कैंसर की लास्ट स्टेज, फिर भी बचने की उम्मीद, नेक्स्ट जनरेशन सीक्वेंसिंग तकनीक से मिलेगी नई जिंदगी

Amresh Kushwaha | Sept 18, 2026, 16:06 IST
नेक्स्ट जनरेशन सीक्वेंसिंग (NGS) तकनीक से स्टेज-4 मरीजों को नई जिंदगी
कैंसर की एडवांस स्टेज में भी नेक्स्ट जनरेशन सीक्वेंसिंग यानी NGS तकनीक नई उम्मीद बन रही है। यह जीन म्यूटेशन का पता लगाकर सटीक इलाज करती है। एक्सपर्ट के मुताबिक इससे साइड इफेक्ट कम होते हैं और मरीजों की उम्र बढ़ती है। जानिए यह प्रिसिजन मेडिसिन कैसे काम करती है और इसके क्या फायदे हैं।
नेक्स्ट जनरेशन सीक्वेंसिंग (NGS) तकनीक से स्टेज-4 मरीजों को नई जिंदगी

समझें क्या है पूरा मामला...



  • कैंसर के इलाज में नई तकनीक एनजीएस सामने आई है।
  • यह तकनीक कैंसर के जीन म्यूटेशन का पता लगाती है।
  • इससे स्टेज-4 कैंसर मरीजों को भी फायदा मिल रहा है।
  • इस इलाज के लिए अब 50 से ज्यादा नई दवाएं मौजूद हैं।
  • एक्सपर्ट के मुताबिक इससे साइड इफेक्ट भी कम होते हैं।

कैंसर के इलाज में एक नई तकनीक उम्मीद की किरण बनकर आई है। इसका नाम है नेक्स्ट जनरेशन सीक्वेंसिंग यानी एनजीएस (Next Generation Sequencing)। इस तकनीक ने कैंसर के इलाज का पूरा तरीका बदल दिया है। खासकर एडवांस स्टेज यानी स्टेज-4 कैंसर के मरीजों के लिए यह तकनीक बड़ी राहत लेकर आई है। इससे मरीजों की जिंदगी पहले से ज्यादा लंबी चल रही है।



क्या है NGS तकनीक

नेक्स्ट जनरेशन सीक्वेंसिंग की मदद से कैंसर के जीन म्यूटेशन का पता लगाया जाता है। इसके बाद उसी म्यूटेशन के हिसाब से मरीज का इलाज शुरू किया जाता है। यह तकनीक सामान्य कैंसर इलाज से पूरी तरह अलग है। पुराने तरीके में सभी मरीजों को एक जैसा इलाज दिया जाता था। लेकिन एनजीएस के जरिए हर मरीज का इलाज उसकी बीमारी के हिसाब से तय होता है।



एनजीएस टेस्ट में इंसान के डीएनए और जीन की गहराई से जांच की जाती है। इसमें यह देखा जाता है कि शरीर में कैंसर किस जीन म्यूटेशन के कारण बढ़ रहा है। जीन में होने वाली इस गलती को म्यूटेशन कहा जाता है। एक बार म्यूटेशन का पता चलने के बाद उसी के लिए बनी खास दवा से इलाज किया जाता है। यही वजह है कि नेक्स्ट जनरेशन सीक्वेंसिंग तकनीक एडवांस स्टेज में भी असरदार साबित हो रही है।



एक्सपर्ट की राय

इस विषय पर सर गंगा राम अस्पताल के मेडिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के चेयरमैन डॉ. श्याम अग्रवाल ने अपनी राय दी है। उनके मुताबिक नेक्स्ट जनरेशन सीक्वेंसिंग तकनीक ट्यूमर के डीएनए की बारीकी से जांच करती है। इससे वह खास डीएनए कोड पकड़ में आ जाता है, जिसकी वजह से कैंसर की कोशिकाएं शरीर में तेजी से बढ़ती हैं।



डॉ अग्रवाल का कहना है कि इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि हर मरीज का इलाज उसकी बीमारी के हिसाब से किया जाता है। डॉ अग्रवाल के मुताबिक यह तरीका पुराने इलाज से बिल्कुल अलग है।



एनजीएस रिपोर्ट के आधार पर डॉक्टर यह तय कर पाते हैं कि मरीज को कौन सी खास दवा देनी चाहिए। यह दवा सीधे कैंसर की कोशिकाओं पर हमला करती है। साथ ही शरीर की स्वस्थ कोशिकाओं को इससे ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचता। यही वजह है कि डॉक्टर अब इस तकनीक को इलाज में प्राथमिकता दे रहे हैं।



50 से ज्यादा नई दवाएं

इस इलाज के लिए अब 50 से ज्यादा नई दवाएं बाजार में आ चुकी हैं। डॉ अग्रवाल ने बताया कि इनमें से कई दवाएं गोलियों के रूप में दी जाती हैं। वहीं कुछ दवाएं इम्यूनोथेरेपी के जरिए मरीज को दी जाती हैं। यह इलाज सामान्य कीमोथेरेपी की तुलना में कम साइड इफेक्ट वाला माना जा रहा है। इसमें दवाएं सीधे कैंसर पर हमला करती हैं, जिससे स्वस्थ कोशिकाओं को कम नुकसान होता है।



लास्ट स्टेज में फायदा

एडवांस या स्टेज-4 कैंसर के मामलों में सामान्य इलाज अक्सर असर करना बंद कर देता है। ऐसे मामलों में डॉक्टर एनजीएस की मदद लेते हैं। यदि एनजीएस रिपोर्ट में कोई ऐसा म्यूटेशन मिलता है, जिसके लिए दवा पहले से मौजूद है, तो मरीज को वही खास दवा दी जाती है। इससे लास्ट स्टेज के मरीजों में भी ट्यूमर का आकार सिकुड़ने लगता है। साथ ही कैंसर का फैलना भी रुक जाता है।



इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि मरीज की उम्र बढ़ जाती है। पहले जिन मरीजों के लिए इलाज के विकल्प सीमित होते थे, अब उनके लिए भी नई उम्मीद बन गई है। खासकर उन मरीजों के लिए यह तकनीक वरदान साबित हो रही है, जिन पर पुराना इलाज असर नहीं कर रहा था। एनजीएस की मदद से डॉक्टर अब बेहतर तरीके से इलाज की दिशा तय कर पा रहे हैं।



पुराने इलाज से कितना अलग

पुराने कैंसर इलाज और एनजीएस आधारित इलाज में साफ फर्क है। पुराने तरीके में सभी मरीजों को लगभग एक जैसी कीमोथेरेपी दी जाती थी। इससे स्वस्थ कोशिकाओं को भी काफी नुकसान होता था। वहीं एनजीएस आधारित इलाज में दवा सिर्फ कैंसर सेल्स को निशाना बनाती है। इससे मरीज को कम परेशानी होती है और इलाज का असर भी बेहतर दिखता है।



आगे क्या उम्मीद

डॉक्टरों का मानना है कि आने वाले समय में यह तकनीक और भी आम हो जाएगी। जैसे-जैसे नई दवाएं आती जाएंगी, वैसे-वैसे इस इलाज का दायरा भी बढ़ता जाएगा। इससे कैंसर के एडवांस स्टेज में पहुंच चुके मरीजों को भी बेहतर इलाज मिल सकेगा। हालांकि हर मरीज के लिए इलाज का तरीका डॉक्टर की सलाह के बाद ही तय किया जाना चाहिए।



कैंसर जैसी गंभीर बीमारी में समय पर सही जांच बेहद जरूरी होती है। एनजीएस तकनीक इस दिशा में डॉक्टरों के लिए एक मजबूत हथियार बन गई है। हालांकि यह तकनीक सभी अस्पतालों में अभी आसानी से उपलब्ध नहीं है। ऐसे में मरीजों को अपने डॉक्टर से पूरी जानकारी लेकर ही आगे का फैसला लेना चाहिए।

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