22 साल से पेट्रोल में मिल रहा इथेनॉल, अब गाड़ियों के खराब होने का डर क्यों-गडकरी
केंद्रीय सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने इथेनॉल और ई-20 नीति को लेकर खुलकर बात की है। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा कि वे सिर्फ इथेनॉल पर काम नहीं करते हैं। इलेक्ट्रिक, हाइड्रोजन, बायो-सीएनजी और मिथेनॉल पर भी काम जारी है।
गडकरी ने कहा कि उनका लक्ष्य साफ है। भारत प्रदूषण मुक्त बने। किसानों की आय बढ़े। युवाओं को रोजगार मिले। पेट्रोलियम आयात घटे।
क्यों उठे सवाल
जब गडकरी से पूछा कि परिवहन मंत्री होते हुए भी गडकरी इथेनॉल पर सबसे ज्यादा बोलते हैं। यह जिम्मेदारी तो पेट्रोलियम मंत्रालय की है।
इसके जवाब में गडकरी ने कहा कि ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग के मानक तय करना उनका अधिकार है। कौन सा ईंधन इस्तेमाल होगा यह फैसला पेट्रोलियम मंत्रालय करता है।
गडकरी ने बताया कि वे 25 साल से किसानों के हित में वैकल्पिक ईंधन पर काम कर रहे हैं। देश में हर साल लाखों करोड़ रुपए का जैविक ईंधन आयात होता है।
दिल्ली के प्रदूषण पर बात
गडकरी ने कहा कि दिल्ली के प्रदूषण का करीब 40% हिस्सा परिवहन क्षेत्र से आता है। इसे कम करना उनकी जिम्मेदारी है। उन्होंने किसानों को हुए फायदे का भी जिक्र किया।
गडकरी के मुताबिक मक्का की कीमत पहले एक हजार रुपए क्विंटल थी। एमएसपी 1800 रुपए तय थी। सरकार के एक फैसले के बाद मक्का का भाव बढ़कर 2600 से 2800 रुपए हो गया।
गडकरी ने यह भी बताया कि उन्होंने देश का पहला इलेक्ट्रिक स्कूटर, कार, बस और ट्रक लॉन्च किया है। साथ ही हाइड्रोजन ट्रक भी लॉन्च किया गया।
इथेनॉल की उपलब्धता पर जवाब
इसके बाद जब गडकरी से सवाल पूछा गया कि क्या भारत ई-20 के लिए जरूरी इथेनॉल बना पा रहा है। तब गडकरी ने बताया कि देश में सालाना 1450 करोड़ लीटर इथेनॉल की जरूरत है। मौजूदा क्षमता 1750 से 1800 करोड़ लीटर है।
गडकरी ने स्पष्ट किया कि इथेनॉल सिर्फ गन्ने से नहीं बनता है। मोलासेस, मक्का, टूटे चावल, पराली और बांस से भी इसे बनाया जा रहा है। इससे 2 लाख करोड़ रुपए का आयात बचा है। प्रदूषण भी घटा है। लक्ष्य है कि 2070 तक भारत कार्बन न्यूट्रल देश बने।
माइलेज घटने की शिकायत का जवाब
गडकरी के जब पूछा कि लोगों की शिकायत रही है कि ई-20 से गाड़ी का माइलेज घट रहा है। ARAI की रिपोर्ट में 6% अंतर का दावा किया गया है। इस पर गडकरी ने कहा कि माइलेज सड़क और ट्रैफिक दबाव पर भी निर्भर करता है।
गडकरी ने माना कि इथेनॉल की कैलोरी वैल्यू पेट्रोल से थोड़ी कम है। इसलिए कुछ हालात में मामूली अंतर संभव है। लेकिन इथेनॉल सस्ता है और प्रदूषण भी कम करता है। फ्लेक्स-फ्यूल इंजन आने के बाद यह अंतर और कम हो जाएगा।
गाड़ी खराब होने के दावों पर सफाई
गडकरी ने ई-20 से गाड़ियों को नुकसान होने के दावों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि 2004 से पेट्रोल में इथेनॉल मिलाया जा रहा है। अब तक कोई समस्या सामने नहीं आई।
साथ ही केद्रीय मंत्री नितिन गडकरीने चुनौती दी कि कोई ऐसा व्यक्ति बताए जिसकी गाड़ी इथेनॉल से खराब हुई हो। उनके मुताबिक कोई भी ईंधन लागू करने से पहले चार साल तक परीक्षण होता है।
दुनिया की बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनियां और तकनीकी संस्थान इसकी जांच करते हैं। इसके बाद ही सर्टिफिकेशन मिलता है।
सोशल मीडिया पर भ्रम
गडकरी ने कहा कि सोशल मीडिया पर इथेनॉल को लेकर भ्रामक बातें फैलाई जा रही हैं। दावा किया जा रहा है कि इथेनॉल के कारण पेट्रोल टंकी पर चींटी-मक्खी लगती है। उन्होंने इसे गलत बताया और कहा कि व्हिस्की, ब्रांडी या रम की बोतल पर कभी चींटी नहीं लगती। उनके मुताबिक इस मामले में दो इन्फ्लुएंसर भी अपने दावे वापस ले चुके हैं।
क्रूड सस्ता हो तो क्या होगा
गडकरी से एक सवाल यह भी था कि अगर क्रूड ऑयल 70 डॉलर से नीचे रहे तो क्या इथेनॉल फायदेमंद रहेगा। गडकरी ने माना कि क्रूड के दाम भारत के हाथ में नहीं हैं। कीमत गिरने के बाद एक स्तर पर इथेनॉल लाभकारी नहीं भी रह सकता बै। लेकिन उनका मकसद सिर्फ लागत नहीं बल्कि ऊर्जा सुरक्षा, प्रदूषण में कमी और किसानों की आय बढ़ाना है।
ब्राजील का उदाहरण
इसके अलावा गडकरी ने ब्राजील का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि वहां 1970 से 100% इथेनॉल इस्तेमाल हो रहा है। टोयोटा, होंडा, हुंडई, सुजुकी और मर्सिडीज जैसी कंपनियों की गाड़ियां वहां चलती हैं। एक ही पेट्रोल पंप पर चार विकल्प मौजूद हैं। उन्होंने माना कि भारत में अभी यह विकल्प नहीं है, क्योंकि हर देश की परिस्थितियां अलग होती हैं।
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