आखिर कौन हैं नेहा बोरा, जो जंतर-मंतर पर Gen Z Aandolan में बन गई विद्रोह की आवाज

Manya Jain | Sootr Creatives | Oct 04, 2026, 18:07 IST
कौन हैं नेहा बोरा: Gen Z Protest का चर्चित चेहरा
नेहा बोरा आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष और जेएनयू की पीएचडी रिसर्चर हैं। जंतर-मंतर पर 23 दिन की भूख हड़ताल के बाद वे Gen Z protest का चर्चित चेहरा बनीं। कौन हैं नेहा बोरा, यह सवाल अब रांची की स्याही और अभिजीत दीपके की सराहना तक पहुंच गया है। जानिए AISA president के सफर की पूरी कहानी, पढ़ाई, थिएटर और आंदोलनों के साथ।

समझें क्या है पूरा मामला

  • नेहा बोरा वामपंथी छात्र संगठन ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं।
  • वे नीट पेपर लीक के विरोध में 23 दिन भूख हड़ताल पर बैठीं थी।
  • इसके बाद वे जेन-जी आंदोलन के सबसे चर्चित चेहरों में गिनी जाने लगीं।
  • अगस्त 2026 में रांची के विधानसभा मार्च के दौरान उन पर स्याही फेंकी गई थी।
  • हाल में अभिजीत दीपके की एक री-पोस्ट से वे फिर सुर्खियों में आ गईं।

नेहा बोरा कौन हैं और कहां से आईं

नेहा बोरा मूल रूप से उत्तराखंड के खटीमा की रहने वाली हैं। उनके पिता भारतीय सेना में रहे। इसी वजह से बचपन देश के अलग-अलग शहरों में बीता। नेहा बोरा ने शुरुआती पढ़ाई सिलीगुड़ी के दिल्ली पब्लिक स्कूल में हुई।



उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से समाजशास्त्र में स्नातक किया। इसके बाद डॉ. बीआर आंबेडकर विश्वविद्यालय, दिल्ली से मास्टर डिग्री ली। अभी वे जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में पीएचडी कर रही हैं। विभाग है स्कूल ऑफ आर्ट्स एंड एस्थेटिक्स।



थिएटर से आंदोलन तक का रास्ता

नेहा रंगकर्मी भी हैं। उन्होंने नुक्कड़ नाटक (सड़क पर होने वाला नाटक) के जरिए सामाजिक मुद्दे उठाए।



एक रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने स्कूली पढ़ाई के बाद एक्टिविज्म शुरू कर दिया। कॉलेज की शुरुआत में वे आइसा से जुड़ गईं। नेतृत्व क्षमता देखकर संगठन ने उन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना।



जंतर-मंतर पर 23 दिन क्या हुआ

नीट (राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा) में कथित धांधली पर जंतर-मंतर में आंदोलन हुआ। नेहा इसका मुख्य चेहरा बनकर उभरीं। उन्होंने सोनम वांगचुक और अन्य छात्र नेताओं के साथ अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की।



यह हड़ताल 23 दिन चली। इस दौरान उनकी तबीयत काफी बिगड़ गई। कॉकरोच जनता पार्टी के बैनर तले देशभर के छात्र जुटे। मांगों में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा और परीक्षा सुधार शामिल थे।



रिपोर्ट के मुताबिक आंदोलन का नतीजा प्रधान के इस्तीफे के रूप में सामने आया। इसके बाद आयोजकों ने आंदोलन रोकने की घोषणा की।



रांची में क्यों पहुंचीं नेहा बोरा

अगस्त 2026 में रांची में परीक्षाओं में कथित धांधली के खिलाफ विधानसभा मार्च निकला। मामला जेपीएससी (JPSC – झारखंड लोक सेवा आयोग) की परीक्षा का था। साथ में जेएसएससी (JSSC – झारखंड कर्मचारी चयन आयोग) की परीक्षा भी थी। नेहा छात्रों के समर्थन में रांची पहुंचीं। मार्च के दौरान उन पर स्याही फेंकी गई। कुछ अभ्यर्थी आइसा के इस समर्थन से खुश नहीं दिखे।



स्याही फेंके जाने पर क्या बोलीं नेहा

नेहा के मुताबिक जेपीएससी परीक्षा रद्द कराने का आंदोलन चल रहा था। कुछ लोग उसे डिस्टर्ब (बाधित) करना चाहते थे। सितंबर 2026 में प्रयागराज में टीजीटी-पीजीटी अभ्यर्थी अनशन पर बैठे थे। उनकी मांग पुरानी नियमावली लागू करने की थी। नेहा ने इस आंदोलन को समर्थन दिया था।



सड़क पर क्यों लेट गईं नेहा बोरा

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर जंतर-मंतर में प्रदर्शन हुआ। वोटर लिस्ट संशोधन (एसआईआर) प्रक्रिया का विरोध भी इसका हिस्सा था। आइसा, कॉकरोच जनता पार्टी और विपक्षी दल इसमें शामिल थे। प्रदर्शन के दौरान नेहा सड़क पर लेट गईं।



दिल्ली पुलिस की महिला कर्मियों ने उन्हें खींचकर पुलिस वैन में बैठाया। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ। नेहा का आरोप है कि पुलिस ने शांतिपूर्ण छात्रों पर बल प्रयोग किया। इसके बाद उन्हें हिरासत में लिया गया। वेबदुनिया की रिपोर्ट में पुलिस का पक्ष शामिल नहीं है।



जेन जी राजनीति का चर्चित चेहरा क्यों

नेहा जेन जी राजनीति का चर्चित चेहरा बनकर उभरी हैं। Gen Z protest के इस दौर में उनका नाम छात्र मुद्दों से जुड़ा है। AISA president के तौर पर वे शिक्षा सुधार की बात उठाती रही हैं।



अभिजीत दीपके की सराहना पर बहस

एक यूजर ने लिखा, नेहा बोरा अभिजीत दीपके से ज्यादा प्रतिभाशाली हैं। दीपके ने उस पोस्ट को री-पोस्ट करते हुए यही जवाब लिखा।



नेहा बोरा का सफर अभी जारी है। थिएटर के मंच से रांची तक वे छात्रों के मुद्दे उठाती दिखी हैं। आगे वे किस आंदोलन में दिखेंगी? यह देखना बाकी है।



यह खबर क्यों जरूरी है

यह खबर सिर्फ एक छात्र नेता की कहानी नहीं है। यह उस पीढ़ी की बात है, जो परीक्षा, भर्ती और चुनावी प्रक्रिया पर सवाल पूछ रही है। शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 19 में दिया गया है। साथ ही आरोपों पर पुलिस और प्रशासन का पक्ष जानना भी जरूरी है। लोकतंत्र में सवाल पूछना और जवाब सुनना, दोनों बराबर अहम हैं। इसलिए किसी भी नेता के बारे में तथ्य परखकर राय बनाना बेहतर है।

Tags:
  • जेन जी आंदोलन
  • कॉकरोच जनता पार्टी
  • अभिजीत दीपके
  • AISA president
  • कौन है नेहा बोरा
  • AISA
  • नीट पेपर लीक
  • जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय
  • Gen Z Aandolan
  • जंतर-मंतर