NFHS 6 Survey: घर के फैसलों में बढ़ी महिलाओं की भागीदारी, देखें नए आंकड़े

Manya Jain | May 31, 2026, 18:53 IST
NFHS 6 Survey
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 (NFHS-6) के अनुसार, भारत में विवाहित महिलाओं की घरेलू फैसलों में भागीदारी बढ़कर 89% हो गई है। साथ ही, खुद का बैंक खाता इस्तेमाल करने वाली महिलाओं की संख्या भी बढ़ी है।

समझें पूरा मामला...

  • नए एनएफएचएस-6 सर्वे में महिलाओं की स्थिति को लेकर बड़े बदलाव दिखे हैं।
  • अब करीब 89 फीसदी विवाहित महिलाएं घर के अहम फैसलों में शामिल हो रही हैं।
  • महिलाएं अपनी सेहत, खरीदारी और रिश्तेदारों के घर जाने का फैसला खुद ले रही हैं।
  • देश में खुद का बैंक खाता इस्तेमाल करने वाली महिलाएं अब 89% हो गई हैं।
  • नसबंदी के मामले में पुरुषों की भागीदारी अभी भी मात्र 0.5% पर रुकी है।

भारतीय परिवारों में बढ़ रही है महिलाओं की ताकत

भारत के आम परिवारों में एक बहुत ही खूबसूरत और बड़ा बदलाव आ रहा है। अब घर के बड़े और जरूरी फैसलों में महिलाओं की आवाज मजबूत हो रही है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे यानी एनएफएचएस-6 की रिपोर्ट यही इशारा करती है।



ताजा सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि विवाहित महिलाएं अब ज्यादा आत्मनिर्भर हो रही हैं। वे केवल घर ही नहीं संभाल रहीं, बल्कि हर छोटे-बड़े फैसले में हिस्सा ले रही हैं। यह बदलाव हमारे समाज के लिए बहुत ही सकारात्मक संदेश लेकर आया है।



घरेलू फैसलों में महिलाओं की हिस्सेदारी

नए सर्वे के अनुसार करीब 89 प्रतिशत महिलाएं घरेलू फैसलों में शामिल हैं। वे अपनी सेहत, इलाज और बड़ी खरीदारी पर अपनी राय खुलकर रखती हैं। रिश्तेदारों के घर जाने के मामलों में भी उनकी पूरी मर्जी चलती है।



शहरी इलाकों में यह भागीदारी सबसे ज्यादा यानी 91.4 फीसदी दर्ज की गई है। वहीं, ग्रामीण इलाकों की महिलाएं भी पीछे नहीं हैं और वे 88% पर हैं। पिछले कुछ सालों में यह आंकड़ा लगातार ऊपर की तरफ बढ़ रहा है।



साल दर साल बदल रही है महिलाओं की स्थिति?

अगर हम पुराने सर्वे के रिकॉर्ड देखें तो बदलाव की रफ्तार साफ समझ आती है। साल 2015-16 में यह भागीदारी केवल 84 प्रतिशत के आसपास दर्ज की गई थी। इसके बाद अगले सर्वे में यह आंकड़ा बढ़कर 88.7 फीसदी तक पहुंच गया।



अब ताजा रिपोर्ट में यह रिकॉर्ड बढ़कर पूरे 89 प्रतिशत पर आ गया है। इस तरह पैन-इंडिया यानी पूरे देश के स्तर पर सुधार दिख रहा है। महिलाएं अब अपनी मर्जी और अधिकारों को लेकर पहले से अधिक जागरूक हैं।



बैंक खातों के इस्तेमाल में आया भारी उछाल

महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में सबसे बड़ी भूमिका बैंक खातों की है। सर्वे के अनुसार अब ज्यादातर महिलाओं के पास अपने खुद के एक्टिव बैंक खाते हैं। पिछले सर्वे में ऐसी महिलाओं का आंकड़ा करीब 78.6 प्रतिशत दर्ज हुआ था।



अब यह आंकड़ा भी छलांग लगाकर सीधे 89 प्रतिशत के पार पहुंच गया है। इसका मतलब है कि महिलाएं न सिर्फ खाते खुलवा रही हैं बल्कि पैसों का लेनदेन भी खुद संभाल रही हैं। डिजिटल इंडिया के दौर में यह बहुत बड़ी उपलब्धि है।



रोजगार में अब भी हैं कई चुनौतियां

भले ही कई मोर्चों पर सुधार हुआ है, लेकिन कुछ चुनौतियां अभी बाकी हैं। सर्वे के समय पिछले 12 महीनों में काम करने वाली महिलाओं के आंकड़े सामने आए। इनमें से नकद सैलरी पाने वाली महिलाएं केवल 30.8 प्रतिशत ही पाई गईं।



दिलचस्प बात यह है कि पिछले सर्वे में यह आंकड़ा और कम यानी 25.4% था। शहरी क्षेत्रों में यह 29.8% और ग्रामीण क्षेत्रों में 31.2% है। महिलाओं को काम के बदले सही और नकद दाम मिलना अभी भी चुनौती है।



फैमिली प्लानिंग के तरीकों में दिखा अंतर

देश में विवाहित महिलाओं के बीच फैमिली प्लानिंग के तरीकों का इस्तेमाल बढ़ा है। यह आंकड़ा पिछले सर्वे के 66.7% से बढ़कर अब 69.1% तक पहुंच गया है। शहरों में 69.6% और गांवों में 68.9% महिलाएं इसे अपना रही हैं।



जब बात परिवार नियोजन (family planning) के तरीकों की आती है, तो महिलाएं आगे दिखती हैं। समाज में जागरूकता बढ़ने से स्वास्थ्य केंद्रों पर महिलाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। वे अपने परिवार के भविष्य को लेकर काफी सजग नजर आ रही हैं।



नसबंदी में महिला और पुरुष के बीच बड़ा फासला

सर्वे में नसबंदी को लेकर एक बहुत ही चौंकाने वाला अंतर सामने आया है। देश में आज भी महिला नसबंदी का आंकड़ा बहुत ज्यादा यानी 36.5% है। इसके विपरीत पुरुष नसबंदी का स्तर बेहद कम मात्र 0.5% पर अटका हुआ है।



ग्रामीण क्षेत्रों में महिला नसबंदी सबसे ज्यादा करीब 38.1 प्रतिशत देखी गई है। शहरों में रहने वाली महिलाओं के बीच यह आंकड़ा 32.6% के आसपास है। पुरुषों की भागीदारी शहरों (0.4%) और गांवों (0.5%) दोनों जगह बहुत कम है।



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