ट एजेंसियों की। प्रश्नपत्र तय समय पर सभी केंद्रों पर एक साथ सिस्टम में खुलता है। इससे लीक की संभावना काफी कम हो जाती है।



क्या ऑनलाइन परीक्षा सुरक्षित होती है

विशेषज्ञों के मुताबिक ऑनलाइन परीक्षाओं में भी गड़बड़ियां हो सकती हैं, लेकिन उन्हें आमतौर पर ज्यादा सुरक्षित माना जाता है। इन परीक्षाओं का प्रश्नपत्र कोई एक व्यक्ति तैयार नहीं करता। कई विशेषज्ञ अलग-अलग कठिनाई स्तर के सवालों का बड़ा बैंक तैयार करते हैं। इसके बाद सिस्टम खुद तय करता है कि किस तरह के कितने सवाल शामिल किए जाएंगे।



सबसे अहम बात यह है कि प्रश्नपत्र सभी केंद्रों पर एक साथ खुलता है। इससे एक केंद्र से दूसरे केंद्र तक पेपर पहुंचाने या लीक करने का खतरा कम हो जाता है। स्वास्थ्य मंत्रालय एक अधिकारी के मुताबिक, जब प्रश्नपत्र फिजिकली पूरे देश में भेजे जाते हैं, तब सुरक्षा कितनी भी मजबूत हो, लीक होने के कई मौके बन जाते हैं।



पेपर प्रिंटिंग एजेंसी से भी बाहर जा सकता है और उसे ले जाने वाले वाहन से भी। उन्होंने कहा, NEET बेहद हाई-स्टेक परीक्षा है। ऐसे लोग हमेशा मौजूद रहते हैं, जो पेपर पाने के लिए बड़ी रकम खर्च करने को तैयार रहते हैं।



आखिर NEET में दांव इतना बड़ा क्यों है

NEET मेडिकल कॉलेज में प्रवेश का लगभग एकमात्र रास्ता है। हर साल करीब 23 लाख छात्र सिर्फ लगभग 1 लाख मेडिकल सीटों के लिए परीक्षा देते हैं। मुकाबला इतना कड़ा इसलिए भी है, क्योंकि छात्रों की पहली पसंद सरकारी मेडिकल कॉलेज होते हैं।



देश की करीब आधी मेडिकल सीटें सरकारी कॉलेजों में हैं, जहां फीस बहुत कम होती है। इसके उलट निजी मेडिकल कॉलेजों की फीस कई बार करोड़ों रुपए तक पहुंच जाती है। ऐसे में एक सीट के लिए दबाव और प्रतिस्पर्धा बेहद बढ़ जाती है।



2026 में क्या हुआ?

इस बार का नीट यूजी एग्जाम 3 मई को हुआ था। करीब 22 लाख स्टूडेंट्स इसमें शामिल हुए। पेपर के तुरंत बाद गड़बड़ियों की शिकायतें आने लगीं। आरोप ​है कि पेपर छपने से पहले बायोलॉजी के 90 और केमिस्ट्री के 30 सवाल लीक हो गए।



इस लीक (नीट यूजी 2026 रद्द)के तार जयपुर से जुड़े। राजस्थान की एसओजी एक्टिव हुई और जांच सीकर तक पहुंची। एसओजी ने पता लगाया कि एग्जाम से दो दिन पहले कुछ हैंडरिटन गेस पेपर सीकर के स्टूडेंट्स के पास पहुंचे थे। 720 में से 480 नंबर के सवाल हूबहू मैच कर रहे थे। जांच आगे बढ़ी तो केरल और देहरादून का नाम सामने आया।



राजस्थान एसओजी ने राकेश मंडावरिया का नाम लिया, जो सीकर का रहने वाला है। पुलिस के मुताबिक उसने देहरादून से गेस पेपर चूरू में एक एमबीबीएस स्टूडेंट को शेयर किया, जो केरल में पढ़ाई कर रहा था।



इसके बाद सामने आया कि गेस पेपर सीकर के एक पीजी ओनर तक पहुंचा और उसके जरिए दूसरे स्टूडेंट्स तक गया। फिर WhatsApp और Telegram पर शेयर की पूरी ट्रेल बन गई थी। अब मामले की जांच की जा रही है।



पेपर लीक के पीछे माफियाओं का बड़ा हाथ

3 मई को हुई नीट यूजी 2026 परीक्षामें बड़ी गड़बड़ी मिली थी। 7 मई को पहली बार इस बारे में शिकायत मिली। जांच में पता चला कि गेस पेपर असली थे। असली प्रश्नपत्र वास्तव में माफियाओं ने लीक किए थे। इसके तार कई राज्यों से जुड़े हुए मिले हैं। सीबीआई ने अब तक 7 आरोपियों को पकड़ा है। अब एजेंसी एनटीए के भीतर की मिलीभगत जांचेगी।



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