नेपाल में बाढ़ से 95 की मौत, 135 भारतीय समेत 500 लोग लापता, बिहार में हाईअलर्ट
समझें क्या है पूरा मामला
- तिब्बत से आई बाढ़ ने नेपाल में भारी तबाही मचाई।
- रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी उफान पर आई।
- हादसे में अब तक 95 लोगों की मौत हुई।
- 500 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।
- लापता लोगों में 135 भारतीय नागरिक शामिल हैं।
नेपाल-तिब्बत बॉर्डर पर बुधवार सुबह अचानक आई बाढ़ से रसुवा जिले में भारी तबाही हुई। तिब्बत की ओर से भोटेकोशी नदी में तेज बहाव आया। नेपाल पुलिस के मुताबिक अब तक 95 लोगों की मौत हो चुकी है। 500 से ज्यादा लोग लापता हैं। इनमें 133 भारतीय और 300 से ज्यादा विदेशी पर्यटक शामिल हैं। अधिकारियों ने फिर बाढ़ का खतरा जताया है। ग्लेशियल झील में करीब सात मीटर ऊंचा पानी जमा है। इसके टूटने से दोबारा बड़ा सैलाब आ सकता है।
रसुवा में मची भारी तबाही
तिब्बत से आई अचानक बाढ़ ने नेपाल के रसुवा जिले में भारी नुकसान पहुंचाया है। भोटेकोशी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से टिमुरे और स्याब्रुबेसी इलाके में कई घर क्षतिग्रस्त हुए हैं।
बाढ़ की चपेट में रसुवा का एक हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट भी आ गया। यह प्रोजेक्ट पूरी तरह बह गया। न्यूज एजेंसी के मुताबिक, अब तक 95 लोगों की मौत हो चुकी है।
500 लोग अब भी लापता
बाढ़ के बाद बड़ी संख्या में लोग लापता हैं। नेपाल के पर्यटन विभाग के मुताबिक, 500 लोगों का पता नहीं चल रहा। इनमें 291 विदेशी पर्यटक शामिल हैं। इनमें से 135 भारतीय नागरिक भी हैं।
दूतावास ने जारी की हेल्पलाइन
भारतीय नागरिकों की मदद के लिए काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने आपातकालीन नंबर जारी किए हैं। प्रभावित लोग +977 985 131 6807 और +977 970 910 7500 पर संपर्क कर सकते हैं।
नेपाल टूरिज्म बोर्ड ने भी मदद के लिए नंबर जारी किए हैं। टोल-फ्री नंबर 1234, हॉटलाइन 1144 और टूरिस्ट पुलिस नंबर 9851289445 पर संपर्क किया जा सकता है।
पीएम मोदी ने जताई संवेदना
नेपाल में बाढ़ से हुई जनहानि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM – Prime Minister) मोदी ने दुख जताया है। उन्होंने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से बात की। जान गंवाने वालों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि भारत इस मुश्किल समय में नेपाल के साथ मजबूती से खड़ा है।
जलविद्युत परियोजना में 60 लोग लापता
नेपाल की 20 मेगावाट क्षमता वाली लांगटांग खोला जलविद्युत परियोजना में काम करने वाले 60 लोग लापता बताए जा रहे हैं। परियोजना के प्रमोटर बिजय मोहन भट्टराई के मुताबिक, इनमें सुरंग में काम कर रहे 35 लोग शामिल हैं। सुबह से इन लोगों से संपर्क नहीं हो पाया है।
हिमस्खलन और भूकंप की भूमिका
शुरुआती आकलन के मुताबिक, एक बर्फीला हिमस्खलन ल्हेंदे नदी में गिरा। इससे नदी का रास्ता रुक गया। पानी जमा होता गया और अचानक नीचे बह निकला। यह पानी आगे भोटेकोशी नदी में जा मिला, जिससे बाढ़ आई।
काठमांडू पोस्ट के मुताबिक लगभग इसी समय तिब्बत में भूकंप भी आया था। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS – United States Geological Survey) के मुताबिक, सुबह 8:37 बजे 4.4 तीव्रता का भूकंप आया। इसका केंद्र गोसाइंकुंड से करीब 47 किलोमीटर उत्तर में था।
ग्लेशियल झील फटने की आशंका
रसुवा में पिछले 24 घंटे में 7 मिमी से ज्यादा बारिश नहीं हुई। इसलिए बाढ़ की वजह स्थानीय बारिश नहीं मानी जा रही। अधिकारियों को शक है कि ग्लेशियल झील फटने (GLOF – Glacial Lake Outburst Flood) से यह बाढ़ आई।
आईसीआईएमओडी-यूएनडीपी (ICIMOD-UNDP) की 2020 की स्टडी के मुताबिक, भोटे कोशी बेसिन में 122 ग्लेशियल झीलें हैं। कौन-सी झील फटी, इसकी अभी पुष्टि नहीं हुई है। सैटेलाइट इमेज और तकनीकी जांच से स्रोत का पता लगाया जा रहा है।
टिमुरे में बाढ़ और भूस्खलन से भारी नुकसान की आशंका है। फिलहाल मौतों और नुकसान का सही आंकड़ा जुटाया जा रहा है।
कैसे हुई घटना की शुरूआत
तिब्बत से आने वाली भोटेकोशी नदी का जलस्तर सुबह 9 बजे अचानक बढ़ गया। कुछ ही समय में नदी ने विकराल रूप ले लिया। सामने आए वीडियो में सैलाब तेजी से आगे बढ़ता दिख रहा है। पानी अपने साथ कई चीजें बहाकर ले गया। बताया जा रहा है नेपाल में आई इस बाढ़ से बिहार में तबाही मच सकती है। यहां पर हाईअलर्ट जारी किया गया है।
अचानक आई बाढ़
नेपाल में न बारिश हुई और न बादल फटा। फिर भी अचानक बड़ा सैलाब आ गया। इसकी वजह अभी साफ नहीं हुई है। विशेषज्ञों ने तिब्बत में ग्लेशियर फटने की आशंका जताई है। काठमांडू यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर रिजन भक्त कायस्थ ने बताया कि शुरुआती जांच में एवलांच की बात सामने आई है। एवलांच से ल्हेंडे नदी का रास्ता रुका। इसके बाद भोटेकोशी नदी में अचानक बाढ़ आई।
FAQ
- नेपाल में आई बाढ़ से कितने लोगों की मौत हुई?
अब तक 17 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। 384 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। - बाढ़ में कितने भारतीय लापता हैं?
लापता 384 लोगों में 291 विदेशी पर्यटक शामिल हैं। इनमें से 105 भारतीय नागरिक हैं। भारतीय दूतावास ने मदद के लिए हेल्पलाइन जारी की है।
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