खाली बैठा भारत का GEN-Z: देश में 8.7 करोड़ युवा बेरोजगार, ना पढ़ाई और ना नौकरी
नीति आयोग ने एक नई रिपोर्ट जारी की है। इसमें भारत के युवाओं को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। देश में करीब 8.7 करोड़ युवा ना पढ़ाई कर रहे हैं ना नौकरी। ये युवा 15 से 29 साल की उम्र के हैं। रिपोर्ट में इनकी मदद के लिए कई सुझाव भी दिए गए हैं।
8.7 करोड़ युवा किस हाल में हैं
नीति आयोग की रिपोर्ट देश के युवाओं की असली तस्वीर दिखाती है। इसमें बताया गया है कि लाखों युवा ना तो स्कूल कॉलेज जा रहे हैं। ना उनके पास कोई नौकरी है। ना वे किसी तरह की ट्रेनिंग ले रहे हैं।
ऐसे युवाओं को खास श्रेणी में रखा गया है। इसे NEET कहा जाता है (NEET – Not in Education, Employment, and Training)। भारत में इस श्रेणी में करीब 8.7 करोड़ युवा आते हैं। यह आंकड़ा साल 2021 के सर्वे पर आधारित है।
नीति आयोग ने साफ किया है कि यह अनुमान राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण से लिया गया है (NSS – National Sample Survey)। यह सर्वे 2021 में हुआ था। इसका 78वां दौर इस रिपोर्ट का आधार बना है।
रिपोर्ट का नाम और मकसद
यह रिपोर्ट 'Reimagining Skilling for Viksit Bharat@2047' नाम से जारी हुई है। इसका मकसद युवाओं को सही ट्रेनिंग और रोजगार से जोड़ना है। आयोग चाहता है कि 2047 तक भारत विकसित देश बने। इसके लिए युवाओं की भागीदारी जरूरी है।
रिपोर्ट में देश के वर्कफोर्स को पांच हिस्सों में बांटा गया है। पहला हिस्सा स्कूली शिक्षा से जुड़े छात्रों का है। दूसरा हिस्सा उच्च शिक्षा वाले छात्रों का है। तीसरा हिस्सा औपचारिक और अनौपचारिक नौकरी करने वालों का है। चौथा हिस्सा NEET युवाओं का है। पांचवां हिस्सा महिलाओं और कमाई के साथ पढ़ाई करने वालों का है।
पैसों की कमी बनी सबसे बड़ी रुकावट
रिपोर्ट के अनुसार NEET श्रेणी के युवा आर्थिक तंगी से जूझते हैं। पहले की पढ़ाई पर पहले ही काफी पैसा खर्च हो चुका होता है। ऐसे में नई ट्रेनिंग का खर्च उठाना मुश्किल हो जाता है।
महंगे स्किल कोर्स इन युवाओं की पहुंच से बाहर हो जाते हैं। आयोग का कहना है कि इन्हें सस्ती या मुफ्त ट्रेनिंग चाहिए। साथ ही वित्तीय सहायता भी जरूरी है।
रिपोर्ट में एक अहम बात पर जोर दिया गया है। हर श्रेणी के युवा को सीखते हुए कमाने का मौका मिलना चाहिए। इससे वे बीच में पढ़ाई नहीं छोड़ेंगे।
डिग्री लेकर भी खाली हाथ
रिपोर्ट में एक और चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है। भारत में सिर्फ 8.25 प्रतिशत स्नातक ही अपनी पढ़ाई के हिसाब से नौकरी पाते हैं। बाकी युवाओं को या तो कम वेतन वाली नौकरी करनी पड़ती है। या फिर वे बेरोजगार रह जाते हैं।
गरीब परिवारों के छात्रों की स्थिति और मुश्किल है। कॉलेज फीस चुकाने में ही उनका बजट बिगड़ जाता है। अलग से स्किल ट्रेनिंग पर खर्च करना उनके लिए संभव नहीं होता। परिवार का सहारा बनने के लिए वे मजबूरी में कम सैलरी वाली नौकरी अपना लेते हैं। कई बार उन्हें कोई नौकरी ही नहीं मिलती। ऐसे में वे धीरे धीरे NEET श्रेणी में शामिल हो जाते हैं।
अब तक कितनों को मिली ट्रेनिंग
नीति आयोग ने अपनी उपलब्धि भी गिनाई है। साल 2014-15 से अब तक 7.67 करोड़ से ज्यादा लोगों को ट्रेनिंग दी जा चुकी है। यह आंकड़ा बड़ा जरूर है, लेकिन जरूरत उससे कहीं ज्यादा है।
आयोग ने माना है कि आगे की राह आसान नहीं है। स्किलिंग को स्थानीय जरूरतों से जोड़ना होगा। नए और उभरते सेक्टर में ट्रेनिंग देनी होगी। स्वरोजगार को भी बढ़ावा देना होगा। तभी विकसित भारत का सपना पूरा हो सकेगा।
FAQ
- NEET श्रेणी का मतलब क्या है?
NEET(NEET – Not in Education, Employment, and Training) का मतलब है जो युवा ना पढ़ाई कर रहे हैं, ना नौकरी कर रहे हैं, ना ट्रेनिंग ले रहे हैं। भारत में ऐसे युवाओं की संख्या करीब 8.7 करोड़ है। यह आंकड़ा नीति आयोग की रिपोर्ट से आया है। - नीति आयोग का आंकड़ा किस सर्वे पर आधारित है?
यह आंकड़ा साल 2021 के राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण पर आधारित है। इसका 78वां दौर इस्तेमाल किया गया है। नीति आयोग ने खुद इसकी पुष्टि की है। - कितने ग्रेजुएट को सही नौकरी मिलती है?
रिपोर्ट के अनुसार सिर्फ 8.25 प्रतिशत स्नातक ही योग्यता के अनुसार नौकरी पाते हैं। बाकी को कम वेतन वाला काम करना पड़ता है। कई बेरोजगार भी रह जाते हैं।
यह खबरें भी पढ़ें...
एमपी में MBBS पढ़ना हुआ महंगा: मेडिकल फीस में 10% बढ़ोत्तरी, जानें नया स्ट्रकचर
शक्कर 75 रुपए किलो, मंत्री राकेश शुक्ला बोले शक्कर छोड़ो, वंदेमातरम पर बात करो
MP का हेल्थ कार्ड, सबसे ज्यादा शराब पीती हैं आलीराजपुर की महिलाएं, इंदौर में बढ़ा मोटापा
84 हजार करोड़ से बदलेगी तस्वीर, समुद्र मंथन स्कीम से गहरे पानी में तेल ढूंढेगी सरकार
National Sample Survey Office