कौन हैं अमेरिकी अरबपति नेविल रॉय सिंघम, जिन पर लगे भारत में सत्ता परिवर्तन की साजिश के आरोप?
कौन हैं नेविल रॉय सिंघम?
नेविल रॉय सिंघम अमेरिका के जाने-माने टेक कारोबारी हैं। वह आईटी कंसल्टिंग कंपनी थॉटवर्क्स (Thoughtworks) के संस्थापक हैं। उनका जन्म अमेरिका में श्रीलंकाई मूल के परिवार में हुआ था।
सिंघम ने 1993 में थॉटवर्क्स की स्थापना की थी। सॉफ्टवेयर और तकनीकी सेवाओं के क्षेत्र में काम करने वाली इस कंपनी ने धीरे-धीरे कई देशों में अपना कारोबार फैलाया। साल 2017 में सिंघम ने कंपनी बेच दी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह सौदा करीब 785 मिलियन डॉलर में हुआ था। उस समय भारतीय मुद्रा में इसकी कीमत लगभग 5 हजार करोड़ रुपए थी।
कंपनी बेचने के बाद सिंघम सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर काम करने वाले संगठनों को आर्थिक मदद देने लगे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय गैर-लाभकारी संगठनों और थिंक टैंकों को फंडिंग दी। इसी फंडिंग और विभिन्न संगठनों से उनके संबंधों को लेकर बाद में विवाद खड़ा हुआ।
इस विवाद में राहुल गांधी का नाम कैसे आया?
नेविल रॉय सिंघम पर भारत में सत्ता परिवर्तन की कथित साजिश से जुड़े आरोपों के बीच बीजेपी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी सवाल उठाए हैं। बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में विदेशी संगठनों और भारत की राजनीतिक गतिविधियों के बीच कथित संबंधों का जिक्र किया।
दुबे ने सवाल उठाया कि राहुल गांधी पिछले पांच वर्षों में विदेश यात्राओं के दौरान किन लोगों से मिले हैं। उन्होंने यह भी पूछा कि भारत जोड़ो यात्रा और राहुल गांधी की अन्य यात्राओं में विदेशी नेटवर्क से जुड़े कौन-कौन लोग शामिल हुए थे। इसके अलावा उन्होंने क्रिप्टोकरेंसी, ऑनलाइन जुए और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े लोगों के साथ राहुल गांधी के कथित संपर्कों पर भी सवाल किए।
हालांकि उपलब्ध जानकारी में राहुल गांधी और नेविल रॉय सिंघम के बीच सीधे संबंध का कोई प्रमाण सामने नहीं आया है। बीजेपी के आरोपों से किसी संबंध या साजिश की पुष्टि नहीं होती।
सत्ता परिवर्तन का क्या आरोप है?
बीजेपी नेताओं ने विदेशी एक्टिविस्ट नेटवर्क पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि कुछ संगठन विरोध प्रदर्शनों को प्रभावित करते हैं। बीजेपी के अनुसार इन गतिविधियों का इस्तेमाल राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने में हो सकता है। पार्टी ने इसे भारत की चुनी हुई सरकार को अस्थिर करने की कोशिशों से जोड़ा है।
इसी विवाद में नेविल रॉय सिंघम का नाम सामने आया है। बीजेपी नेताओं ने उनकी फंडिंग और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर सवाल उठाए हैं।
101 संगठनों का क्या मामला है?
बीजेपी ने अमेरिकी मीडिया की एक रिपोर्ट के आधार पर सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट में 13 देशों के 101 संगठनों के कथित नेटवर्क का जिक्र है। दावा है कि ये संगठन अलग-अलग देशों में विरोध प्रदर्शनों से जुड़े हैं। इन पर प्रदर्शन आयोजित करने और उनसे जुड़े संदेश फैलाने के आरोप हैं।
बीजेपी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने इस रिपोर्ट का हवाला दिया है। उन्होंने भारत और फ्रांस सहित कई देशों में हुए प्रदर्शनों का जिक्र किया। भंडारी ने इन प्रदर्शनों के पीछे अंतरराष्ट्रीय संगठनों की कथित भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने विदेशी संगठनों और भारत की राजनीतिक गतिविधियों के बीच संबंध होने का दावा किया।
चीन से क्या है सिंघम का संबंध?
नेविल रॉय सिंघम का नाम चीन से जुड़े विवादों में भी आया है। रिपोर्ट्स के अनुसार उन्होंने अपना कामकाज शंघाई में स्थानांतरित किया था। साल 2023 में अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने एक पड़ताल प्रकाशित की। इसमें सिंघम से जुड़े अंतरराष्ट्रीय संगठनों की फंडिंग पर सवाल उठाए गए।
रिपोर्ट में चीन समर्थक विचारों को बढ़ावा देने वाले नेटवर्क का दावा था। इसमें विभिन्न मीडिया संस्थानों और सामाजिक संगठनों का उल्लेख किया गया। अखबार ने इन संगठनों के बीच वित्तीय संबंधों की जानकारी दी। रिपोर्ट में चीनी सरकारी मीडिया से कथित संबंधों का भी जिक्र था।
हालांकि सिंघम ने चीनी सरकार के निर्देश पर काम करने से इनकार किया। उन्होंने किसी राजनीतिक दल के निर्देशों पर काम करने का दावा भी खारिज किया है।
NewsClick से क्या संबंध है?
भारत में सिंघम का नाम सबसे पहले 2023 में बड़े विवाद से जुड़ा था। यह मामला डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म न्यूजक्लिक (NewsClick) से संबंधित था। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में न्यूजक्लिक की फंडिंग का उल्लेख किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार संस्थान को सिंघम से जुड़े नेटवर्क से वित्तीय सहायता मिली थी।
इसके बाद भारतीय जांच एजेंसियों ने वित्तीय लेन-देन की जांच शुरू की। जांच में विदेशी फंडिंग और कथित चीन समर्थक प्रचार के आरोप शामिल थे। अक्टूबर 2023 में दिल्ली पुलिस ने न्यूजक्लिक से जुड़े लोगों पर कार्रवाई की। संस्थापक प्रबीर पुरकायस्थ और एचआर प्रमुख अमित चक्रवर्ती को गिरफ्तार किया गया।
मामले में गैरकानूनी गतिविधियों से जुड़े आरोप लगाए गए थे। हालांकि गिरफ्तारी और आरोप किसी व्यक्ति का दोष साबित नहीं करते। मई 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने पुरकायस्थ की गिरफ्तारी को अवैध ठहराया था। अदालत ने गिरफ्तारी के आधार बताने संबंधी प्रक्रिया में कमी पाई थी।
इस पुराने विवाद के कारण सिंघम का नाम भारतीय राजनीति में चर्चा का विषय बना रहा।
पीपल्स फोरम से सिंघम का क्या रिश्ता है?
नेविल रॉय सिंघम का संबंध अमेरिकी संगठनों की फंडिंग से भी बताया गया है। सीबीएस न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक वह पीपल्स फोरम के प्रमुख वित्तीय समर्थकों में शामिल रहे हैं। पीपल्स फोरम न्यूयॉर्क में स्थित एक गैर-लाभकारी संगठन है। यह मजदूरों और हाशिए पर रहने वाले समुदायों से जुड़े मुद्दों पर काम करता है।
संगठन की गतिविधियों में सामाजिक अभियान और राजनीतिक विषयों पर कार्यक्रम शामिल हैं। सिंघम की पत्नी जोडी इवांस भी सामाजिक आंदोलनों से जुड़ी हैं। वह युद्ध-विरोधी संगठन कोड पिंक (Code Pink) की सह-संस्थापक हैं।
सिंघम से जुड़े संगठनों की विचारधारा और फंडिंग पर पहले भी सवाल उठे हैं।
क्रिप्टोकरेंसी का विवाद क्या है?
बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने क्रिप्टोकरेंसी और ऑनलाइन जुए का भी जिक्र किया। उन्होंने इन क्षेत्रों से जुड़े लोगों और राजनीतिक नेताओं की मुलाकातों पर सवाल उठाए। दुबे ने बिटकॉइन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से संबंधित नेटवर्क का उल्लेख किया। उन्होंने पूछा कि राहुल गांधी किन लोगों के संपर्क में रहे हैं।
अब विवाद क्यों बढ़ रहा है?
देश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर राजनीतिक विवाद जारी है। विपक्षी दल निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं। बीजेपी ने कुछ विरोध प्रदर्शनों को अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों से जोड़कर आरोप लगाए हैं। इसी क्रम में नेविल रॉय सिंघम का नाम फिर सामने आया है।
बीजेपी नेताओं ने कांग्रेस के विदेशी संगठनों से कथित संपर्क पर भी सवाल किए हैं। वहीं राहुल गांधी और सिंघम के बीच सीधा संबंध उपलब्ध सामग्री से स्थापित नहीं होता। फिलहाल यह विवाद राजनीतिक आरोपों और पुरानी जांच रिपोर्टों पर आधारित है। साजिश के आरोप साबित करने के लिए ठोस और स्वतंत्र साक्ष्य जरूरी हैं।
क्या आरोप साबित हुए हैं?
नेविल रॉय सिंघम को लेकर कई सवाल उठाए गए हैं। इनमें विदेशी फंडिंग और चीन से कथित संबंध शामिल हैं। बीजेपी ने इन आरोपों को भारत की राजनीतिक गतिविधियों से जोड़ा है। राहुल गांधी के संपर्कों और यात्राओं को लेकर भी सवाल पूछे गए हैं।
हालांकि उपलब्ध जानकारी किसी साझा सत्ता परिवर्तन की साजिश को साबित नहीं करती। राहुल गांधी और सिंघम के कथित कनेक्शन की भी पुष्टि नहीं हुई है। इस पूरे मामले में राजनीतिक आरोप और प्रमाणित तथ्य अलग-अलग हैं। जांच के निष्कर्ष और आधिकारिक दस्तावेज सामने आने पर ही स्थिति स्पष्ट होगी।