OBC क्रीमी लेयर पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से उलझन, दो महीने से अटकी IAS की ट्रेनिंग, जानें पूरा मामला

Sourabh Bhatnagar | Oct 26, 2026, 08:36 IST
IAS ट्रेनिंग दो महीने से अटकी, OBC क्रीमी लेयर नियमों पर सुप्रीम कोर्ट के जवाब का इंतजार
IAS बनने का सपना पूरा हुआ, लेकिन ट्रेनिंग का इंतजार खत्म नहीं। ओबीसी क्रीमी लेयर पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से नई उलझन पैदा हो गई है। सवाल है कि यह फैसला पुरानी भर्तियों पर भी लागू होगा या नहीं। इसी कारण दो महीने से IAS की ट्रेनिंग अटकी हुई है। फैसले का असर UPSC के अलावा SSC, रेलवे और बैंक भर्तियों पर भी पड़ सकता है।

दो महीने से क्यों अटकी IAS ट्रेनिंग?

सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च 2026 को ओबीसी क्रीमी लेयर पर फैसला सुनाया था। इसके बाद नियम लागू करने को लेकर सवाल खड़े हो गए।



सबसे बड़ा सवाल पुरानी भर्तियों को लेकर है। सरकार जानना चाहती है कि फैसला पिछली भर्तियों पर भी लागू होगा या नहीं।



इसी वजह से आईएएस की फाउंडेशन ट्रेनिंग शुरू नहीं हो सकी। यह ट्रेनिंग अगस्त के तीसरे सप्ताह से शुरू होनी थी।



अब दो महीने से ट्रेनिंग शुरू होने का इंतजार किया जा रहा है।



केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से क्या पूछा?

कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने रविवार शाम एक नोट जारी किया। इसमें सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर सरकार की स्थिति बताई गई।



विभाग के अनुसार सरकार फैसले को लागू करने का तरीका स्पष्ट कराना चाहती है।



इसके लिए पिछले 14 वर्षों की सिविल सेवा परीक्षाओं के आंकड़े जुटाए गए हैं। इन आंकड़ों के आधार पर संभावित असर का आकलन किया गया है।



केंद्र सरकार ने 24 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी।



इस मामले में 24 सितंबर को सुनवाई हुई। कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। फिलहाल फैसला आना बाकी है।



सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च को क्या कहा था?

सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च को ओबीसी आरक्षण पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया था।



कोर्ट ने कहा कि केवल माता-पिता की आय देखकर क्रीमी लेयर तय नहीं होगी।



इसके लिए माता-पिता का पद और सामाजिक स्थिति भी देखनी होगी।



सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी और निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के बच्चों का मुद्दा भी उठाया।



कोर्ट के अनुसार दोनों के लिए अलग-अलग तरीके अपनाना अनुचित भेदभाव होगा।



जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने यह फैसला सुनाया था।



कोर्ट ने केंद्र सरकार की अपील खारिज कर दी थी। साथ ही दिल्ली, मद्रास और केरल हाईकोर्ट के फैसलों को सही माना था।



UPSC उम्मीदवारों को क्या राहत मिली?

इस फैसले से कई UPSC उम्मीदवारों को राहत मिली थी।



इन उम्मीदवारों ने सिविल सेवा परीक्षा पास कर ली थी। इसके बावजूद उन्हें नौकरी नहीं मिल सकी थी।



सरकार ने उनके माता-पिता की सैलरी के आधार पर क्रीमी लेयर तय की थी।



इसी कारण उन्हें ओबीसी आरक्षण का लाभ नहीं दिया गया था।



सुप्रीम कोर्ट ने इस तरीके को गलत माना। कोर्ट ने कहा कि केवल वेतन के आधार पर आरक्षण से बाहर करना सही नहीं है।



क्रीमी लेयर क्या होती है?

ओबीसी वर्ग में आर्थिक और सामाजिक रूप से संपन्न परिवारों को क्रीमी लेयर कहा जाता है।



इन परिवारों को ओबीसी आरक्षण का लाभ नहीं मिलता।



इस नियम का उद्देश्य जरूरतमंद और पिछड़े वर्गों तक आरक्षण का लाभ पहुंचाना है।



सुप्रीम कोर्ट ने 1992 में इंदिरा साहनी मामले में क्रीमी लेयर का सिद्धांत लागू किया था।



इसे मंडल आयोग मामले के नाम से भी जाना जाता है।



इसके बाद ओबीसी के संपन्न वर्ग को सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों के आरक्षण से बाहर किया गया।



पुरानी भर्तियों पर क्या असर पड़ेगा?

सबसे बड़ी चिंता पुरानी सरकारी भर्तियों को लेकर है।



अगर सुप्रीम कोर्ट का फैसला पिछली भर्तियों पर लागू हुआ तो कई मामले दोबारा खुल सकते हैं।



पिछले 10 से 14 वर्षों के उम्मीदवार फिर से अपने मामलों की जांच मांग सकते हैं।



इनमें वे उम्मीदवार शामिल हो सकते हैं जिन्हें क्रीमी लेयर के कारण आरक्षण नहीं मिला था।



वे अपनी रैंक और सर्विस बदलने की मांग कर सकते हैं।



उदाहरण के लिए कोई उम्मीदवार IAS, IPS या IRS में नई सेवा आवंटन की मांग कर सकता है।



इससे पहले से नियुक्त अधिकारियों की स्थिति प्रभावित हो सकती है।



मौजूदा IAS और IPS अधिकारियों पर असर

पुराने उम्मीदवारों को राहत मिलने से वरिष्ठता का विवाद पैदा हो सकता है।



अगर किसी उम्मीदवार को पिछली तारीख से नियुक्ति या वरिष्ठता मिलती है तो मौजूदा अधिकारियों पर असर पड़ेगा।



इससे उनकी सीनियरिटी बदल सकती है।



इसके अलावा कैडर और सेवा शर्तों को लेकर भी सवाल उठ सकते हैं।



कई अधिकारी पिछले दस वर्षों से ज्यादा समय से नौकरी कर रहे हैं।



ऐसे में पुराने मामलों को दोबारा खोलने से प्रशासनिक मुश्किलें बढ़ सकती हैं।



SSC और रेलवे भर्तियां भी प्रभावित होंगी?

इस फैसले का संभावित असर केवल UPSC तक सीमित नहीं है।



SSC Recruitment, रेलवे भर्ती बोर्ड और बैंक भर्ती के मामले भी प्रभावित हो सकते हैं।



इन संस्थानों में भी ओबीसी आरक्षण के तहत भर्तियां होती हैं।



जिन उम्मीदवारों को पहले क्रीमी लेयर के आधार पर बाहर किया गया था वे दोबारा जांच की मांग कर सकते हैं।



हालांकि यह स्थिति सुप्रीम कोर्ट के अंतिम स्पष्टीकरण पर निर्भर करेगी।



IIT और IIM में दाखिलों पर भी असर संभव

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से उच्च शिक्षण संस्थानों में पुराने दाखिलों पर भी सवाल उठ सकते हैं।



इनमें IIT, IIM, AIIMS और NIT जैसे संस्थान शामिल हैं।



केंद्रीय विश्वविद्यालयों के पुराने OBC Admission मामलों में भी विवाद संभव है।



जिन छात्रों को माता-पिता की सैलरी के आधार पर आरक्षण नहीं मिला था वे पुनर्विचार मांग सकते हैं।



हालांकि पुराने दाखिलों की दोबारा जांच होगी या नहीं यह अभी साफ नहीं है।



किन लोगों को नहीं मिलता OBC आरक्षण?

क्रीमी लेयर के नियमों में कुछ प्रमुख स्थितियां तय हैं।



  • निर्धारित आय सीमा के तहत 8 लाख रुपए से अधिक सालाना आय होना।
  • माता या पिता का ग्रुप-A का सरकारी अधिकारी होना।
  • माता और पिता दोनों का ग्रुप-B सरकारी अधिकारी होना।
  • माता या पिता का 40 वर्ष से पहले ग्रुप-A में प्रमोट होना।
  • माता या पिता का सेना में कर्नल या उससे ऊपर की रैंक पर होना।

ध्यान दें:केवल सालाना वेतन आठ लाख रुपए से अधिक होना क्रीमी लेयर तय करने का पर्याप्त आधार नहीं है। आय के स्रोत और माता-पिता की सेवा श्रेणी भी महत्वपूर्ण हैं।



SC-ST के लिए क्या है नियम?

फिलहाल SC और ST वर्गों के लिए ओबीसी जैसा क्रीमी लेयर नियम लागू नहीं है।



केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में भी यही स्थिति स्पष्ट की है।



सरकार के अनुसार SC-ST आरक्षण सामाजिक और ऐतिहासिक भेदभाव पर आधारित है।



इसलिए केवल आर्थिक स्थिति को इसका आधार नहीं बनाया जा सकता।



SC-ST की आधिकारिक सूची में बदलाव करने का अधिकार संसद के पास है।



अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार

केंद्र सरकार चाहती है कि सुप्रीम कोर्ट अपने 11 मार्च के फैसले को लागू करने की स्थिति स्पष्ट करे।



सरकार की मुख्य चिंता पुरानी नियुक्तियों और मौजूदा अधिकारियों के अधिकारों को लेकर है।



फैसले का असर सरकारी नौकरियों के अलावा शिक्षण संस्थानों तक पहुंच सकता है।



फिलहाल OBC Reservation Rules को लेकर अंतिम स्पष्टीकरण का इंतजार है।



इसी के बाद यह स्पष्ट होगा कि पुराने उम्मीदवारों के मामलों में क्या कार्रवाई होगी। साथ ही आईएएस की रुकी ट्रेनिंग और सेवा आवंटन का रास्ता भी साफ हो सकेगा।

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